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Healthcare Development in India: आजादी के 78 साल... भारतीयों की सेहत कितनी बदली?

Healthcare Development in India: आजादी के 78 साल बाद भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े बदलाव आए हैं. जीवन प्रत्याशा बढ़ी, मृत्यु दर घटी और टीकाकरण का दायरा बढ़ा.

Healthcare Development in India: भारत को आजाद हुए 78 साल हो चुके हैं. उस समय से लेकर आज के समय तक भारत में हर चीज बदल गया है. नई तकनीकी आ गई हैं, हर कोई शिक्षित हो रहा है, हर नए साल में देश हर क्षेत्र में तरक्की करते ही जा रहा है. यही वजह है कि आज के समय में कई लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि 1947 के बाद यानी 78 साल बाद देश की सोच और पहनावे के अलावा और क्या-क्या बदलाव देखने को मिला है. हम बात कर रहे हैं देश में लाइफस्टाइल में हुए बदलाव की, यानी अस्पतालों की, दवाइयों की, इंफ्रास्ट्रक्चर की, अच्छी जिंदगी की, और भी बहुत कुछ. 1947 में जहां देश में अस्पताल, दवाइयां और डॉक्टर बहुत कम थे, वहीं आज भारत के पास एक बड़ा हेल्थ सिस्टम है. लेकिन इस तरक्की के साथ-साथ कुछ नई बीमारियां भी बढ़ी हैं. आइए जानते हैं कि आजादी के बाद भारतीयों की सेहत में क्या-क्या बदलाव आए हैं.

औसत आयु और मातृ-शिशु मृत्यु दर में सुधार

1947 में भारत में लोगों की औसत उम्र यानी जीवन प्रत्याशा बहुत कम थी. 1947 में यह सिर्फ 32 साल थी, जो अब बढ़कर करीब 66.8 साल हो गई है. इसका मतलब है कि आज भारतीय लोग पहले के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा साल जी रहे हैं. इसी तरह बच्चों की मृत्यु दर में भी बड़ा सुधार हुआ है. आजादी के समय शिशु मृत्यु दर 181 प्रति हजार थी, जो अब घटकर करीब 26 से 27 प्रति हजार रह गई है. माना जा रहा है कि यह सुधार अच्छे अस्पतालों, टीकाकरण और बेहतर इलाज की वजह से हुआ है. साथ ही मां बनने वाली महिलाओं की सेहत पर भी सरकार ने खास ध्यान दिया है, जिससे मातृ मृत्यु दर में भी लगातार कमी आई है और महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने की सुविधा आसानी से मिलने लगी है. बता दें पहले के समय में जहां लोगों की जान भूख और गरीबी के कारण जाती थी, वहीं आज के समय में बढ़ती बीमारियां इसका कारण बन रही हैं. हालांकि इन सभी बीमारियों के ऊपर अस्पताल का पूरा ध्यान रहता है और वे उस पर काम करती हैं.

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वैक्सीनेशन और आज की नई सेहत चुनौतियां

आजादी के बाद देश में वैक्सीनेशन यानी टीकाकरण का दायरा भी बहुत बढ़ा है. पहले पोलियो, चेचक और खसरा जैसी बीमारियां लाखों बच्चों की जान लेती थीं, लेकिन आज के समय में सरकार ने ऐसी कई सारी योजनाएं भी बनाई हैं, जिससे बच्चों को मुफ्त में टीके लगाए जाते हैं, जिसके परिणाम में बच्चों को इन बीमारी से बचाने के लिए काफी हद तक सफलता मिलती आ रही है. लेकिन इसके साथ ही आज देश के सामने आजादी के मुकाबले एक नई चुनौती भी खड़ी है, वह है मोटापा और डायबिटीज. पहले के लोग ज्यादा शारीरिक मेहनत करते थे और सादा खाना खाते थे, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, जंक फूड और कम शारीरिक गतिविधि की वजह से शहरों में मोटापा और डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. यह एक ऐसी समस्या है जो आजादी के समय बहुत कम देखने को मिलती थी. और आज के समय में हर तीसरे आदमी में ये समस्या देखने को मिलती है.

सरकारी हेल्थ मिशन और आगे की राह

अब सवाल आता है कि क्या वजह है कि देश में इतने सालों बाद इतने सारे बदलाव देखने को मिला है, ऐसे में आपको बता दें कि इन सब बदलावों के पीछे सरकार की कई बड़ी हेल्थ स्कीमों का बड़ा हाथ रहा है. जैसे आयुष्मान भारत योजना के जरिए गरीब लोगों को मुफ्त इलाज मिल रहा है, जबकि नेशनल हेल्थ मिशन गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहा है. पहले जहां देश में गिने-चुने सरकारी अस्पताल हुआ करते थे, वहीं आज देश में हजारों अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र बन चुके हैं. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पिछले 78 सालों में भारतीयों की सेहत में जबरदस्त सुधार हुआ है, लेकिन मोटापा और डायबिटीज जैसी नई बीमारियां आने वाले समय के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जिन पर सरकार और आम लोगों दोनों को मिलकर काम करने की जरूरत है.

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