क्या इजराइल को भी कर्जा देता है भारत? जानें उस पर कितना उधार
भारत और इजराइल के बीच सीधा सरकारी कर्ज जैसा कोई बड़ा आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का निवेश और व्यापारिक लेन-देन जारी है. आइए जानें कि भारत इजरायल को कैसे कर्जा देता है.

भारत और इजराइल की दोस्ती आज के दौर में केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक गहरी और आर्थिक साझेदारी में बदल चुकी है. जब भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के उधार या कर्ज देने की बात आती है, तो अक्सर पड़ोसी देशों का नाम सामने आता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत, इजराइल जैसे विकसित और सैन्य रूप से शक्तिशाली देश को भी कर्ज देता है? हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच हुए बड़े समझौतों और निवेश ने इस सवाल को एक नई दिशा दी है. आइए जानें कि क्या वाकई में ऐसा होता है?
क्या भारत इजराइल को सीधे कर्जा देता है?
आमतौर पर भारत अपने पड़ोसी देशों (जैसे श्रीलंका या नेपाल) को आर्थिक संकट के समय 'लाइन ऑफ क्रेडिट' या सीधे कर्जा देता है. लेकिन यहां इजराइल के मामले में स्थिति थोड़ी अलग दिखती है. इजराइल एक विकसित अर्थव्यवस्था (OECD सदस्य) है, इसलिए उसे भारत से पारंपरिक तरीके के उधार की जरूरत नहीं पड़ती. हालांकि, दोनों देशों के बीच वित्तीय संबंध बहुत मजबूत हैं. भारत ने इजराइल के साथ सितंबर 2025 में एक नई द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) साइन की है, जो दोनों देशों के निवेशकों को सुरक्षा और गारंटी देती है.
निवेश के जरिए पहुंचता है भारत का पैसा
भारत से इजराइल की ओर पैसा कर्ज के रूप में नहीं, बल्कि निवेश के रूप में बड़े स्तर पर जा रहा है. साल 2000 से 2025 के बीच भारतीय कंपनियों ने इजराइल में लगभग 443 मिलियन डॉलर का सीधा निवेश किया है. इसमें सबसे बड़ा नाम अडानी ग्रुप का है, जिसने इजराइल के हाइफा पोर्ट को खरीदने के लिए लगभग 1.18 बिलियन डॉलर (करीब 9800 करोड़ रुपये) का साल 2023 में निवेश किया है. यह भारत की ओर से इजराइल की जमीन पर किया गया अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक कदम है.
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जानें कौन किसका कर्जदार?
भारत और इजराइल के बीच रक्षा संबंधों की बात करें तो यहां समीकरण उल्टा नजर आता है. भारत, इजराइल के रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा खरीदार है. सिपरी (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल के कुल हथियार निर्यात का लगभग 34% हिस्सा भारत आता है. भारत ने पिछले कुछ दशकों में इजराइल से हथियार खरीदने पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं. यहां उधार के बजाय अग्रिम भुगतान और Joint Ventures का मॉडल चलता है, जिससे इजराइल की रक्षा कंपनियों को भारतीय पैसा बड़े पैमाने पर मिलता है.
व्यापार संतुलन किसके पक्ष में है पलड़ा?
भारत और इजराइल के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 तक यह व्यापार लगभग 3.75 बिलियन डॉलर रहा (रक्षा सौदों को छोड़कर). दिलचस्प बात यह है कि व्यापार का संतुलन अक्सर भारत के पक्ष में रहता है. भारत इजराइल को रत्न, आभूषण, डीजल, रसायन और कृषि उत्पाद निर्यात करता है, जबकि वहां से मुख्य रूप से हीरा, मशीनरी और उर्वरक मंगाता है. यह बढ़ता व्यापार दिखाता है कि इजराइल को कर्ज देने के बजाय भारत वहां एक बड़े सप्लायर और पार्टनर के रूप में अपनी जगह मजबूत कर रहा है.
I2U2 और भविष्य का नया वर्ल्ड ऑर्डर
भारत अब इजराइल के साथ मिलकर तीसरे देशों में निवेश करने की योजना बना रहा है. I2U2 (भारत, इजराइल, अमेरिका, यूएई) जैसे संगठनों के जरिए भारत इजराइल की तकनीक और अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को जोड़कर फूड कॉरिडोर और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है. यह साझेदारी पारंपरिक कर्ज देने-लेने से कहीं ऊपर है. यह एक ऐसा फाइनेंशियल फ्रेमवर्क है जहां दोनों देश मिलकर दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं.
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