एक्सप्लोरर

शहीदों को अंतिम संस्कार के दौरान क्यों दिया जाता है गन सैल्यूट? ऐसे शुरू हुई ये परंपरा

देश के शहीद जवानों समेत अन्य विशिष्ट लोगों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कब किन जवानों के सम्मान में गन सैल्यूट और तोपों की सलामी दी जाती है.

देश की सुरक्षा में सेना, पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस के जवान तैनात रहते हैं. कई बार ये जवान कई बड़े आतंकी हमलों और विदेशी हमलों से भी देश की सुरक्षा करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की सुरक्षा या किसी अन्य ऑपरेशन के दौरान शहीद होने वाले जवानों को गन सैल्यूट क्यों दिया जाता है. आज हम आपको बताएंगे कि गन सैल्यूट की परंपरा कब और कैसे शुरू हुई थी और किन शहीद जवानों को ये सम्मान दिया जाता है. 

राजकीय सम्मान

 बता दें कि राजकीय सम्मान में शव को तिरंगे से लपेटा जाता है. जिस व्यक्ति को राजकीय सम्मान देने का फैसला किया जाता है, उनके अंतिम सफर का पूरा इंतजाम राज्य या केंद्र सरकार की तरफ से किया जाता है. इसके अलावा अंतिम संस्कार के समय बंदूकों से सलामी दी जाती है. अंतिम संस्कार के दौरान राजकीय सम्मान पहले केवल वर्तमान और पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्रियों को दिया जाता था. लेकिन कुछ साल पहले इसके लिए कानून बदल गए हैं. अब राज्य सरकार ये तय कर सकती है कि किसे राजकीय सम्मान दिया जाना चाहिए. अब राजनीति, साहित्य, कानून, विज्ञान और कला के क्षेत्र में योगदान करने वाले शख्सियतों के निधन पर भी राजकीय सम्मान दिया जाता है. इतना ही नहीं राजकीय सम्मान से होने वाले अंतिम संस्कार के सारे इंतजाम राज्य सरकार की तरफ से किया जाता है.

इसके अलावा जिस भी दिवंगत को राजकीय सम्मान दिया जाता है, उसके अंतिम संस्कार के दौरान उस दिन को राष्ट्रीय शोक के तौर पर घोषित कर दिया जाता है. भारत के ध्वज संहिता के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया जाता है. दिवंगत के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज के ढक दिया जाता है और बंदूकों की सलामी भी दी जाती है.

तोपों से सलामी

गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस समेत कई अन्य मौकों पर तोपों की सलामी दी जाती है. इतना ही नहीं विशेष मौकों पर भी तोपों की सलामी देकर सम्मान दिया जाता है. वहीं भारतीय सेना के सैन्य सम्मान में उन सैनिकों को दी जाती है, जिन्होंने शांति अथवा युद्ध काल में अपना विशेष योगदान दिया है. राजकीय सम्मान  में भी तोपों की सलामी दी जाती है.

कितने तोपों की सलामी?

भारत के राष्ट्रपति, सैन्य और वरिष्ठ नेताओं के अंतिम संस्कार के दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाती है. हाई रैंकिंग सेना अधिकारी (नेवल ऑपरेशंस के चीफ और आर्मी और एयरफोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ) को 17 तोपों की सलामी दी जाती है.

अंतिम संस्कार प्रोटोकॉल 

बता दें कि अंतिम संस्कार के दौरान प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है. आमतौर पर राजकीय सम्मान अंतिम संस्कार ( state funeral protocol) वर्तमान और पूर्व राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और राज्य के मुख्यमंत्रियों को दिए जाते हैं. एक राजकीय अंतिम संस्कार की कुछ मुख्य विशेषताओं में, बंदूक की सलामी (gun salute) और आधे मस्तूल पर झंडों के अलावा, राज्य या राष्ट्रीय शोक दिवस की घोषणा, एक सार्वजनिक अवकाश और शव के ताबूत को राष्ट्रीय ध्वज के साथ लपेटा जाना शामिल है.

