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Budget 2026: बजट तो पेश हो गया अब आगे क्या, जानिए क्या होती है संसद की पूरी प्रक्रिया?

Budget 2026: देश का इस साल का केंद्रीय बजट पेश हो चुका है. इसी बीच आइए जानते हैं कि बजट पेश होने के बाद संसद की आगे की प्रक्रिया क्या होती है.

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया. इसमें अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए ₹53.5 लाख करोड़ की खर्च योजना बताई गई. इसी बीच आइए जानते हैं कि बजट पेश होने के बाद आगे की संसद प्रक्रिया क्या होती है.

बजट पेश करना 

यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब वित्त मंत्री लोकसभा में बजट पेश करते हैं और संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत वार्षिक वित्तीय विवरण सदन के पटल पर रखते हैं. इस दिन कोई चर्चा या फिर वोटिंग नहीं होती. यह भाषण संसद और जनता को सरकार की वित्तीय योजनाओं, टैक्स प्रस्ताव और नीतिगत प्राथमिकताओं के बारे में सूचित करने के लिए होता है.

संसद में आम चर्चा 

बजट पेश करने के कुछ दिनों बाद संसद बजट पर आम चर्चा करती है. यह बहस लोकसभा और राज्यसभा दोनों में होती है. संसद सदस्य इकोनामिक विजन, सरकार की प्राथमिकता और क्षेत्रीय आवंटन पर चर्चा करते हैं. जरूरी बात यह है कि इस चरण में कोई भी वोटिंग नहीं होती. इस चर्चा का मकसद माहौल बनाना और चिंताओं को समझना है.

स्थायी समितियों द्वारा विस्तृत जांच 

आम चर्चा के बाद संसद को लगभग तीन से चार हफ्तों के लिए स्थगित कर दिया जाता है. इस दौरान असली जांच पर्दे के पीछे होती है. 24 विभागीय स्थायी समिति अलग-अलग मंत्रालयों की अनुदान मांगों का विस्तार से विश्लेषण करती हैं. वे अधिकारियों से सवाल करती हैं, खर्च की दक्षता की जांच करती हैं और सुधारों का सुझाव देती हैं.

अनुदान मांगों पर वोटिंग

समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट जमा करने के बाद लोकसभा मंत्रालय-वार अनुदान मांगों पर चर्चा फिर से शुरू करती है. यह चरण काफी ज्यादा जरूरी है क्योंकि इसमें खर्च पर वास्तविक वोटिंग शामिल होती है. इन मांगों को मंजूरी देने या फिर अस्वीकार करने का अधिकार सिर्फ लोकसभा के पास है. समिति समय की वजह से कभी-कभी सभी बाकी मांगों पर बिना चर्चा के एक साथ वोटिंग की जाती है. इस पूरी प्रक्रिया को गिलोटिन के नाम से जाना जाता है.

खर्च करने का कानूनी अधिकार 

अनुदान मांगों को मंजूरी मिलने के बाद सरकार विनियोग विधेयक पेश करती है. यह विधेयक जरूरी है क्योंकि यह सरकार को भारत की संचित निधि से पैसा निकालने का अधिकार देता है. इस विधेयक के पारित हुए बिना सरकार बजट में बताए गए फंड को कानूनी रूप से खर्च नहीं कर सकती. 

बजट प्रक्रिया को पूरा करना 

आखरी कदम फाइनेंस बिल का पास होना है. इसमें बजट में घोषित सभी टैक्स प्रस्ताव होते हैं. जैसे इनकम टैक्स, कस्टम ड्यूटी और जीएसटी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव. एक बार जब यह बिल संसद में पास हो जाता है और भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है तो बजट प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर पूरी हो जाती है और प्रस्ताव कानून बन जाते हैं.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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