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अस्पताल में होते हैं ये अलग-अलग कोड, रंग के हिसाब से होती है अनाउंसमेंट 

अस्पतालों में कई घटनाओं के लिए अगल-अलग तरह के कोड होते हैं, जिसकी जानकारी सभी अस्पताल के कर्मचारियों व डॉक्टरों को होती है. ये कोड अलग-अलग रंगों के हिसाब से होते हैं जो कई घटनाओं पर जारी किए जाते हैं.

Hospital Emergency Codes: आप अस्पताल में हों और वहां किसी प्रकार की घटना घट जाए तो इसका पता अस्पताल के कर्मचारियों को कैसे लगेगा? आपके दिमाग में आएगा कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम लगा होगा तो आग लगने पर सायरन बजने लगेंगे, जिससे लोगो को इस बात का पता चल जाएगा. यह बात ठीक है. हालांकि, इससे अस्पताल में पैनिक सिचुएशन क्रिएट हो सकती है, जिसका असर वहां भर्ती मरीजों पर पड़ सकता है.

ऐसे में बिना मरीजों को परेशान किए अस्पताल ऐसी स्थितियों से कैसे निपटता है? दरअसल, अस्पतालों में ऐसी कई घटनाओं के लिए अगल-अलग तरह के कोड होते हैं, जिसकी जानकारी सभी अस्पताल के कर्मचारियों व डॉक्टरों को होती है. ये कोड अलग-अलग रंगों के हिसाब से होते हैं, जो कई घटनाओं पर जारी किए जाते हैं. हम आपको आज इन्हीं कोड्स के बारे में बताएंगे, जिसका इस्तेमाल अस्पतालों द्वारा किया जाता है. 

अस्पतालों में होते हैं 10 तरह के कोड

अस्पतालों में तरह-तरह की घटनाओं के लिए 10 तरह के कोड होते हैं. ये सभी अस्पताल के आपाकालीन कोड होते हैं, जिन्हें समय-समय पर जारी किया जाता है. जैसे अगर आग लगी है तो कोड रेड जारी किया जाता है, बच्चा चोरी होने पर कोड पिंक. इसके अलावा भी कोड होते हैं. इसमें कोड रेड, कोड ब्लू के अलावा कोड ब्लू, कोड ग्रीन, कोड गोल्ड, कोड आरेंज, कोड ग्रे, कोड पर्पल, कोड येलो, कोड सिल्वर का प्रयोग होता है. आइए जानते हैं किस घटना पर कौन से रंग का कोड जारी होता है... 

  • कोड रेड: आग
  • कोड पिंक: बच्चे का अपहरण
  • कोड ब्लू: कार्डियक एंड रेस्पिरेटरी अरेस्ट
  • कोड ग्रीन: अराजक व्यक्ति
  • कोड गोल्ड: बम की सूचना
  • कोड ऑरेंज: किसी गैस या अन्य साम्रगी का रिसाव
  • कोड ग्रे: भागना
  • कोड पर्पल: सिक्योरिटी रिस्पॉन्स
  • कोड येलो: इमरजेंसी
  • कोड सिल्वर: एक्टिव शूटर 

क्यों होते हैं कोड 

सबसे बड़ा सवाल है कि अस्पतालों में इस तरह के कोड की जरूरत क्यों पड़ती है. दरअसल, कोई भी हॉस्पिटल सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाला क्षेत्र होता है. वहां मरीजों के साथ उनके तीमारदार भी मौजूद होते हैं. ऐसे में अस्पताल अपने कर्मचारियों और अन्य स्टाफ को कोड के जरिए सांकेतिक भाषा आपात स्थितियों की जानकारी देता है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को पैनिक होने से रोका जा सके और किसी भी ऐसी सिचुएशन में हॉस्पिटल स्टाफ चुपचाप त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति को नियंत्रित कर सके. 

यह भी पढ़ें: क्या होता है आग के अलग-अलग रंगों का मतलब, जान लीजिए जवाब

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