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राज्यसभा जाने के बाद कब तक बिहार के सीएम बने रह सकते हैं नीतीश कुमार, इस्तीफा देने के लिए कितना समय मिलता है?

Nitish Kumar CM Resignation: नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ले ली है. इसी बीच आइए जानते हैं कि सांसद बनने के बाद वह कब तक मुख्यमंत्री के पद पर रह सकते हैं.

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  • नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली है।
  • संविधान के अनुसार, वे छह महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं।
  • दोहरी सदस्यता नहीं होने से उन्होंने विधान परिषद से इस्तीफा दिया।
  • संभवतः वह जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।

Nitish Kumar CM Resignation: एक लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ले ली है. अब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद को छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. इसके बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि सांसद बनने के बाद वे मुख्यमंत्री के पद पर कब तक बने रह सकते हैं और उनके इस्तीफे की अंतिम समय सीमा क्या है? आइए जानते हैं.

6 महीने की संवैधानिक छूट 

भारतीय संविधान के तहत कोई भी व्यक्ति जो राज्य विधान मंडल का सदस्य नहीं है वह अधिकतम 6 महीने तक मुख्यमंत्री के पद पर बना रह सकता है. क्योंकि नीतीश कुमार बिहार विधान परिषद के सदस्य नहीं रहे इस वजह से वे अब इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं. इसका मतलब यह है कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद भी वे 10 अप्रैल 2026 से लेकर अगले 6 महीने तक कानूनी तौर पर मुख्यमंत्री के पद पर बने रह सकते हैं.

दोहरी सदस्यता की अनुमति नही

संविधान के अनुच्छेद 101(2) और दोहरी सदस्यता निषेध नियम 1950 के मुताबिक के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एक ही समय पर सांसद और राज्य विधान मंडल दोनों का सदस्य नहीं हो सकता. इसी नियम का पालन करते हुए नीतीश कुमार ने 30 मार्च 2026 को ही अपने बिहार विधान परिषद पद से इस्तीफा दे दिया था. यह राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद निर्धारित 14 दिनों की समय सीमा के अंदर था.

इस्तीफे के बाद क्या होगा?

हालांकि संविधान छह महीने तक पद पर बने रहने की छूट देता है लेकिन ऐसी उम्मीद नहीं है कि नीतीश कुमार इस पूरी अवधि का लाभ उठाएंगे. नीतीश कुमार द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद वे अपना त्याग पत्र बिहार के राज्यपाल को सौंपेंगे. इस्तीफा स्वीकार हो जाने के बाद जब तक किसी नए नेता की नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पद पर बने रह सकते हैं. 

6 महीने की समय सीमा काफी ज्यादा कठोर नियम है. अगर कोई ऐसा मुख्यमंत्री जो विधानमंडल का सदस्य नहीं है इस निर्धारित अवधि के अंदर विधानमंडल का सदस्य नहीं बन पाता तो उसे अनिवार्य रूप से अपने पद से इस्तीफा देना पड़ता है. नीतीश कुमार के मामले में अब वह सांसद बन चुके हैं. इस वजह से वह अपनी संसदीय सीट का त्याग के बिना राज्य विधान मंडल में वापस नहीं आ सकते.

यह भी पढ़ें: क्या राज्यसभा सांसद बनने के बाद भी नीतीश कुमार को मिलती रहेगी बिहार सरकार से पेंशन, क्या है नियम?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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