कोई वकील कैसे बन जाता है सीनियर एडवोकेट, इसके लिए क्या करना होता है?
Senior Advocate: सुप्रीम कोर्ट में CJI की टिप्पणी के बाद फिर चर्चा शुरू हो गई कि आखिर कोई वकील सीनियर एडवोकेट कैसे बनता है और इसके नियम क्या हैं. यहां जाने पूरी जानकारी.

Senior Advocate: सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में नकली लॉ डिग्रियों और कानूनी पेशे से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान एक टिप्पणी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर कहा कि कुछ बेरोजगार युवा “कॉकरोच की तरह” होते हैं, जो नौकरी न मिलने पर सोशल मीडिया या अन्य गतिविधियों में चले जाते हैं और कई बार हर किसी पर सवाल उठाने लगते हैं.
इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि आखिर बेरोजगार युवाओं को इस तरह क्यों कहा गया. इसी चर्चा के बीच लोगों के मन में यह सवाल भी उठने लगा कि आखिर वकील कैसे बनते हैं और सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट बनने का रास्ता क्या होता है.
वकील बनने की शुरुआत कैसे होती है
वकील (Advocate) से सीनियर एडवोकेट (Senior Advocate) बनने की प्रक्रिया 'एडवोकेट्स एक्ट, 1961' और सुप्रीम कोर्ट या संबंधित हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों द्वारा तय होती है. वकील बनने के लिए सबसे पहले 12वीं पास करना जरूरी होता है. इसके बाद छात्र LLB कोर्स करते हैं, जो 3 साल या 5 साल का होता है. इस कोर्स में कानून, कोर्ट सिस्टम और केस कैसे चलते हैं, यह सब सिखाया जाता हैं. इसके बाद छात्र को Bar Council में रजिस्ट्रेशन करना होता है और AIBE परीक्षा पास करनी होती है. तभी कोई व्यक्ति कोर्ट में वकालत कर सकता है. यही वकील बनने की पहली सीढ़ी होती है.
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कोर्ट में प्रैक्टिस और सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
LLB के बाद असली काम शुरू होता है कोर्ट में प्रैक्टिस का. शुरुआत में वकील किसी सीनियर के साथ काम करता है, केस समझता है और धीरे-धीरे खुद केस लड़ना शुरू करता है. पहले जिला कोर्ट, फिर हाई कोर्ट और उसके बाद अनुभव बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने का मौका मिलता है. साथ ही यह सफर आसान नहीं होता, इसमें सालों की मेहनत, केस की समझ और लगातार सीखने की जरूरत होती है.
सीनियर एडवोकेट बनने की पूरी प्रक्रिया
सीनियर एडवोकेट बनने के लिए कुछ जरूरी नियम होते हैं. इसके लिए कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए, जिसमें हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में वकालत या न्यायिक सेवा का अनुभव शामिल हो सकता है. कोई वकील खुद भी इसके लिए आवेदन कर सकता है या फिर कोर्ट के जज भी किसी योग्य वकील के नाम का प्रस्ताव दे सकते हैं. इसके बाद एक स्थायी समिति (Permanent Committee) बनाई जाती है, जो पिछले 5 साल के केस, महत्वपूर्ण मामलों और वकील की कानूनी समझ का मूल्यांकन करती है.
इसके बाद वकील का इंटरव्यू लिया जाता है और फिर सभी जज मिलकर (Full Court Meeting) अंतिम फैसला लेते हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मामलों की चर्चा के बीच यह बात फिर सामने आई है कि यह दर्जा सिर्फ योग्यता और लंबे अनुभव के बाद ही मिलता है. सान शब्दों में कहें तो पहले पढ़ाई, फिर सालों की प्रैक्टिस और फिर जाकर सीनियर एडवोकेट का सम्मान मिलता है.
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Source: IOCL

























