गुरमेहर से रिया तक... Gen-Z आंदोलन के 5 चर्चित चेहरे
Gen-Z Movement India: कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किया गया जंतर मंतर पर प्रदर्शन GenZ केंद्रित पहला आंदोलन बना. आइए जानते हैं इस आंदोलन के कुछ बड़े चेहरों के बारे में.

- GenZ ने डिजिटल माध्यम से भारत में छात्र आंदोलन शुरू किया।
- नीट लीक, परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर आंदोलन जमीन पर आया।
- रिया यादव, गुरमेहर कौर सहित पांच युवा प्रमुख चेहरे बनकर उभरे।
- रणनीति, कानूनी सहायता, मीडिया समन्वय से आंदोलन को मजबूती मिली।
Gen-Z Movement India: हाल ही में हुए छात्र आंदोलन में GenZ ने परीक्षा सुधारों से लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक के मुद्दों को उठाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और सड़क विरोध प्रदर्शन का इस्तेमाल किया. इस आंदोलन को सफल बनाने में कई लोगों ने एक बड़ी भूमिका निभाई. जो आंदोलन इंटरनेट मीडिया से शुरू हुआ था, वह जमीन पर उतरा और पहला GenZ-केंद्रित आंदोलन बना. इस आंदोलन का नेतृत्व पूरी तरह से युवाओं के हाथ में था. नीट पेपर लीक से जुड़े आंदोलन, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और सोशल मीडिया अभियानों ने कई युवा कार्यकर्ताओं और प्रचारकों को सुर्खियों में ला दिया है. आइए जानते हैं उन पांच लोगों के बारे में जो इस आंदोलन से एक बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं.
रिया यादव-छात्रों के विरोध का एक वायरल चेहरा
रिया यादव जिन्हें रिया अहीर के नाम से भी जाना जाता है, मुंबई में हाल के छात्र विरोध प्रदर्शन में सबसे व्यापक रूप से पहचाने वाले चेहरों में से एक बनकर उभरी हैं. हिरासत में लिए गए छात्रों को ले जा रहे एक पुलिस वाहन के सामने खड़ी उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा वायरल हो गई और कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित होने के बाद उन्होंने कई लोगों का ध्यान खींचा. विरोध प्रदर्शन के दौरान रिया ने युवा प्रदर्शनकारियों के दृढ़ संकल्प को बताते हुए कहा कि GenZ में "Z " का मतलब जिद्दी है.
गुरमेहर कौर-फ्री स्पीच और छात्र मुद्दों के लिए आवाज
दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज की पूर्व छात्रा गुरमेहर कौर एक लेखिका और युवा कार्यकर्ता हैं. ये अभिव्यक्ति की आजादी और छात्र मुद्दों से संबंधित कई अभियानों से जुड़ी रही हैं. उन्होंने पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन वकालत अभियानों को लीड किया है और फ्री स्पीच पर उनके काम के लिए उन्हें टाइम पत्रिका द्वारा अपनी नेक्स्ट जेनरेशन लीडर्स सूची में भी मान्यता दी गई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक वे पेपर लीक मामले से संबंधित मामलों में छात्रों की सहायता के लिए शुरू की गई कानूनी एसओएस हेल्पलाइन से भी जुड़ी थीं.

अभिजीत दीपके-रणनीति और कानूनी कोऑर्डिनेशन
अभिजीत दीपके छात्र नेता और सोशल मीडिया रणनीतिकार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने परीक्षा सुधार और कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े छात्र आंदोलन के दौरान विरोध रणनीतियों की योजना बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाई. कथित तौर पर उनकी जिम्मेदारियां में शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कोऑर्डिनेट करना, छात्रों को कानूनी सहायता देना और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा में भाग लेना शामिल था.
आशुतोष रांका-अभियान कोऑर्डिनेटर
जयपुर, राजस्थान के एक सामाजिक प्रचारक आशुतोष रांका पहले पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा से जुड़ी पहल पर काम कर चुके हैं. जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान उन्होंने कथित तौर पर अलग-अलग समूहों के बीच कोऑर्डिनेशन बैठाया, अभियान गतिविधि को व्यवस्थित करने में मदद की और सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत भी की.
रिपोर्ट के मुताबिक वे परिवर्तन नाम के एक संगठन से जुड़े हुए हैं जिसके तहत वे अरावली क्षेत्र और नीट सहित शिक्षा संबंधी मुद्दों से जुड़े अभियानों में शामिल रहे हैं.
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सौरव-मूवमेंट के मीडिया आउटरीच का प्रबंधन करना
मीडिया संचार आधुनिक जन आंदोलन का एक जरूरी हिस्सा बन गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जिम्मेदारी सौरव ने संभाली थी. एक स्वतंत्र खोजी पत्रकार के रूप में उन्होंने कथित तौर पर मीडिया संगठनों के साथ कोऑर्डिनेशन किया, आंदोलन की मांग के बारे में बताया और पत्रकारों के सवालों को संबोधित किया. उनकी भूमिका इस बात को पक्का करने पर केंद्रित थी कि आंदोलन से जुड़े विकास को लगातार मीडिया जुड़ाव के जरिए से जनता का ध्यान मिले.

सार्वजनिक आंदोलन में GenZ की भूमिका
हाल ही में हुए छात्र आंदोलन इस बात को दर्शाया है कि कैसे GenZ उन मुद्दों के बारे में जागरूकता को बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया आउटरीच, वकालत, जमीनी स्तर के संगठन और सार्वजनिक प्रदर्शन को तेजी से जोड़ता है जिन्हें वे जरूरी मानते हैं. भले ही यह डिजिटल अभियान के जरिए से किया गया हो या फिर जमीन स्तर पर हुए प्रदर्शन से, युवा प्रतिभागी अब सार्वजनिक चर्चा का एक प्रभावशाली हिस्सा बन चुके हैं.
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