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Z vs Z+ Security: राघव चड्ढा को मिली Z और नीतीश कुमार की Z+ सिक्योरिटी में क्या अंतर? जानें एक-एक डिटेल

Z vs Z+ Security: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार को Z+ सिक्योरिटी दी गई है. आइए जानते हैं कि राघव चड्ढा और नीतीश कुमार की सिक्योरिटी में क्या फर्क है.

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  • नीतीश कुमार को Z+ और राघव चड्ढा को Z श्रेणी सुरक्षा मिली।
  • Z+ सुरक्षा में 55 कर्मी, Z श्रेणी में 22 कर्मी शामिल।
  • Z+ में NSG कमांडो, Z श्रेणी में अर्धसैनिक बल होते हैं।
  • Z+ का काफिला बड़ा, Z श्रेणी का काफिला छोटा होता है।

Z vs Z+ Security: हाल ही में दो बड़े नेताओं नीतीश कुमार और राघव चड्ढा को अलग-अलग स्तर की वीआईपी सुरक्षा दी गई है. जहां नीतीश कुमार को अब Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई है, वहीं राघव चड्ढा को Z  श्रेणी की सुरक्षा मिली है. आइए जानते हैं कि यह दोनों सुरक्षा एक दूसरे से कैसे अलग है.

Z और Z+ सुरक्षा में अंतर 

भारत में VIP सुरक्षा का फैसला गृह मंत्रालय द्वारा खुफिया एजेंसियों द्वारा तैयार की गई खतरे की आशंका वाली रिपोर्टों के आधार पर किया जाता है. सबसे साफ अंतर तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या में होता है. Z+ सुरक्षा भारत में सुरक्षा के सबसे उच्चतम स्तरों में से एक है. इसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं. इनमें 10 से ज्यादा विशिष्ट कमांडो भी होते हैं. इसकी तुलना में Z श्रेणी की सुरक्षा में लगभग 22 सुरक्षाकर्मी होते हैं और कमांडो की संख्या कम होती है. 

तैनात कमांडो और बलों के प्रकार 

Z+ सुरक्षा में अक्सर नेशनल सिक्योरिटी गार्ड कमांडो शामिल होते हैं. इन्हें ब्लैक कैट्स के नाम से जाना जाता है. ये आतंकवाद रोधी अभियान और उच्च जोखिम वाली सुरक्षा में स्पेशलाइज्ड होते हैं. इसके उलट Z श्रेणी की सुरक्षा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, CISF या ITBP जैसे अर्धसैनिक बलों पर निर्भर करती है.

काफिला और यात्रा सुरक्षा प्रोटोकॉल 

नितेश कुमार जैसे Z+ सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों के लिए काफिला बड़ा और  काफी ज्यादा एडवांस्ड होता है. इसमें आमतौर पर 5 से 6 वाहन शामिल होते हैं. इनमें बुलेट प्रूफ कार, पायलट वाहन और जैमर युक्त इकाई शामिल होती हैं. राघव चड्ढा का Z सुरक्षा काफिला छोटा होता है. यह आमतौर पर एक एस्कॉर्ट वाहन और कुछ सहायक इकाइयों तक ही सीमित होता है.

इसी के साथ Z+ सुरक्षा में यात्रा से पहले विस्तृत जांच शामिल होती है. इन्हें उन्नत सुरक्षा संपर्क के रूप में जाना जाता है. वीआईपी के पहुंचने से पहले सुरक्षा दल रास्तों, स्थलों और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण करते हैं.  Z श्रेणी में ऐसी जांच सिर्फ उच्च जोखिम वाली या फिर संवेदनशील यात्रा के दौरान ही की जाती है. Z+ सुरक्षा सबसे खास एसपीजी सुरक्षा से ठीक नीचे आती है. इससे यह भारत की सबसे पूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक बन जाती है. Z श्रेणी की सुरक्षा भी काफी मजबूत होती है लेकिन सुरक्षा की गंभीरता और तैयारी के मामले में यह Z+ से एक पायदान नीचे आती है.

यह भी पढ़ें: भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ मलक्का क्यों जरूरी, जिसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद बनाया जा सकता है निशाना?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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