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Pearl Formation: समुद्र के अंदर कैसे बनते हैं मोती, जानें क्या होती है प्रक्रिया?

Pearl Formation: मोती एक प्राकृतिक रत्न है. यह काफी ज्यादा दुर्लभ भी होता है. आइए जानते हैं कि एक मोती कैसे बनता है और क्या होता है पूरा प्रोसेस.

Pearl Formation: मोती पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे आकर्षक प्राकृतिक रत्नों में से एक हैं. ऐसा इसलिए नहीं क्योंकि उन्हें चट्टानों से निकाला जाता है बल्कि इस वजह से कि वह पानी के अंदर जीवित जीवों द्वारा बनाए जाते हैं. हीरे या फिर सोने के उलट मोती सीप और मसल्स जैसे मोलस्क के अंदर एक प्राकृतिक रक्षा तंत्र के जरिए से बनते हैं. आइए जानते हैं की समुद्र के अंदर कैसे बनते हैं मोती.

एक बाहरी कण की वजह से होता है निर्माण 

मोती बनाने की प्रक्रिया तब शुरू हो जाती है जब कोई बाहरी कण जैसे की रेत का दाना, एक छोटा पत्थर या मलबा गलती से एक मोलस्क के मुलायम टिशु में घुस जाता है. यह काफी ज्यादा बेचैनी और जलन पैदा करता है क्योंकि मोलस्क के पास इसे अपने शरीर से निकालने का कोई आसान तरीका नहीं होता. 

प्रकृति का रक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है 

इसे शरीर से बाहर निकालने के लिए मोलस्क एक प्राकृतिक सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया को सक्रिय कर देता है. चोट से बचने और जलन को कम करने के लिए यह उसे बाहर निकालने के बजाय उसे अलग करना शुरू कर देता है. मोलस्क नेकर नामक एक चिकना और चमकदार पदार्थ निकलना शुरू कर देता है जिसे मदर ऑफ पर्ल के नाम से जाना जाता है. नेकर मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट और कोंचिओलिन से बना होता है. यह बाहरी कण को ढक लेता है.

समय के साथ बनता है मोती

नेकर समय के साथ परत दर परत जमा होता रहता है जिसमें हजारों सूक्ष्म परतें धीरे-धीरे जलन पैदा करने वाले पदार्थ के चारों तरफ बनती हैं. हर परत मोती के आकार, चिकनाई और चमक को बढ़ाती है. इस प्रक्रिया में महीना या फिर कई साल भी लगा सकते हैं. 

जैसे-जैसे परत जमा होती रहती है बाहरी कण एक पूरी तरह से बने हुए मोती में बदल जाता है. मोती का आकार, माप और चमक इस बात पर निर्भर करती है की नेकर के परतें कितनी समान रूप से जमा हुई हैं.

मोती इतनी दुर्लभ क्यों है?

प्राकृतिक मोती का बनना एक काफी दुर्लभ घटना है क्योंकि यह पूरी तरह से संयोग पर निर्भर होता है. इसी दुर्लभता की वजह से प्राकृतिक मोती काफी ज्यादा मूल्यवान होते हैं. आजकल बाजार में मिलने वाले ज्यादातर मोती कल्चर्ड मोती होते हैं. दरअसल इंसान सीप में एक छोटा सा न्यूक्लियस डालकर जानबूझकर कंट्रोल्ड कंडीशन में इस नेचुरल प्रोसेस को शुरू करके बनाते हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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