Iran US Deal: 4% गिरे क्रूड ऑयल के दाम, इससे कितना सस्ता हो जाएगा पेट्रोल-डीजल; क्या भारत में भी घटेंगे दाम?
Iran US Deal: हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों में 4% की गिरावट देखने को मिली. आइए जानते हैं कि क्या इसका असर भारत पर भी पड़ेगा.

- अमेरिकी-ईरान शांति समझौते से कच्चे तेल की कीमतें 4% गिरीं।
- वैश्विक गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर।
- कंपनियां पिछले नुकसान भरपाई कर रही हैं, टैक्स भी कम।
- लंबी अवधि तक कम रहने पर, दाम ₹2-₹5 घट सकते हैं।
Iran US Deal: ग्लोबल एनर्जी मार्केट में एक बड़ी घटना की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद शुरुआती कारोबार के दौरान इंटरनेशनल क्रूड की कीमतों में 4% से ज्यादा की गिरावट आई है. मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की संभावना और होर्मुज के फिर से खुलने की चर्चा से मार्केट का भरोसा बढ़ा. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस गिरावट के बाद कितना सस्ता हो जाएगा पेट्रोल और डीजल और क्या भारत में भी दाम घटेंगे.
भारत में घरेलू ईंधन की कीमतें
ब्रेंट क्रूड 4% से ज्यादा गिरकर लगभग 83.75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. WTI क्रूड लगभग 5% गिरकर करीब 80.87 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. इसके बावजूद भारत में घरेलू ईंधन की कीमतें जस की तस बनी हुई हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि तेल मार्केटिंग कंपनियों ने रिटेल दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया है.
यह भी पढ़ेंः क्या TMC के बागी गुट के खिलाफ कोर्ट जा सकती है पार्टी, क्या है नियम?
क्यों नहीं घट रही कीमतें?
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियां अभी भी हालिया पश्चिम एशिया संकट के दौरान हुए नुकसान की भरपाई कर रही हैं. जब ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी तो कंपनियों ने काफी समय तक इसका पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला था. हालांकि मई के बीच से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹7 से ₹8 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. लेकिन कंपनियां अभी भी पहले हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं.
एक और वजह केंद्र सरकार द्वारा ईंधन पर टैक्स में कटौती है. मार्च में सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹3 प्रति लीटर कम कर दी थी और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर शून्य कर दी थी. क्योंकि टैक्स की दरें पहले से ही काफी कम स्तर पर हैं इस वजह से टैक्स में कटौती के जरिए तुरंत और राहत देने की गुंजाइश काफी कम है.
आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता भी एक बड़ी भूमिका निभाती है. देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85% से ज्यादा इंपोर्ट करता है. हालांकि इंटरनेशनल तेल की कीमतें नरम हुई हैं लेकिन इंपोर्ट की लागत अभी भी रुपये डॉलर एक्सचेंज रेट और ज्यादा माल ढुलाई व बीमा खर्चों से प्रभावित हो रही है.
कच्चे तेल की कीमतें कम होने से पेट्रोल डीजल पर क्या पड़ेगा असर?
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक अगर ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर रहती हैं तो ग्राहकों को फायदा हो सकता है. क्रूड की कीमतों में लगातार नरमी से तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी. इसी के साथ कीमतें घटाने की गुंजाइश बनेगी. अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत कई हफ्तों या महीना तक 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहती हैं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ₹2 से ₹5 प्रति लीटर तक नरमी आ सकती है.
यह भी पढ़ेंः एक अंतरिक्ष यान को बनाने में कितना आता है खर्च? लागत सुनकर नहीं होगा यकीन


















