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पैदा होने के कितनी देर बाद पहली सांस लेता है बच्चा, मां के पेट में उसे कैसे मिलती है ऑक्सीजन?

How Babies Breathe: बच्चे के पैदा होने से पहले मां-बाप के मन में बहुत सवाल होते हैं. एक सवाल यह भी होता है कि बच्चा मां के पेट के अंदर सांस किस तरह से लेता है और बाहर आने बाद कितनी देर में सांस लेगा.

मां बनना किसी भी महिला के लिए खूबसूरत एहसास होता है. हर मां चाहती है कि उसका बच्चा स्वस्थ और सुंदर हो. मां बनने वक्त किसी भी महिला के मन में कई सारे सवाल उठने लाजमी होते हैं. यह बात तो सभी जानते हैं कि जिंदगी जीने के लिए सांस लेना कितना जरूरी होता है. ऐसे में यह सवाल मन में जरूर औ सकता है कि आखिर मां के पेट के अंदर कोई शिशु कैसे सांस लेता है. लेकिन क्या आप यह बात जानते हैं कि जब बच्चा मां के पेट के अंदर होता है, तो वह तब तक सांस लेना शुरू नहीं करता है. जब वह जन्म लेता है और बाहर आता है, तब वह पहली बार सांस लेता है. चलिए जानें कि यह सब कैसे होता है. 

जन्म के बाद पहली बार कैसे सांस लेता है बच्चा

जन्म के बाद आमतौर पर बच्चे हार्मोनल परिवर्तन और डिलीवरी के दौरान होने वाले शारीरिक दबाव की वजह से कुछ सेकेंड में ही अपनी पहली सांस ले लेते हैं. इससे उनके फेफड़ों में तरल पदार्थ कम हो जाता है. बच्चे वातावरण में बदलाव, तापमान में परिवर्तन हवा के संपर्क में आने से पहली सांस लेने की प्रक्रिया शुरू करते हैं. बच्चे की पहली सांस फेफड़े को फुलाती है, इससे उनके फेफड़े में तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है और खून फेफड़ों से होते हुए ऑक्सीजन लेने लगता है.

पहली बार कब सांस लेता है बच्चा

एक स्वस्थ जन्मा बच्चा आमतौर पर जन्म के 10 सेकेंड के अंदर अपनी पहली सांस लेता है. शुरुआती सांस को अक्सर हांफना कहते हैं, क्योंकि बच्चे का केंद्रीय तंत्रिका तंत्र टैम्प्रेचर और बातावरण में बदलाव के प्रति प्रतिक्रिया देता है. पहले जो बच्चे के फेफड़े तरल पदार्थ से जुड़े होते हैं, वो फूलने लगते हैं और ऑक्सीजन व कार्बन डाई ऑक्साइड का काम शुरू कर देते हैं.

मां के पेट में कैसे मिलती है ऑक्सीजन

जब बच्चा मां के पेट में होता है तो वह सीधे अपनी नाक के जरिए ऑक्सीजन नहीं लेता है, बल्कि गर्भनाल बच्चे को ऑक्सीजन देती है. बच्चे के फेफड़े का विकास गर्भावस्था के शुरुआती दौर से ही शुरू हो जाता है, हालांकि थर्ड ट्राइमेस्टर तक यह पूरा नहीं होता है. गर्भवास्था के 24-36 हफ्तों के बीच में बच्चों के फेफड़ों में एल्वियोली बननी शुरू हो जाती है.

फेफड़ों में छोटी-छोटी थैलियां होती हैं, जिनमें ऑक्सीजन भरी होती है, ये बहुत जरूरी थैलियां होती हैं. अगर इन थैलियों का विकास ठीक से नहीं हुआ तो शिशु को गर्भ से बाहर आने के बाद सांस लेने में बहुत दिक्कत होती है. इसीलिए मां के पेट में बच्चा गर्भनाल के जरिए सांस लेता है. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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