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क्या जमानत मिलने के बाद दोबारा नौकरी कर सकती है निकिता सिंघानिया, जानें क्या कहता है कानून?

Nikita Singhania Bail: ऐसे मामलों में आरोपी तब तक निलंबित रहता है, जब तक अदालत आरोपी को बाइज्जत बरी न कर दे. हालांकि, यह नियम सरकारी नौकरी के लिए है. जबकि निकिता सिंघानिया एक प्राइवेट नौकरी करती थीं. 

अतुल सुभाष सुसाइड केस में बड़ा अपडेट सामने आया है. बेंगलुरू की सिटी सिविल कोर्ट ने मामले में अतुल सुभाष की पत्नी निकिता सिंघानिया, उनकी मां निशा सिंघानिया और भाई अनुराग सिंघानिया समेत सभी आरोपियों को जमानत दे दी है. निकिता संघानिया को पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था. वहीं, निशा सिंघानिया और उनके भाई अनुराग को प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया था. इन तीनों पर अतुल सुभाष को सुसाइड के लिए उकसाने का आरोप है. 

अब सवाल यह है कि क्या जमानत मिलने के बाद अतुल सुभाष की आरोपी पत्नी निकिता सिंघानिया दोबारा अपनी जॉब कंटीन्यू कर सकती हैं? दरअसल, ऐसे मामलों में आरोपी तब तक निलंबित रहता है, जब तक अदालत आरोपी को बाइज्जत बरी न कर दे. हालांकि, यह नियम सरकारी नौकरी के लिए है. जबकि निकिता सिंघानिया एक प्राइवेट नौकरी करती थीं. 

अतुल से ज्यादा कमाती थीं निकिता सिंघानिया

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि निकिता सिंघानिया अपने पति अतुल सुभाष से ज्यादा कमाई करती हैं. उनकी सालाना सैलरी लाखों में है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मामले से पहले निकिता सिंघानिया एसेंचर इंडिया में बतौर एआई इंजीनियर के तौर काम करती थीं. कंपनी के सैलरी स्ट्रक्चर को देखें तो यहां औसत सैलरी 11 लाख रुपये है, वहीं एआई इंजीनियर को 16 लाख रुपये सालाना मिलते हैं. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि एआई इंजीनियर के तौर पर काम करने वाली निकिता सिंघानिया मोटी सैलरी लेती थीं. 

क्या है नियम?

अब आते हैं असल मुद्दे पर. नियमों के मुताबिक, जब भी किसी सरकारी सेवक पर कोई पुलिस केस दर्ज किया जाता है तो उसे सस्पेंड या टर्मिनेशन कर दिया जाता है. सस्पेंड होने पर आरोपी की अस्थाई रूप से सेवा समाप्त कर दी जाती है, जबकि टर्मिनेशन में सेवा स्थाई रूप से खत्म हो जाती है. हालांकि, इसके लिए सीमा निर्धारित की गई है. ऐसे अपराध जिनमें 3 साले अधिक कारावास का प्रावधान है, उन अपराधों में एफआईआर होने पर सरकारी सेवक को सस्पेंड कर दिया जाता है. जब तक व्यक्ति मुकदमें में बरी नहीं हो जाता, तब तक उसको सेवा में नहीं लिया जाता है. अगर किसी मामले में कोर्ट ने 100 रुपये का भी जुर्माना किया है और व्यक्ति ने जुर्माना स्वीकार कर लिया है, तब भी व्यक्ति सरकारी सेवा में नहीं रह सकता है. 

प्राइवेट नौकरी में क्या नियम?

ये निमय सरकारी नौकरी के लिए हैं. हालांकि, प्राइवेट नौकरियों के लिए अलग से कोई नियम नहीं है. यह कंपनियों पर निर्भर करता है कि वह व्यक्ति की सेवाएं फिर से चालू रखती हैं या नहीं. कई बड़ी कंपनियों में किसी भी व्यक्ति को सेवा में रखने से पहले बैकग्राउंड वेरीफिकेशन कराया जाता है, जिसमें व्यक्ति पर चल रहे मामलों की जानकारी मांगी जाती है. वहीं, कंपनियां व्यक्ति की ज्वाइनिंग के बाद के मामलों के लिए भी नियम निर्धारित करती हैं. ऐसे में आरोपी व्यक्ति कंपनी के निमयों के मुताबिक ही काम कर सकता है. 

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