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Cyclone Remal: रेमल में चलेंगी तेज हवाएं, क्या आप जानते हैं कितनी तेज हवा में इंसान उड़ने लग जाता है?

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात रेमल तूफान का रूप ले रहा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक देर रात तक ये हवा 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी. लेकिन क्या इतने तेज हवा में इंसान उड़ सकता है?

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात रेमल देर रात तक तूफान में बदल जाएगा. आईएमडी के वैज्ञानिक सोमनाथ दत्ता के मुताबिक रेमल 13 किमी/घंटा की रफ्तार से बंगाल की खाड़ी में उत्तर की ओर बढ़ रहा है. वहीं आज यानी रविवार रात 12 बजे के बाद यह बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में सागर आइलैंड और बांग्लादेश के खेपुपाड़ा के बीच लैंडफॉल करेगा. इस दौरान करीब 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. लेकिन सवाल ये है कि आखिर कितनी तेज हवा में इंसान उड़ सकता है? जानिए एक्सपर्ट ने इसको लेकर क्या कहा है. 

रेमल

आईएमडी के वैज्ञानिक सोमनाथ दत्ता बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात के कारण लैंडफॉल के वक्त बंगाल की खाड़ी में 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठ सकती हैं. वहीं बंगाल और बांग्लादेश के निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका भी है. इसी कारण सरकार ने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है. इसके अलावा गृह मंत्रालय ने एनडीआरएफ की 12 टीमें तैनात की हैं. इसके अलावा 5 अतिरिक्त टीम को स्टैंडबाय पर रखा गया है. जहाजों और विमानों के साथ सेना, नौसेना और कॉस्ट गार्ड टीम भी किसी आपात स्थिति के लिए तैनात हैं. वहीं तूफान के कारण कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट रविवार दोपहर 12 बजे से सोमवार 9 बजे तक के लिए बंद कर दिया गया है. जिस कारण 394 फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं. बता दें कि इस सीजन में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला यह पहला प्री-मॉनसून चक्रवात है. रेमल तूफान को यह नाम ओमान ने दिया है. रेमल अरबी शब्द है, जिसका मतलब रेत होता है.

इंसान कब उड़ सकता? 

बता दें कि इंसान का हवा में उड़ना कई बातों पर निर्भर करता है. इसमें सबसे मुख्य गुरुत्वाकर्षण बल है. इसके अलावा हवा में क्या उड़ सकता है, ये सामान की बनावट और उसपर लगने वाले बल पर भी निर्भर करता है. इंसान तो 150 की रफ्तार से भी कम स्पीड में भी एक जगह से दूसरी जगह मूव कर सकता है. हालांकि उड़ना मुश्किल है. इंसान का उड़ना हवा के फोर्स पर निर्भर करता है. जैसे टोरनेडो, बवंडर की स्थिति में ऐसा संभव हो सकता है. ता दें कि इंसान ग्रेविटी की वजह से जमीन पर टिका रहता है, लेकिन अगर 70 माइल प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती है, तो ये ग्रेविटी के फोर्स पर हावी हो सकती है. इस दौरान इंसान अपनी जगह से हिल सकता है. वहीं इंसान के पूरे तरीके से उड़ने के लिए कई तरह के बल काम करते हैं. 

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गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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