देश में कहां-कहां चल रहा जेन-जी और जेन-अल्फा का प्रदर्शन? देखें पूरा मैप
Gen Z Gen Alpha Protest: देश भर में दिल्ली और रांची के नीट-परीक्षा धांधली प्रदर्शनों के बाद स्कूली बच्चे (जेन-अल्फा) भी जर्जर इमारतों, शिक्षकों की कमी और खराब सुविधाओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं.

- खराब भोजन, स्कूल स्थानांतरण पर छात्रों का विरोध।
Gen Z Gen Alpha Protest: देश भर में युवाओं और बच्चों का आक्रोश सड़कों पर खुलकर सामने आ रहा है. एक तरफ जहां दिल्ली और झारखंड में नीट पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की धांधली के खिलाफ जेन-जी का उग्र प्रदर्शन देखा गया, वहीं अब उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के अलग-अलग राज्यों में जेन-अल्फा बच्चे भी अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए प्रशासनिक चौखट पर प्रदर्शन कर रहे हैं. शिक्षा व्यवस्था में सुधार से लेकर स्कूलों के जर्जर भवनों, शिक्षकों की कमी और खराब भोजन तक की मांगों को लेकर उठी यह आवाज देश के नक्शे पर एक नए जन-आंदोलन का रूप लेती दिख रही है.
दिल्ली में नीट पेपर लीक के खिलाफ जेन-जी का हल्लाबोल
राजधानी नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJI) और युवाओं की पीढ़ी जेन-जी ने मिलकर सरकार और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोला. राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक मामले ने लाखों छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया था. इसी धांधली के विरोध में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए और जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग तक जोरदार प्रदर्शन किया था. इस आंदोलन ने युवाओं की आवाज को सीधे संसद के पटल तक पहुंचाया.
झारखंड में जेन-जी का गुस्सा
दिल्ली की तर्ज पर ही झारखंड की राजधानी रांची में भी प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन पर सवाल उठाते हुए युवाओं ने प्रदर्शन किया. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक और धांधली के खिलाफ जेन-जी सड़कों पर उतर आए. छात्रों ने रांची के मैदानों और प्रशासनिक भवनों के सामने डेरा डालकर निष्पक्ष जांच और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग की. लंबे समय से रुकी भर्तियों और भ्रष्टाचार से नाराज छात्रों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी नहीं होगी, उनका संघर्ष जारी रहेगा, हालांकि बीते दिन उनकी मांगे सुन ली गई है.
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हमीरपुर में जर्जर सड़क के खिलाफ तिरंगा लेकर प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक बेहद भावुक करने वाली तस्वीर सामने आई. जहां कक्षा 1 से 12 तक में पढ़ने वाले बच्चे हाथों में तिरंगा झंडा और आंखों में आंसू लिए अपने परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंचे. बच्चों का कहना था कि वे भी पढ़-लिखकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं, लेकिन उनके गांव से स्कूल तक जाने वाली सड़क इतनी बदहाल है कि बारिश के मौसम में उनका स्कूल जाना ही बंद हो जाता है. प्रशासनिक अधिकारियों ने बच्चों की दर्दभरी पुकार सुनी और तुरंत सड़क निर्माण का काम शुरू कराने का पक्का भरोसा दिया.
अलवर में स्कूल की छत गिरी, दो दिन से धरना जारी
राजस्थान के अलवर जिले के जोधावास (थानागाजी) क्षेत्र में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की छत की पट्टी गिर जाने से बड़ा हादसा होते-होते बचा. इस इमारत को पिछले साल ही जर्जर घोषित कर दिया गया था, फिर भी बच्चे वहां पढ़ने को मजबूर थे. घटना के बाद गुस्साए जेन-अल्फा बच्चे दो दिनों से स्कूल परिसर में प्रदर्शन पर बैठे. कॉकरोच जनता पार्टी की टीम भी आशुतोष के नेतृत्व में मौके पर पहुंची, जिसके बाद मामला और गरमा गया. फिलहाल पढ़ाई पूरी तरह ठप है और एसडीएम व जिला शिक्षा अधिकारी स्थिति को संभालने में जुटे हैं.
लखनऊ में शिक्षकों की कमी पर सड़क जाम
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारे क्षेत्र स्थित जय नारायण स्कूल के छात्र-छात्राओं ने चौराहे पर आकर सड़क जाम कर दिया. परीक्षा नजदीक होने के बावजूद स्कूल में मुख्य विषयों के स्थाई शिक्षक ही मौजूद नहीं थे, जिससे उनका सिलेबस काफी पीछे छूट गया था. प्रदर्शन के दौरान वहां से गुजर रहे समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने स्थिति का संज्ञान लिया. उन्होंने मौके से ही शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से बात की और जल्द से जल्द शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति का आश्वासन दिया, जिसके बाद बच्चों ने अपना आंदोलन खत्म किया.

कन्नौज में भोजन बहिष्कार और उज्जैन में स्कूल शिफ्टिंग का विरोध
कन्नौज के जवाहर नवोदय विद्यालय (अनौगी) में 10वीं से 12वीं तक के छात्रों ने मेस में मिलने वाले घटिया भोजन के विरोध में खाना लेने से मना कर दिया और खुद को हॉस्टल में बंद कर लिया. इस बात की जानकारी मिलते ही डीएम ने जांच के निर्देश दिए. वहीं मध्य प्रदेश के उज्जैन में सराफा स्कूल को शहर से 15 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी शिफ्ट किए जाने के फैसले पर छात्र-छात्राएं रोते हुए सड़कों पर उतर आए. सुरक्षा और दूरी के खतरे को देखते हुए प्रदर्शन कर रही दो छात्राएं गश्त खाकर बेहोश भी हो गईं, लेकिन बच्चों ने साफ कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर दूर के स्कूल में नहीं जाएंगे.
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