फ्लाइट हाईजैक होने पर क्या सिग्नल भेजते हैं पायलट, कैसे होता है एक्शन?
आसमान में मौत का साया मंडराने पर पायलट ATC को कौन सा गुप्त कोड भेजते हैं? जानिए उस सीक्रेट इमरजेंसी कोड का सच, जिसके एक्टिवेट होते ही हवा में तैनात हो जाते हैं लड़ाकू विमान

30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही Flydubai की फ्लाइट संख्या FZ1073 ने सऊदी अरब के आसमान के ऊपर अचानक एक ऐसा इमरजेंसी सिग्नल भेजा, जिससे तमाम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां और इजरायली फाइटर जेट्स तुरंत अलर्ट मोड पर आ गए. शुरुआती खबरों में विमान के हाईजैक होने की आशंका जताई गई और इसग बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा मंत्रियों के साथ आपातकालीन बैठक बुला ली.
हालांकि, कुछ ही देर बाद स्थिति साफ हुई और पता चला कि यह कोई आतंकी हमला या हाईजैकिंग नहीं थी, बल्कि कॉकपिट के अंदर पायलटों के बीच हुई किसी बात पर आपसी कहासुनी और हाथापाई थी, जिसके दौरान गलती से या गुस्से में यह इमरजेंसी कोड एक्टिव हो गया था. इस घटना के बाद विमान को तुरंत सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड कराया गया. इस घटना के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति में पायलट ATC को क्या सिग्नल भेजते हैं और सुरक्षा एजेंसियां कैसे एक्शन लेती हैं.
क्या है हाईजैक अलर्ट कोड?
दुनिया भर के विमानों में लगे ट्रांसपोंडर नाम के उपकरण से एयर ट्राफिक कंट्रोल को लगातार विमान की पहचान और लोकेशन से जुड़ी जानकारी मिलती रहती है. इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन ICAO के तय नियमों के मुताबिक, अगर कॉकपिट में किसी तरह की आपात स्थिति या हाईजैक जैसा खतरा महसूस हो, तो पायलट एक खास चार अंकों का कोड 7500, अपने ट्रांसपोंडर में सेट कर देता है. यह कोड दुनिया भर में एक जैसा माना जाता है, और जैसे ही यह ATC के रडार स्क्रीन पर दिखता है, वहां मौजूद कंट्रोलर तुरंत समझ जाते हैं कि विमान में कुछ गंभीर गड़बड़ है.
बिना बोले भी दिया जा सकता है सिग्नल
हाईजैक जैसी स्थिति में पायलट के लिए खुलकर रेडियो पर बात करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए 7500 कोड को खासतौर पर इसी वजह से डिजाइन किया गया है, ताकि पायलट बिना कुछ बोले और हाईजैकर को शक हुए बिना जमीन पर मौजूद अधिकारियों को खतरे की जानकारी दे सकें. इसके अलावा पायलट कई बार कॉकपिट क्रू और केबिन क्रू के बीच पहले से तय किए गए कोडवर्ड और इशारों का इस्तेंमाल भी करते हैं.
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अलर्ट मिलते ही जमीन पर क्या होता है?
जैसे ही AIC को 7500 कोड का सिग्नल मिलता है, वे तुरंत इसकी सूचना संबंधित देश की सुरक्षा और सैन्य एजेंसियों को देते हैं. इसके बाद जरूरत पड़ने पर वायुसेना अपने लड़ाकू विमान भेजकर संदिग्ध विमान की निगरानी और एस्कॉर्ट करना शुरू कर देती है, जैसा इस ताजा घटना में इजरायली वायुसेना ने किया. इसके साथ ही आसपास उड़ रहे दूसरे विमानों को भी सुरक्षित दूरी पर रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर उनका रास्ता बदला जाता है.
विमान को डायवर्ट करने का लिया जाता है फैसला
हाईजैक अलर्ट की स्थिति में पायलट और एयरलाइन के फैसले के आधार पर विमान को अक्सर सबसे नजदीकी सुरक्षित हवाई अड्डे की तरफ मोड दिया जाता है, जैसा इस मामले में हुआ, जब विमान जॉर्डन की हवाई सीमा में दाखिल होने के बाद वापस मुड़कर सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की तरफ भेज दिया गया. जमान पर उतरने से पहले संबंधित हवाई अड्डे पर सुरक्षा बलों, बम निरोधक टीम और मेडिकल टीम को पहले से ही तैयार रखा जाता है, ताकि लैंडिंग के तुरंत बाद स्थिति को संभाला जा सके.
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