किस देश की राजधानी कौन सी होगी यह कैसे होता है तय, जानें पूरी प्रक्रिया?
Capital of a Country: क्या आपने कभी सोचा है किसी देश की राजधानी कैसे चुनी जाती है. आइए जानते हैं.

Capital of a Country: जब भी हम किसी देश के बारे में बात करते हैं तो उसकी राजधानी उन पहली चीजों में से एक होती है जिनके बारे में हम जानते हैं. भारत के लिए दिल्ली, यूके के लिए लंदन, जापान के लिए टोक्यो और स्पेन के लिए मैड्रिड, यह शहर सिर्फ प्रशासनिक केंद्र ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय शक्ति और पहचान का प्रतीक भी हैं. लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि किसी खास शहर को राजधानी के तौर पर क्यों चुना जाता है? क्या कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय नियम है जो तय करता है कि कौन सा शहर राजधानी बनेगा? या फिर कोई देश यह फैसला अपने आप ले सकता है? आईए जानते हैं इस पूरी प्रक्रिया के बारे में.
ऐसा कोई भी नियम नहीं
ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय नियम नहीं है जो देश को यह बताए कि कौन सा शहर उनकी राजधानी होनी चाहिए. हर संप्रभु देश को अपनी राजनीतिक व्यवस्था, इतिहास, भूगोल और प्रशासनिक जरूरत के हिसाब से अपनी राजधानी तय करने का अधिकार है. कुछ मामलों में ऐतिहासिक महत्व चुनाव का आधार बनता है. इसी के साथ कुछ मामलों में प्रशासनिक केंद्र के तौर पर काम करने के लिए बिल्कुल नया शहर बसाया जाता है.
ऐतिहासिक महत्व किसी शहर को राजधानी बना सकता है
इतिहास उन सबसे अहम वजहों में से एक है जिनकी वजह से कुछ शहर राजधानी बनते हैं. जो शहर सदियों से शाही सत्ता, प्रशासन, संस्कृति या फिर व्यापार का केंद्र रहा हो उसका राजनीतिक महत्व अक्सर बना रहता है. दिल्ली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. यह शहर सदियों से राजनीतिक सत्ता का अहम केंद्र रहा है. जिस वजह से इसे भारत की राजधानी का दर्जा मिला है. इसी तरह यूनाइटेड किंगडम के राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र के तौर पर लंदन का लंबा इतिहास रहा है. इस वजह से राजधानी का हमेशा नया चुना हुआ या फिर केंद्र में स्थित शहर होना जरूरी नहीं है. 
भूगोल की भूमिका
शहर की लोकेशन फैसले पर असर डाल सकती है. सरकारें ऐसे शहर को प्राथमिकता दे सकती हैं जो देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रशासनिक केंद्र तक आसानी से पहुंचा जा सके. सुरक्षा भी एक विचारणीय पहलू हो सकता है. ऐतिहासिक रूप से कुछ देशों ने देश के अंदर हिस्से में राजधानियां बनाने को प्राथमिकता दी है. ऐसा इसलिए क्योंकि वहां समुद्र से होने वाले हमलों को खतरा कम होता है.
उदाहरण के लिए मैड्रिड स्पेन के भौगोलिक केंद्र के पास स्थित है और देश का राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र बना. हालांकि भूगोल कोई अटल नियम नहीं है. कई राजधानियां समुद्र तट के पास या फिर भौगोलिक केंद्र से दूर स्थित होती हैं क्योंकि दूसरी राजनीतिक और ऐतिहासिक वजह ज्यादा जरूरी हो सकती हैं.
प्रशासनिक सुविधा एक और बड़ी वजह
किसी देश की राजधानी को सरकारी दफ्तरों से कहीं ज्यादा चीजों की जरूरत होती है. संसद, अदालत, मंत्रालय, सरकारी आवास और विदेशी दूतावास के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है. अगर कोई मौजूद शहर काफी ज्यादा भीड़ भाड़ वाला हो जाए या फिर वहां और प्रशासनिक विस्तार की गुंजाइश न हो तो सरकार एक नई नियोजित राजधानी बनाने का फैसला कर सकती है.
ब्राजील इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इस देश ने अपनी राजधानी रियो डी जनेरियो से बदलकर ब्रासीलिया कर दी. यह खास तौर पर एक नए प्रशासक केंद्र के तौर पर नियोजित और विकसित किया गया था.
जब दो शहरों के बीच होड़ हो तो क्या होता है?
कभी-कभी राजस्थानी चुनने का मामला राजनीतिक विवाद बन सकता है. दो बड़े शहर इस दर्जे के लिए झगड़ा कर सकते हैं और किसी एक को चुनने से दूसरे में असंतोष पैदा हो सकता है. ऐसे हालातो में बीच का रास्ता निकालते हुए किसी तीसरे शहर को चुना जा सकता है. ऑस्ट्रेलिया का कैनबरा इसका एक जाना माना उदाहरण है. सिडनी और मेलबर्न बड़े प्रतिस्पर्धी शहर थे. इस वजह से उनके बीच राष्ट्रीय राजधानी के तौर पर कैनबरा को चुना गया. इसी तरह देश की शुरुआत विकास के दौरान राजनीतिक समझौते के बाद वाशिंगटन डीसी को संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी के तौर पर चुना गया .
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