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 Nuclear Explosion In Space: क्या अंतरिक्ष में भी फट सकता है न्यूक्लियर बम, जानें पृथ्वी से कैसे अलग होगा वहां का धमाका?

 Nuclear Explosion In Space: अगर अंतरिक्ष में न्यूक्लियर बम फटे तो उसके परिणाम धरती पर होने वाले धमाके से काफी अलग होंगे. आइए जानते हैं की अंतरिक्ष में न्यूक्लियर धमाका अलग क्यों होगा.

 Nuclear Explosion In Space: अंतरिक्ष में न्यूक्लियर धमाका धरती पर होने वाले धमाके से काफी अलग होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अंतरिक्ष में लगभग पूरी तरह से वैक्यूम है. अंतरिक्ष में हवा नहीं होती और ना ही कोई एटमॉस्फेयर. इस वजह से शॉक वेव या फिर आवाज को ले जाने के लिए कोई मीडियम ही नहीं है. यही वजह है कि धरती पर न्यूक्लियर बमों से जुड़े विनाशकारी प्रभाव इस ग्रह के बाहर धमाका होने पर काफी ज्यादा बदल जाते हैं.

अंतरिक्ष में न्यूक्लियर धमाका अलग क्यों होता है?

धरती पर न्यूक्लियर धमाका मुख्य रूप से गर्मी, दबाव और हवा के जरिए फैलने वाली शॉक वेव्स की वजह से तबाही मचाता है. अंतरिक्ष में वे ही मेकैनिज्म मौजूद नहीं होते. इसके बजाय रेडिएशन और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रभाव हावी होते हैं. इस वजह से एक काफी अलग तरह का खतरा पैदा होता है जो शहरों के बजाय टेक्नोलॉजी को टारगेट करता है.

क्या होता है असर?

जब धरती पर न्यूक्लियर बम फटता है तो हवा बड़े फायर बॉल और विनाशकारी दबाव वाली लहरों को बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाती है. इसी वजह से इमारत गिरती हैं. अंतरिक्ष में हवा को कंप्रेस करने या फिर गर्म करने के लिए कुछ नहीं होता. इस वजह से कोई फायर बॉल नहीं बनता और ना ही कोई शॉक वेव बाहर की तरफ फैलती है. धमाका पूरी तरह से शांत होता है और देखने में ज्यादा डरावना नहीं होता. 

रेडिएशन बन जाता है बड़ा हथियार 

अंतरिक्ष के वैक्यूम में बम की ज्यादातर एनर्जी हाई एनर्जी रेडिएशन जैसे एक्स-रे, गामा रे और तेजी से चलने वाले चार्ज्ड पार्टिकल्स के रूप में रिलीज होती है. इस रेडिएशन को सोखने या फिर रोकने के लिए कोई भी एटमॉस्फेयर नहीं होने की वजह से यह हजारों किलोमीटर तक ट्रेवल कर सकता है. यह अंतरिक्ष में होने वाले धमाकों को एस्ट्रोनॉट्स, स्पेसक्राफ्ट और सेटेलाइट के लिए काफी ज्यादा दूरी पर भी खतरनाक बनाता है.

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स टेक्नोलॉजी को खराब कर सकती है 

अगर कोई भी न्यूक्लियर डिवाइस धरती के ऊपर एटमॉस्फेयर में या उसके पास फटता है तो रेडिएशन एटमॉस्फेयर के पार्टिकल और ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड के साथ इंटरेक्ट करता है. यह इंटरेक्शन एक बड़ा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स पैदा कर सकता है. यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स में सैटेलाइट को डिसेबल करने, कम्युनिकेशन सिस्टम को ठप करने, जीपीएस सिगनल को बंद करने और यहां तक की धरती पर बड़े इलाकों में पावर ग्रिड को गिराने की क्षमता रखता है.

क्या अंतरिक्ष में न्यूक्लियर धमाका करना कानूनी है?

वैसे तो यह टेक्निकली मुमकिन है लेकिन अंतरिक्ष में न्यूक्लियर धमाके आज पूरी तरह से गैर कानूनी हैं. 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी बाहरी अंतरिक्ष में न्यूक्लियर हथियारों को रखने, टेस्ट करने या इस्तेमाल करने पर रोक लगाती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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