तोपों की सलामी का इतिहास

भारत को 21 तोपों की सलामी की परंपरा ब्रिटिश साम्राज्य से विरासत में मिली है. आजादी से पहले सर्वोच्च सलामी 101 तोपों की सलामी थी, जिसे शाही सलामी के रूप में भी जाना जाता था. जो केवल भारत के सम्राट (ब्रिटिश क्राउन) को दी जाती थी. इसके बाद 31 तोपों की सलामी या शाही सलामी दी गई. यह महारानी और शाही परिवार के सदस्यों को पेश किया गया था. यह भारत के वायसराय और गवर्नर-जनरल को भी पेश किया गया था. 21 तोपों की सलामी राज्य के प्रमुख और विदेशी संप्रभु और उनके परिवारों के सदस्यों को पेश किया गया था. राष्ट्रपति के रूप में गणराज्य भारत के राज्य प्रमुख को कई अवसरों पर 21 तोपों की सलामी से सम्मानित किया जाता है. 

ये भी पढ़ें: Paris Olympics: ओलंपिक में मंगोलिया के खिलाड़ियों की ड्रेस की खूब हो रही चर्चा, जानें क्या है इसका इतिहास

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Sonam Wangchuk Hunger Strike: अनशन से कब-कब हिली सरकार, जानें गांधी से लेकर वांगचुक तक का इतिहास
अनशन से कब-कब हिली सरकार, जानें गांधी से लेकर वांगचुक तक का इतिहास
Strait of Hormuz Closure: होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाए तो क्या होगा, फिर किन रास्तों से दुनिया को मिलेगी राहत?
होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाए तो क्या होगा, फिर किन रास्तों से दुनिया को मिलेगी राहत?
Teesta River Project: बांग्लादेश ने चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट, जानें यह भारत के लिए कितना खतरनाक?
बांग्लादेश ने चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट, जानें यह भारत के लिए कितना खतरनाक?
दिल्ली का जंतर-मंतर कैसे बना लोकतंत्र की आवाज, सबसे पहले यहां कौन सा आंदोलन हुआ था?
दिल्ली का जंतर-मंतर कैसे बना लोकतंत्र की आवाज, सबसे पहले यहां कौन सा आंदोलन हुआ था?

वीडियोज

गुटखाबाज बीवी की डिमांड डायरी!
Shehnaaz Gill बोलीं- अभी सक्सेस नहीं मिली, मेरा सपना है लोग टिकट खरीदकर मेरी फिल्में देखने आएं
Bollywood News: '3 Idiots' की कहानी पर आमिर का नया खुलासा, सोनम वांगचुक कनेक्शन पर छिड़ी नई बहस (17-07-2026)
Udne ki Asha: Sailee-Sachin की बदली किस्मत; Ganpatipule में मिला पैसा, पर खो गया सुकून!
Tata Altroz diesel long term review and mileage: E20 ka best solution? #autolive

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
सफेद चादर और सिविल ड्रेस में पुलिस वाले... सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग कैसे ले जाया गया?
सफेद चादर और सिविल ड्रेस में पुलिस वाले... सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग कैसे ले जाया गया?
'आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर...', सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर बोले अखिलेश यादव
'आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर...', सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर बोले अखिलेश यादव
रूसी तेल खरीद पर अमेरिका लगाएगा 100 फीसदी टैरिफ? भारतीय विदेश मंत्रालय ने सवाल पर क्या कहा
रूसी तेल खरीद पर अमेरिका लगाएगा 100 फीसदी टैरिफ? भारतीय विदेश मंत्रालय ने सवाल पर क्या कहा
'बंटवारा 1947' से पहले बड़े पर्दे पर दहाड़ते नजर आएंगे सनी देओल, री रिलीज हो रही एक्टर की तीन ब्लॉकबस्टर फिल्में, नोट कर लें तारीख!
'बंटवारा 1947' से पहले सनी देओल की री रिलीज हो रही तीन ब्लॉकबस्टर फिल्में, नोट कर लें तारीख!
IND vs ENG 3rd ODI में रोहित शर्मा रच सकते हैं इतिहास, Lord's में बना सकते हैं ये 2 रिकॉर्ड
IND vs ENG 3rd ODI में रोहित शर्मा रच सकते हैं इतिहास, Lord's में बना सकते हैं ये 2 रिकॉर्ड
जम्मू-कश्मीर के कठुआ रेलवे स्टेशन का बदला नाम, केंद्र सरकार ने कर दिया ऐलान
जम्मू-कश्मीर के कठुआ रेलवे स्टेशन का बदला नाम, केंद्र सरकार ने कर दिया ऐलान
'दिल्ली पुलिस ने मुझे...', सोनम वांगचुक को धरने से हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा दावा
'दिल्ली पुलिस ने मुझे...', सोनम वांगचुक को धरने से हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा दावा
'लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार', सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया तो भड़के नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद
'लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार', सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया तो भड़के नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद
Embed widget