क्या है फॉर्म 6,7,8 और 8A? EC विवाद के बीच जान लें इनके बीच का अंतर
चुनाव आयोग के फॉर्म 6, 7 और 8/8A वोटर लिस्ट से जुड़े मुख्य दस्तावेज हैं, हालिया विवाद के बीच आम जनता के लिए इन सभी फॉर्म के सही अंतर को समझना बेहद जरूरी है.

भारत में जब भी चुनाव नजदीक आते हैं या चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने का काम शुरू करता है, तो राजनीतिक दलों से लेकर आम जनता के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं. हाल ही में मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण और नए नियमों को लेकर चुनाव आयोग काफी खबरों में रहा है.
एक जागरुक नागरिक और वोटर होने के नाते हमारे लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि चुनाव आयोग के कामकाज में फॉर्म 6, 7, 8 और 8A का क्या मतलब है. वोटर लिस्ट को पूरी तरह सही, पारदर्शी और अपडेटेड बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग इन अलग-अलग नंबर वाले फॉर्म का इस्तेमाल करता है. आइए जानते हैं कि ये चारों फॉर्म क्या हैं और इनके बीच क्या बुनियादी अंतर है.
फॉर्म 6 से वोटर लिस्ट में जुड़ता है नया नाम
फॉर्म 6, जिसे आप नए वोटर्स के लिए एक तरह का एंट्री पास कह सकते हैं. यह फॉर्म उन युवाओं के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है जो पहली बार लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेने जा रहे हैं और अपना वोट डालने की तैयारी कर रहे हैं. भारत का कोई भी नागरिक जिसने अपनी उम्र के 18 वर्ष पूरे कर लिए हैं, वह मतदाता सूची में अपना नाम पहली बार शामिल करवाने के लिए इसी फॉर्म 6 का इस्तेमाल करता है. हाल के दिनों में चुनाव आयोग ने गैर-एसआईआर राज्यों में इस फॉर्म को भरने और जमा करने की प्रक्रिया को पहले से और ज्यादा सरल बनाया है, जिससे आम जनता को अपना नाम जुड़वाने में काफी राहत मिल रही है.
फॉर्म 7 से हटते हैं फर्जी और गलत नाम
फॉर्म 7, जिसे वोटर लिस्ट से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने का मुख्य जरिया माना जाता है. चुनाव आयोग का यह नियम है कि मतदाता सूची में केवल उन्हीं लोगों के नाम होने चाहिए जो उस क्षेत्र में वास्तव में वोट देने का कानूनी अधिकार रखते हैं.
यदि किसी मौजूदा वोटर लिस्ट की एंट्री पर किसी को कोई आपत्ति है या किसी का नाम सूची से पूरी तरह हटवाना है, तो फॉर्म 7 भरा जाता है. इसके अलावा अगर वोटर लिस्ट में किसी व्यक्ति का नाम गलती से दो बार दर्ज हो गया है, तो नकली या डुप्लिकेट नाम को हटाने के लिए भी फॉर्म 7 ही काम आता है.
फॉर्म 8 से सुधरती हैं वोटर आईडी की गलतियां
फॉर्म 8, जो वोटर आईडी कार्ड की गलतियों को सुधारने और उसमें जरूरी बदलाव करने का सबसे बड़ा माध्यम है. अक्सर देखा जाता है कि वोटर आईडी कार्ड बन जाने के बाद उसमें कुछ गलतियां रह जाती हैं, जैसे नाम का गलत छप जाना, उम्र का गलत होना या फिर फोटो का साफ न होना. इन सभी तरह की समस्याओं का समाधान चुनाव आयोग ने फॉर्म 8 के रूप में दिया है. इसके साथ ही अगर आपका पुराना वोटर आईडी कार्ड कहीं खो गया है या फट गया है और आप उसकी जगह एक नया रिप्लेसमेंट कार्ड चाहते हैं, तो भी आपको इसी फॉर्म 8 को भरकर जमा करना होता है.
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फॉर्म 8A से बदलता है एक ही क्षेत्र का पता
फॉर्म 8A, जिसे लेकर अक्सर लोग काफी उलझन में रहते हैं. इस फॉर्म का इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई मतदाता एक ही विधानसभा क्षेत्र के भीतर ही अपना घर बदलता है. यहां यह समझना बहुत जरूरी है कि अगर आप पूरा शहर या अपनी पुरानी विधानसभा सीट को छोड़कर किसी दूसरी विधानसभा में जा रहे हैं, तो आपको इसके लिए फॉर्म 6 भरना होगा. लेकिन अगर आप अपनी पुरानी विधानसभा के दायरे के अंदर ही किसी दूसरे मोहल्ले, गली या वार्ड में शिफ्ट हुए हैं, तो आपको पुराने पोलिंग स्टेशन से नए पोलिंग स्टेशन पर ट्रांसफर करवाने के लिए आपको फॉर्म 8A का सहारा लेना पड़ता है.
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