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अस्पतालों में इन पांच वजहों से लगती है सबसे ज्यादा आग, रखना चाहिए इन बातों का खयाल

अक्सर अस्पताल में आग लगने के कई मामले सामने आते हैं. अस्पताल में आग कई कारणों से लग सकती है, जिसमें ज्यादातर मामलों में लापरवाही भी एक बड़ा कारण होती है.

मरीज अपना इलाज करवाने अस्पताल जाते हैं और कई बार वहां हुए हादसों का शिकार हो जाते हैं. जिसमें अचानक लगी आग एक प्रमुख कारण है. भारत में आग लगने के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें पूरा अस्पताल ही आग की चपेट में आ गया. अक्सर लोगों को पता नहीं होता है कि आग लगने के क्या बड़े कारण होते हैं, ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सिर्फ शॉट सर्किट से ही आग लगती है. हालांकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, अस्पतालों में आग लगने कई कारण हो सकते हैं. आइए जानते हैं... 

अस्पताल में आग लगने के 5 बड़े कारण  

गैस सिलेंडर और मेडिकल ऑक्सीजन - अस्पताल में ऑक्सीजन के सिलेंडर का इस्तेमाल होता है. इसके अलावा गैस सिलेंडर के एक कंटेनर में ऑक्सीजन, एसिटिलीन, ब्यूटेन और प्रोपेन जैसी गैसें भरी होती हैं और अगर इन्हें ठीक से नहीं संभाला जाए तो यह फट सकते हैं. ऐसे में कई बार ये भी आग लगने का कारण बन सकते हैं.  

इलेक्ट्रिक मेडिकल उपकरण - अस्पताल में बिजली से आग लगना एक बड़ा कारण होता है. अगर खराब वायरिंग होती है तो यह एक बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है. हैवी मेडिकल इलेक्ट्रिकल उपकरणों के कारण भी कई बार आग लगने की घटना देखी गई हैं. इनमें ज्यादातर शॉर्ट सर्किट की घटनाएं शामिल होती हैं. 

अस्पताल का किचन - बड़ी इमारतों में रसोईघर के कारण आग लगना काफी आम होता है. रसोई में आग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है और कई बार यही आग घटना का कारण बन जाती है.

धूम्रपान - वैसे तो अधिकतर अस्पतालों में धूम्रपान निषेध होता है, लेकिन इसके बाद भी कई बार सिगरेट और माचिस के टुकड़े अस्पताल में लगी आग का कारण बने हैं. धूम्रपान वाले क्षेत्रों को अस्पताल से दूर रखना चाहिए.

स्टोरेज रूम्स और सप्लाई एरिया - मेडिकल से जुड़े सामान को रखने के लिए जो कमरा दिया जाता है, अगर उसमें सामान सही से नहीं रखा जाए तो आग लगने का खतरा पैदा हो सकता है. जिन चीजों में आग जल्दी लग जाती है, उन चीजों को हीटिंग सिस्टम से दूर रखना चाहिए. 

ऐसे हो सकता है बचाव

कई बार ये भी देखा गय है कि अस्पतालों में फायर फाइटिंग के उचित इंतजाम भी नहीं होते हैं, ऐसे में अस्पताल प्रशासन को इस पर काम करना चाहिए. चाइल्ड केयर वार्डों और ICU वार्डों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. अस्पताल के स्टाफ को फायर इक्युपमेंट्स की बेसिक जानकारी देनी चाहिए. आग लगने की पुरानी घटनाओं से सबक लेना चाहिए और भविष्य के लिए अच्छी योजनाएं बनाना चाहिए. ये सब करने से अस्पतालों में लगने वाली आग को रोका जा सकता है और कई जानें बचाई जा सकती हैं. 

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