Bihar Bhawan Tender: दिल्ली के बिहार भवन में कैसे ले सकते हैं कैंटीन का ठेका, क्या है प्रोसीजर?
Bihar Bhawan Tender: एक आम आदमी को भी बिहार भवन की कैंटीन का टेंडर मिल सकता है. आइए जानते हैं क्या होती है इसकी प्रक्रिया.

- बिहार भवन कैंटीन ई-टेंडर के माध्यम से आवंटित की जाती है।
- अनुभव, लाइसेंस, और तकनीकी-वित्तीय बोली आवश्यक होती है।
- बिहार के पारंपरिक व्यंजनों के जानकार बोलीदाताओं को वरीयता।
- सभी आवश्यक सरकारी दस्तावेज पूर्ण होने चाहिए।
Bihar Bhawan Tender: बिहार भवन की कैंटीन बिहार सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर के कार्यालय द्वारा चलाए जाने वाले एक औपचारिक ई-टेंडर प्रकिया के जरिए से आवंटित की जाती है. अगर आप कैंटीन या फिर हॉस्पिटैलिटी का व्यवसाय चलते हैं और मानदंडों को पूरा करते हैं तो टेंडर की घोषणा होने पर आप आवेदन कर सकते हैं. आइए जानते हैं क्या होती है पूरी प्रक्रिया.
टेंडर की सूचना और इसे कहां खोजें
इस प्रक्रिया की शुरुआत बिहार भवन की वेबसाइट और राज्य के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर छापी गई एक आधिकारिक टेंडर सूचना से होती है. इन सूचनाओं में समय सीमा, पात्रता की शर्त और कार्य का दायरा साफ तौर से बताया जाता है. अगर कोई तय समय सीमा से चूक जाता है तो उसे अगले चक्र का इंतजार करना पड़ेगा. यही वजह है कि नियमित रूप से इसकी निगरानी करना काफी ज्यादा जरूरी है.
पात्रता की शर्तें
आवेदकों से यह उम्मीद की जाती है कि उनके पास कैंटीन या फिर होटल प्रबंधन के क्षेत्र में तीन से पांच साल का अनुभव हो. खास तौर से सरकारी संस्थान, कॉर्पोरेट परिसर या फिर प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों में. यह शर्त इस बात को पक्का करती है कि ऑपरेटर सरकारी गेस्ट हाउस में काम के जिस पैमाने, नियम के अनुपालन और सेवा के मानकों को संभालने की उम्मीद की जा रही है उसमें सक्षम हो.
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ई टेंडर जमा करना
आवेदन ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए दो बोली फॉर्मेट का इस्तेमाल करके जमा किए जाते हैं. एक होती है तकनीकी बोली और दूसरी होती है वित्तीय बोली. तकनीकी बोली में साख और प्रमाण पत्र शामिल होते हैं. जैसे अनुभव प्रमाण पत्र, ग्राहकों की सूची, लाइसेंस, मानव संसाधन योजना और पिछले कामों का प्रदर्शन. इसी के साथ वित्तीय बोली में कीमत शामिल होती है. जैसे भोजन की दरें, सेवा शुल्क और कमर्शियल शर्तें. सिर्फ वे बोलीदाता जो तकनीकी रूप से योग्य पाए जाते हैं उन्हीं की वित्तीय मूल्यांकन के लिए विचार किया जाता है.
जरूरी दस्तावेज जिनकी जरूरत होगी
पात्र होने के लिए व्यवसाय का सभी नियमों का अनुपालन करना जरूरी है. दस्तावेजों में एक वैध FSSAI लाइसेंस, जीएसटी पंजीकरण और पैन कार्ड, लेबर लाइसेंस, ईपीएफ और ईएसआईसी पंजीकरण और साथी पिछले 3 से 5 सालों की ऑडिट की हुई बैलेंस शीट और आयकर रिटर्न शामिल हैं. अगर दस्तावेज अधूरे होते हैं या फिर उसमें कुछ गलती होती है तो आपका आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा.
किसे होगा फायदा?
बिहार भवन अपनी प्रमाणिक क्षेत्रीय व्यंजनों के लिए जाना जाता है. इनमें लिट्टी चोखा और सरसों वाली मछली शामिल है. जो बोलीदाता बिहार व्यंजनों को बनाने में माहिर होते हैं और स्वच्छता के उच्च मानकों को प्रदर्शित करते हैं उन्हें अक्सर दूसरों की तुलना में बढ़त हासिल होती है.
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