अपने साथ कितने लीटर पानी लेकर उड़ता है हवाई जहाज, जान लें जवाब
Airplane Water Capacity: विमान जब उड़ता है तो अपने साथ काफी सारा पानी भी लेकर जाता है. आइए जानते हैं कि विमान में कितना पानी रखा जाता है.

- विमान पीने का साफ पानी विशेष टैंकों में ले जाता है।
- पानी का वजन महत्वपूर्ण है; दबाव प्रणाली से केबिन में पहुंचता है।
- एयरलाइन उड़ान अनुसार पानी भरती, साफ-अपशिष्ट जल तंत्र अलग।
Airplane Water Capacity: जब भी कोई विमान उड़ान भरता है तो वह यात्रियों, सामान और ईंधन के अलावा और भी काफी कुछ ले जाता है. उसे पीने, खाना बनाने, हाथ धोने और विमान की सुविधाओं को चलाने के लिए काफी साफ पानी की भी जरूरत होती है. हालांकि एयरलाइंस हर उड़ान में विमान के पानी के टैंक को पूरा नहीं भर सकती. ऐसा इसलिए क्योंकि पानी का अपना काफी वजन होता है और एविएशन में हर अतिरिक्त किलोग्राम मायने रखता है. आइए जानते हैं कि आखिर विमान में कितना पानी होता है.
विमान में कितना पानी होता है?
एक आम नैरो बॉडी विमान जैसे कि एयरबस A320 या फिर बोइंग 737 में लगभग 200 लीटर पीने का पानी हो सकता है. बड़े और लंबी दूरी के विमान जैसे की बोइंग 777 या फिर 787 में लगभग 1000 लीटर पानी हो सकता है जबकि एयरबस A380 मैं विमान के कंफीग्रेशन और ऑपरेशनल जरूरत के आधार पर लगभग 1500 लीटर या उससे ज्यादा पानी हो सकता है. इस ऑनबोर्ड सिस्टम को पोर्टेबल वॉटर सिस्टम कहा जाता है.

पानी कहां जमा किया जाता है?
विमान हल्के और मजबूत मटेरियल से बने खास तौर पर डिजाइन किए गए स्टोरेज टैंक का इस्तेमाल करते हैं. यह टैंक आम तौर पर विमान के निचले हिस्से में अक्सर कार्गो या फिर निचले डेक वाले इलाके में रखे जाते हैं. उनकी जगह का ध्यान से चुनाव किया जाता है क्योंकि पानी भरा होता है. 1 लीटर पानी का वजन लगभग 1 किलोग्राम होता है. इसका मतलब है कि 1000 लीटर पानी विमान के वजन में लगभग 1 टन की बढ़ोतरी करता है. इस वजह से इंजीनियर टैंक को इस तरह से लगाते हैं कि विमान का बैलेंस और सेंटर ऑफ ग्रेविटी बना रहे.
पानी केबिन तक कैसे पहुंचता है?
पानी का टैंक सिर्फ ग्रेविटी से नल से नहीं जुड़ा होता. इसके बजाय सिस्टम में प्रेशर बनाया जाता है ताकि पानी विमान के निचले हिस्से से रसोई और टॉयलेट तक पहुंच सके. कई विमान में प्रेशर बनाने के लिए विमान के न्यूमैटिक सिस्टम की हवा का इस्तेमाल किया जा सकता है. जब इंजन नहीं चल रहे होते तो एक ऑक्सिलरी या फिर इलेक्ट्रिक सिस्टम जरूरी प्रेशर बनाए रख सकता है. इसके बाद प्रेशर वाला पानी खास पाइप लाइन के जरिए गैली के इक्विपमेंट, वॉशबेसिन और दूसरे मंजूर आउटलेट तक पहुंचता है.

एयरलाइन हमेशा टैंक को पूरा क्यों नहीं भरतीं?
एविएशन में वजन काफी जरूरी होता है. जरूर से ज्यादा पानी ले जाने का मतलब है कि उस वजन को ढोने के लिए इंजन को ज्यादा ईंधन जलाना पड़ता है. उदाहरण के लिए 200 लीटर पानी का मतलब है लगभग 200 किलोग्राम, 1000 लीटर का मतलब है लगभग 1 टन और 1500 लीटर का मतलब है लगभग 1.5 टन.
इस वजह से एयरलाइंस हिसाब लगाती हैं कि किसी खास उड़ान के लिए असल में कितना पानी चाहिए. कितना पानी भरना है इस बात को तय करने से पहले यात्रियों की संख्या, उड़ान की अवधि और ऑपरेशन से जुड़ी जरूरत पर ध्यान दिया जाता है.
कम यात्रियों वाली छोटी उड़ान के लिए पूरी क्षमता से चलने वाली लंबी दूरी की उड़ान की तुलना में काफी कम पानी की जरूरत हो सकती है.
क्या टॉयलेट का पानी पीने के पानी में मिलाया जाता है?
नहीं. एयरक्राफ्ट में साफ पानी और टॉयलेट के कचरे के लिए अलग सिस्टम होते हैं. पीने के पानी वाले टैंक को साफ पानी केबिन की मंजूरी प्राप्त सुविधा, जैसे टॉयलेट के वॉशबेसिन और एयरक्राफ्ट की रसोई तक पहुंचाया जाता है. वहीं टॉयलेट के कचरे को एक अलग वेस्ट सिस्टम के जरिए संभाला जाता है. आधुनिक एयरक्राफ्ट में आमतौर पर वैक्यूम टॉयलेट सिस्टम का इस्तेमाल होता है. इसमें तेज खींचने की शक्ति का इस्तेमाल करके कचरे को तेजी से एक खास वेस्ट टैंक में पहुंचाया जाता है.
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वॉश बेसिन से निकलने वाले पानी का क्या होता है?
टॉयलेट या फिर रसोई सिंक से बहने वाला पानी ग्रे वॉटर बन जाता है. कई एयरक्राफ्ट में यह इस्तेमाल किया हुआ पानी उड़ान के दौरान खासतौर पर डिजाइन किए गए ड्रेन सिस्टम के जरिए बाहर निकाल दिया जाता है. इन आउटलेट में गर्म होने वाले ड्रेन मास्ट का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसा इसलिए ताकि ज्यादा ऊंचाई पर जहां बाहर का तापमान काफी कम हो सकता है पानी एयरक्राफ्ट के आसपास जमा न हो जाए.
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