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पुतिन या शी जिनपिंग... किसकी सिक्योरिटी ज्यादा मजबूत, कौन से गार्ड करते हैं सुरक्षा?

BRICS Summit 2026: दिल्ली में 18 में ब्रिक्स समिट के लिए काफी कड़े इंतजाम हैं. इसी बीच आइए जानते हैं पुतिन और शी जिनपिंग की सिक्योरिटी के बारे में. जानें कौन करता है इनकी सुरक्षा.

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  • ब्रिक्स सम्मेलन हेतु दिल्ली में पुतिन, जिनपिंग की कड़ी सुरक्षा।
  • पुतिन की सुरक्षा फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस के चार घेरों में होती है।
  • शी जिनपिंग की सुरक्षा माहौल नियंत्रण और निगरानी पर केंद्रित है।

BRICS Summit 2026: 18वें ब्रिक्स समिट के लिए दिल्ली में सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की उम्मीद के चलते राजधानी को हाई सिक्युरिटी जोन में बदल दिया गया है. पुतिन आज दिल्ली पहुंच चुके हैं जबकि शी जिनपिंग 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे. इसी बीच आइए जानते हैं कि दोनों नेताओं की सुरक्षा कितनी कड़ी है और कौन से गार्ड उनकी सुरक्षा करते हैं.

पुतिन की सुरक्षा 

व्लादिमीर पुतिन को काफी ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ता है. उनकी सुरक्षा मुख्य रूप से रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस संभालती है. इसे एफएसबी जैसी खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग मिलता है. रूसी नेशनल गार्ड या फिर रोसगवार्डिया भी राष्ट्रपति की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाता है. पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर बनी है. ऐसा इसलिए ताकि खतरों को उन तक पहुंचने से पहले ही पहचाना और खत्म किया जा सके.


पुतिन या शी जिनपिंग... किसकी सिक्योरिटी ज्यादा मजबूत, कौन से गार्ड करते हैं सुरक्षा?

पुतिन के चारों तरफ सुरक्षा के चार घेरे

पहला घेरा क्लोज प्रोटेक्शन टीम का होता है. इसमें पर्सनल बॉडीगार्ड शामिल होते हैं जो राष्ट्रपति के करीब रहते हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों या फिर यात्रा के दौरान उनके साथ चलते हैं. दूसरे घेरे में सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी होते हैं जो भीड़ में घुल मिल जाते हैं और बिना ध्यान खींचे लोगों पर नजर रखते हैं. तीसरी घेरे में हथियारबंद कमांडो होते हैं जो लोगों की आवाजाही को कंट्रोल करते हैं और संदिग्ध लोगों को पुतिन के करीब आने से रोकते हैं. चौथे घेरे में स्नाइपर और लंबी दूरी की सुरक्षा टीम होती है जो दूर से आने वाले खतरों से निपटने के लिए तैनात रहती हैं . 

पुतिन के काफिले में भारी सुरक्षा वाली गाड़ियां, नकली काफिले और अलग-अलग तरह के हमले का मुकाबला करने के लिए बने सिस्टम भी शामिल हो सकते हैं. उनकी सुरक्षा व्यवस्था में आधुनिक संचार और साइबर सुरक्षा का इस्तेमाल भी शामिल है. इसी के साथ अतिरिक्त सावधानी के तौर पर उनके खाने और पीने की कड़ी जांच की जाती है. 

शी जिनपिंग की सुरक्षा 

शी जिनपिंग की सुरक्षा व्यवस्था एक अलग सोच पर आधारित है. चीनी सुरक्षा एजेंसियां मुख्य रूप से दिखाई देने वाली ताकत पर निर्भर रहने के बजाय राष्ट्रपति के आसपास के पूरे माहौल को कंट्रोल करने पर ज्यादा ध्यान देती हैं. उनकी सुरक्षा चीन का सेंट्रल गार्ड ब्यूरो संभालता है. इसे सेंट्रल सिक्योरिटी ब्यूरो भी कहा जाता है. इस सिस्टम से जुड़े कर्मियों को अच्छी खासी ट्रेनिंग दी जाती है जिसमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जुड़ी ट्रेनिंग भी शामिल है. जिनपिंग जहां भी जाते हैं सुरक्षा बल उनके चारों तरफ सुरक्षा का एक बड़ा घेरा बना लेते हैं. राष्ट्रपति की सुरक्षा और उनके आसपास आवाजाही को कंट्रोल करने के लिए हजारों सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया जा सकता है. 


पुतिन या शी जिनपिंग... किसकी सिक्योरिटी ज्यादा मजबूत, कौन से गार्ड करते हैं सुरक्षा?

जिनपिंग के आसपास निगरानी और तकनीक 

जिनपिंग की विदेश यात्राओं के लिए पहले से काफी ज्यादा तैयारी की जाती है. चीनी सुरक्षा और खुफिया अधिकारी राष्ट्रपति के पहुंचने से पहले ही जगह का मुआयना करते हैं और मेजबान देश के साथ सुरक्षा इंतजामों का तालमेल बिठाते हैं. 

जिन जगहों पर जिनपिंग ठहरते हैं वहां चीनी एजेंसियां संचार और आसपास के माहौल पर कड़ा कंट्रोल रखती हैं. इंटरनेट और नेटवर्क एक्सेस के साथ-साथ होटल के इंफ्रास्ट्रक्चर की भी कड़ी सुरक्षा जांच और निगरानी की जा सकती है. 

विदेशी यात्राओं के दौरान सादे कपड़ों में भी सैकड़ों सुरक्षा कर्मियों को तैयार किया जा सकता है. यह स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर सुरक्षा का आकलन करते हैं और चीनी राष्ट्रपति के पहुंचने से पहले संभावित खतरों की पहचान करते हैं. 

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किसकी सुरक्षा ज्यादा मजबूत? 

दोनों ही सिस्टम काफी ज्यादा एडवांस्ड हैं लेकिन उनके तरीके अलग-अलग हैं. जिनपिंग की सुरक्षा रणनीति में माहौल पर पूरी तरह से कंट्रोल, निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाना और खतरों को रोकने पर जोर दिया जाता है. इसका मकसद आसपास के माहौल को इस तरह कंट्रोल करना है कि संभावित खतरों को उभरने का मौका ही ना मिले. 

इसी के साथ पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में कई परतों वाली सुरक्षा, भारी हथियार, तेजी से कार्रवाई करने और सक्रिय बचाव पर ज्यादा जोर दिया जाता है. हमले की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के लिए सुरक्षा के कई घेरे, खास टीमें, सुरक्षित काफिले और खतरों का मुकाबला करने वाले सिस्टम बनाए गए हैं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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