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Autobahn Germany: जर्मनी में हाईवे पर नहीं होती स्पीड लिमिट, जानें क्या है इसके पीछे की वजह?

Autobahn Germany: जर्मनी में हाईवे पर कोई स्पीड लिमिट नहीं होती. आइए जानते हैं क्या हैं इसके पीछे की वजह और क्यों लिया गया ऐसा फैसला.

Autobahn Germany: जर्मनी का ऑटोबान काफी ज्यादा मशहूर है.  दरअसल दुनिया भर के कार शौकीनों के लिए यह ड्राइविंग का सबसे बड़ा सपना है. लंबे, चिकने हाईवे जहां पर ड्राइवर कानूनी तौर पर अपनी गाड़ियों को काफी तेज स्पीड पर चला सकते हैं. लेकिन क्या यह सच है कि वहां कोई स्पीड लिमिट नहीं है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

कोई परमानेंट स्पीड लिमिट नहीं 

ऑटोबान नेटवर्क के बड़े हिस्सों में कोई परमानेंट स्पीड लिमिट नहीं है. लेकिन कई  हिस्सों में ट्रैफिक, मौसम, शहरी इलाकों या फिर सुरक्षा चिंताओं की वजह से पाबंदियां हैं. नेटवर्क का लगभग 70% हिस्सा बिना किसी तय लिमिट के चलता है. किसानों के सिस्टम के पीछे की वजह इतिहास, इंजीनियरिंग की बेहतर क्वालिटी, ड्राइविंग डिसिप्लिन और इकोनॉमिक पॉलिसी है.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद आजादी का प्रतीक

आजकल की नो स्पीड लिमिट पॉलिसी 1952 की है. जब वेस्ट जर्मनी में आम हाईवे स्पीड लिमिट हटा दी थी तब यह फैसला लिया गया था. यह कदम राजनीतिक रूप से सिंबॉलिक था. नाजी शासन के खत्म होने और कोल्ड वॉर के दौरान वेस्ट जर्मनी कम्युनिस्ट ईस्ट जर्मनी के उलट डेमोक्रेटिक आजादी और व्यक्तिगत आजादी पर जोर देना चाहता था.

दिलचस्प बात यह है कि नाजी दौर में स्पीड लिमिट मुख्य रूप से फ्यूल बचाने के लिए शुरू की गई थी. युद्ध के बाद उन लिमिट को हटाना तानाशाही कंट्रोल से ब्रेक लेने और सड़कों पर पर्सनल जिम्मेदारी और आजादी की भावना को बढ़ावा देने का एक तरीका बन गया.

हाई स्पीड के लिए डिजाइन की गई इंजीनियरिंग 

यह कोई आम हाईवे नहीं है. इसे काफी ऊंचे इंजीनियरिंग स्टैंडर्ड के हिसाब से बनाया गया है. दुनिया भर के कई दूसरे हाईवे सिस्टम की तुलना में इसकी सड़क की सतह ज्यादा मोटी और टिकाऊ है. इसे खासतौर पर लगातार हाई स्पीड ट्रैवल झेलने के लिए डिजाइन किया गया है. जर्मनी मेंटेनेंस में काफी ज्यादा इनवेस्ट करता है. 

सड़कों की रेगुलर जांच की जाती है ताकि गड्ढे, दरारें या ऊबड़-खाबड़ सतहें ना हों. यह ऐसी समस्याएं हैं जो काफी तेज स्पीड पर जानलेवा हो सकती है. हल्के मोड़, लंबी विजिबिलिटी रेंज, और ध्यान से डिजाइन किए गए एंट्री और एग्जिट रैंप भी ज्यादा स्पीड के बावजूद सेफ्टी में मदद करते हैं. 

सख्त ड्राइविंग डिसिप्लिन 

जर्मनी बिना रोक टोक वाली स्पीड की इजाजत क्यों दे सकता है इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी सख्त ड्राइविंग ट्रेनिंग और रोड डिसिप्लिन है. जर्मनी में ड्राइविंग लाइसेंस लेना काफी महंगा और मुश्किल है. ड्राइवरों को कड़ी थियोरेटिकल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. यही वजह है कि जो लोग पास होते हैं वह आमतौर पर हाई स्पीड हाईवे ड्राइविंग के लिए अच्छी तरह से तैयार होते हैं. इसी के साथ लेन डिसिप्लिन ने का भी सख्ती से पालन किया जाता है. धीमी गति से चलने वाली गाड़ियों को दाईं लेन में रहना चाहिए जबकि बाईं लेन ओवरटेकिंग के लिए रिजर्व है.

एडवाइजरी स्पीड और कानूनी जिम्मेदारी 

हालांकि कई सेक्शन पर कोई भी स्पीड लिमिट नहीं है. जर्मनी 130 किलोमीटर प्रति घंटे की एडवाइजरी स्पीड रिकमेंड करता है. यह कानूनी तौर पर जरूरी नहीं है लेकिन यह लायबिलिटी में एक बड़ी भूमिका निभाता है. अगर कोई ड्राइवर 130 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा स्पीड से गाड़ी चलाता है और किसी एक्सीडेंट में शामिल होता है तो उस पर ज्यादा कानूनी जिम्मेदारी आ सकती है. अब इसमें भले ही उसकी पूरी गलती ना हो. ऐसे मामलों में इंश्योरेंस क्लेम और मुश्किल हो सकते हैं.

ये भी पढ़ें:  जापान में झुक कर और यूरोप में हाथ मिलाकर क्यों किया जाता है अभिवादन, जानें क्यों है यह अंतर

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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