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क्या चांद पर किसी लोहे की चीज में जंग लग सकता है, क्या कहता है विज्ञान?

Moon Rust: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या चांद पर जंग लग सकता है. आइए जानते हैं.

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  • ध्रुवीय बर्फ तथा सौर हवा से बचाव जंग में सहायक।

Moon Rust: जंग लगने की प्रक्रिया आमतौर पर पृथ्वी के वायुमंडल से जुड़ी होती है. यहां लोहा ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में आता है. हालांकि चंद्रमा पर लगभग कोई भी वायुमंडल नहीं है और ना ही कोई बहता हुआ पानी, इस वजह से वैज्ञानिकों को लंबे समय से ऐसा लगता था कि वहां जंग लगने की संभावना काफी कम है.  लेकिन इसके बावजूद भी एक आश्चर्यजनक खोज ने इस धारणा को चुनौती दी है. वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र में हेमेटाइट का पता लगाया है. यह एक आयरन ऑक्साइड है और आमतौर पर जंग से जुड़ा होता है. यह खोज एक दिलचस्प सवाल उठाती है कि आखिर चंद्रमा पर लोहा ऑक्सीकृत कैसे हो सकता है. आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.

चंद्रयान 1 की आश्चर्यजनक खोज 

2020 में भारत के चंद्रयान 1 मिशन के डेटा का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर खासतौर से इसके ध्रुवीय क्षेत्र के आसपास हेमेटाइट के प्रमाण की सूचना दी. हेमेटाइट एक आयरन ऑक्साइड है और इसकी मौजूदगी अप्रत्याशित थी क्योंकि चंद्रमा पर वैसी वायुमंडलीय और पर्यावरणीय स्थिति नहीं है जो पृथ्वी पर लोहे में आसानी से जंग लगने देती है. इस खोज से पता चला कि चांद की सतह पर कोई  असामान्य रासायनिक प्रक्रिया हो रही हो सकती है. 


क्या चांद पर किसी लोहे की चीज में जंग लग सकता है, क्या कहता है विज्ञान?

चांद पर जंग लगना मुश्किल क्यों? 

पृथ्वी पर सामान्य जंग तब लगता है जब लोहा पानी या फिर नमी की मौजूदगी में ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करता है. चांद का वायुमंडल काफी पतला है, वहां बारिश नहीं होती और ना ही इसकी सतह पर तरल पानी बहता है. यही वजह है कि हेमेटाइट की खोज इतनी दिलचस्प है. अगर चांद पर जंग लगने के लिए जरूरी सामान्य वातावरण नहीं है तो वैज्ञानिकों को यह पता लगाने की जरूरत थी कि ऑक्सीजन और पानी से संबंधित तत्व कहां से आ सकते हैं. 

पृथ्वी का वायुमंडल 

एक संभावित जवाब आश्चर्यजनक रूप से हमारे काफी करीब है. पृथ्वी एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र से घिरी हुई है जिसे मैग्नेटोस्फीयर कहा जाता है. जब सूरज से आने वाली सौर हवा इस चुंबकीय क्षेत्र के साथ संपर्क करती है तो यह एक लंबी पूंछ जैसी संरचना बनाती है जिसे मैग्नेटोटेल कहा जाता है. 

चांद समय समय पर इस क्षेत्र से होकर गुजरता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल से निकलने वाले ऑक्सीजन आयन इस चुंबकीय वातावरण के साथ यात्रा कर सकते हैं और चांद की सतह तक पहुंच सकते हैं. इससे ऑक्सीकरण के लिए जरूरी ऑक्सीजन मिल सकती है.


क्या चांद पर किसी लोहे की चीज में जंग लग सकता है, क्या कहता है विज्ञान?

पानी की बर्फ एक और जरूरी चीज देती है 

भले ही चांद पर समुद्र या फिर नदी न हो, लेकिन वहां पानी की बर्फ जरूर है. खासकर इसके ध्रुव के पास हमेशा छाया में रहने वाले गड्ढों में. इन काफी ठंडी जगहों पर सीधी धूप काफी कम या फिर बिल्कुल भी नहीं पहुंचती. इससे पानी की बर्फ लंबे समय तक सुरक्षित रहती है. वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि चांद का यह पानी सतह पर मौजूद लोहे के साथ होने वाली केमिकल रिएक्शन में मदद कर सकता है. 

सूरज एक मुश्किल पैदा करता है 

इस पहेली का एक जरूरी हिस्सा है सौर हवा. दरअसल सौर हवा में हाइड्रोजन होता है. हाइड्रोजन एक रिड्यूसिंग एजेंट के तौर पर काम कर सकता है. यानी यह ऑक्सीडेशन का विरोध कर सकता है. आम हालात में सौर हवा के हाइड्रोजन की लगातार मौजूदगी से जंग लगना मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से चांद का समय समय पर पृथ्वी की मैग्नेटोटेल से होकर गुजरना काफी अहम हो जाता है. 

पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र सही हालात बना सकता है 

जब चांद पृथ्वी की मैग्नेटोटेल से होकर गुजरता है तो यह कुछ समय के लिए सौर हवा के बड़े हिस्से से सुरक्षित हो जाता है. यही वजह है कि चांद की सतह तक पहुंचने वाले हाइड्रोजन की मात्रा काफी कम हो जाती है. इसी के साथ पृथ्वी से निकलने वाले ऑक्सीजन कण चांद तक पहुंच सकते हैं. चांद की सतह पर पानी या फिर हाइड्रॉलिक्स युक्त सामग्री के साथ मिलकर यह ऑक्सीडेशन और हेमेटाइट बनने के लिए अनुकूल हालात पैदा कर सकता है.

यह भी पढ़ेंः इस देश का नहीं है कोई भी अपना संविधान, जानें कौन तय करता है नियम कानून?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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