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गांजे का भ्रम या शराब का हैंगओवर, सबसे ज्यादा जानलेवा क्या?

हाल ही में एयर इंडिया के पालयट के ड्रग टेस्ट में मारिजुआना पॉजिटिव आया है, जिसके बाद इस बात की चर्चा बढ़ गई है कि गांजा का नशा ज्यादा खतरनाक है या फिर शराब का? चलिए इसका जवाब जानें.

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  • शराब अंगों को क्षति, गांजा मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
  • गांजे का नशा 1-3 घंटे, THC हफ्तों तक शरीर में।
  • शराब का नशा लिवर पर निर्भर, अधिक मौतें-सामाजिक नुकसान।

Ganja Vs Alcohol Health Risk: नशे की लत और इसके शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर अक्सर बहस छिड़ी रहती है. शराब और गांजा दोनों ही सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह हैं, लेकिन इनमें से कौन ज्यादा घातक है और किसका नशा जल्दी उतरता है, इस सवाल का वैज्ञानिक जवाब हर कोई जानना चाहता है. अमेरिका की संस्थाओं एनआईडीए (NIDA) और एनआईएएए (NIAAA) के शोध बताते हैं कि इन दोनों पदार्थों का शरीर पर असर करने और उतरने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग है. 

गांजे का नशा शरीर पर कितनी देर तक रहता है?

गांजे का नशा कितनी देर तक रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसका सेवन किस तरह किया गया है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन ड्रग एब्यूज (NIDA) के अनुसार, धुएं के रूप में गांजा पीने पर इसका असर तुरंत शुरू होता है और आमतौर पर 1 से 3 घंटे तक रहता है. वहीं, अगर गांजे या भांग का सेवन खाने या पीने की चीजों के जरिए किया जाए, तो इसका असर देर से शुरू होता है लेकिन कई घंटों तक लगातार बना रहता है. हर व्यक्ति के शरीर की बनावट और गांजे में मौजूद टीएचसी (THC) की मात्रा के आधार पर यह समय बदल सकता है.

कितने दिन तक खून में पाया जा सकता है गांजा?

गांजे में पाया जाने वाला मुख्य रसायन टीएचसी शरीर से इतनी आसानी से बाहर नहीं निकलता है. भले ही इंसान को लगे कि कुछ घंटों में उसका नशा पूरी तरह उतर गया है, लेकिन टीएचसी शरीर के फैट, खून और बालों में हफ्तों तक जमा रहता है. इसी वजह से मेडिकल जांच में कई दिनों बाद भी लोगों के शरीर में गांजा पकड़ में आ जाता है. हालांकि, टेस्ट में टीएचसी मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि व्यक्ति ने कुछ घंटे पहले ही इसका सेवन किया था.

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शराब का नशा उतरने का क्या है गणित?

शराब का नशा उतरने का भी कोई तय समय नहीं होता, क्योंकि यह इंसान के वजन, मेटाबॉलिज्म और पीने की गति पर निर्भर करता है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन अल्कोहल एब्यूज एंड अल्कोहलिज्म (NIAAA) के मुताबिक, मानव शरीर शराब को एक निश्चित गति से ही प्रोसेस करता है. शराब पीना बंद करने के बाद भी कुछ समय तक ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन (BAC) बढ़ता रह सकता है. ठंडे पानी से नहाना, ब्लैक कॉफी पीना या कुछ देर सो लेने से शराब शरीर से तुरंत बाहर नहीं निकलती, बल्कि इसे साफ करने का पूरा काम लिवर को ही करना पड़ता है.

सेहत के लिए शराब ज्यादा खतरनाक या गांजा?

चिकित्सा शोध और वैज्ञानिकों के अनुसार, शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाने और ओवरडोज से होने वाली मौतों के मामले में शराब को गांजे से अधिक खतरनाक माना जाता है. शराब के लगातार सेवन से लिवर सिरोसिस, दिल की गंभीर बीमारियां और कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियां बनती हैं. अत्यधिक शराब पीने से रेस्पिरेटरी फेलियर हो सकता है, जिससे तुरंत मौत हो सकती है. इसके अलावा, शराब के नशे में लोग अपने गुस्से पर नियंत्रण खो देते हैं, जिससे घरेलू हिंसा, मारपीट और सड़क हादसे बहुत ज्यादा होते हैं.

गांजे से मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग को होने वाले खतरे

भले ही गांजा शारीरिक अंगों को शराब जितनी तेजी से नष्ट न करे, लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है. गांजे में मौजूद टीएचसी के अत्यधिक सेवन से पैनिक अटैक, घबराहट, अत्यधिक चिंता और साइकोसिस (मानसिक असंतुलन) का खतरा बढ़ जाता है. किशोरावस्था में इसका इस्तेमाल करने से दिमाग के विकास, सोचने की क्षमता और याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है. इसके अलावा तंबाकू के साथ गांजा फूंकने से फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.


गांजे का भ्रम या शराब का हैंगओवर, सबसे ज्यादा जानलेवा क्या?

शराब या गांजा किसका नशा जल्दी उतरता है?

वैज्ञानिक तौर पर यह कहना कठिन है कि किसका नशा जल्दी उतरता है, क्योंकि यह मात्रा पर निर्भर है. हालांकि, हेल्थ कनाडा के अनुसार, गांजे का असर खत्म महसूस होने के बाद भी ध्यान केंद्रित करने और सही निर्णय लेने की क्षमता 24 घंटे से ज्यादा समय तक प्रभावित रह सकती है. कानूनी नजरिए से देखें तो भारत में एनडीपीएस (NDPS) कानून के तहत गांजे का व्यापार और सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है. दूसरी ओर, शराब को एक तय उम्र के बाद कानूनी मान्यता हासिल है, लेकिन सामाजिक नुकसान और मौतों के आंकड़ों में शराब गांजे से कहीं ज्यादा विनाशकारी पाई गई है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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