Bihar Elections 2025: 2010 से 2025 तक, बिहार चुनाव में कितनी बढ़ी महिला उम्मीदवारों की भागीदारी?
Bihar Elections 2025: बिहार की राजनीति में महिलाएं अब बदलाव की वाहक बन चुकी हैं. 2010 से 2025 तक उन्होंने अपनी मौजूदगी का एहसास कराया है. चलिए जानें कि अब तक इनकी संख्या कितनी बढ़ी.

Bihar Elections 2025: कभी चुनावी रैलियों में सिर्फ तालियां बजाने वाली महिलाएं अब खुद मंच संभालने लगी हैं. बिहार की गलियों में अब चुनावी नारे सिर्फ मर्दों की आवाज में नहीं गूंजते, बल्कि हर चौक-चौराहे पर वोट मांगती महिलाओं का शोर सुनाई देता है. पर बड़ा सवाल यही है क्या इस बदलती तस्वीर में वाकई महिलाओं को बराबरी का हक मिला है? 2010 से लेकर 2025 तक के आंकड़े कहते हैं कि महिलाएं वोट डालने में तो पुरुषों से आगे हैं, लेकिन जब टिकट बांटने की बारी आती है, तो सियासत अब भी उन्हें पीछे खड़ा कर देती है.
महिलाओं की चुनाव में भागीदारी
बिहार का चुनावी इतिहास गवाह है कि यहां महिलाएं मतदान के मामले में पुरुषों से हमेशा आगे रही हैं. आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन विधानसभा चुनावों में महिला वोटरों का प्रतिशत हर बार पुरुष वोटरों से अधिक रहा है. यानी लोकतंत्र की इस लड़ाई में वे आगे बढ़ने का संदेश देती रही हैं, लेकिन जब बात आती है राजनीति में उनकी सीधी भागीदारी की यानी टिकट की चुनाव और जीत की तब तस्वीर थोड़ी धुंधली दिखती है.
2010 में उम्मीद की शुरुआत
साल 2010 में कुल 214 महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी थीं. उस समय कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 32 महिलाओं को टिकट दिए थे, लेकिन दुर्भाग्य से एक भी जीत नहीं सकीं. वहीं जेडीयू ने 23, बीजेपी ने 12 और आरजेडी ने 11 महिला उम्मीदवार उतारे थे. इस बार महिलाओं ने बड़ा असर छोड़ा, जेडीयू की 21 महिलाएं, बीजेपी की 10 और एक निर्दलीय उम्मीदवार विधानसभा पहुंचीं. यानी महिलाओं की जीत दर भले कम थी, लेकिन यह शुरुआत बड़ी उम्मीद वाली थी.
2015 का बदलता दौर
2015 आते-आते महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 272 हो गई. इस बार जेडीयू, आरजेडी और बीजेपी तीनों ने महिलाओं पर भरोसा दिखाया. जेडीयू और आरजेडी ने 10-10, बीजेपी ने 14 महिलाओं को टिकट दिए हैं. इसमें कुल 28 महिलाएं विधानसभा पहुंचीं, इनमें जेडीयू की 9, आरजेडी की 10, बीजेपी की 4, कांग्रेस की 4 और एक निर्दलीय थीं. यह वो वक्त था जब बिहार की सियासत में महिलाओं की मौजूदगी महसूस की जाने लगी थी.
2020 बढ़ी संख्या, घटी सफलता
2020 में तस्वीर और दिलचस्प हुई. इस साल 370 महिलाओं ने चुनावी मैदान में उतरने की हिम्मत दिखाई. लेकिन जीत का आंकड़ा ठहर गया, सिर्फ 26 महिलाएं ही विधानसभा तक पहुंच सकीं. भाजपा ने इस साल 13 महिलाओं को टिकट दिए और उनमें से 9 ने जीत दर्ज की, यानी 69% सफलता दर, जो सबसे अधिक थी.
आरजेडी की 23 में से 10 महिलाओं ने जीत दर्ज की, जबकि जेडीयू की सफलता दर 27% के आसपास रही. लेकिन आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण बताता है कि महिलाओं को टिकट देने की दर में कई दलों ने कमी की. कांग्रेस और सीपीआई(एमएल) जैसी पार्टियों ने पिछली बार से कम महिलाओं को उतारा.
2025: बढ़ती आकांक्षाएं, घटती हिस्सेदारी
अब आते हैं मौजूदा दौर पर 2025 के बिहार चुनाव पर. इस बार एनडीए की तरफ से 34 और महागठबंधन की तरफ से 30 महिलाएं मैदान में हैं. सबसे ज्यादा महिला उम्मीदवार आरजेडी (23) ने उतारी हैं, उसके बाद जन सुराज पार्टी (25) और बसपा (26) हैं.
लेकिन जेडीयू और बीजेपी जैसी प्रमुख पार्टियों ने महिला टिकटों में कमी की है. जेडीयू ने 13, बीजेपी ने भी 13 उम्मीदवारों को मौका दिया है. इसका मतलब साफ है कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के वादे तो खूब हुए, लेकिन हकीकत में कदम उतने तेज नहीं बढ़े.
ट्रेंड क्या बताता है?
15 सालों में महिला उम्मीदवारों की संख्या 214 से 370 तक बढ़ी, लेकिन सफलता दर लगभग 7% पर ही अटकी रही. यानी भागीदारी तो बढ़ी है, मगर जीत की राह अब भी कठिन है. विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार में महिला वोटरों की सक्रियता को देखते हुए दलों को अब टिकट बंटवारे की सोच बदलनी होगी. क्योंकि आंकड़े साफ कहते हैं कि वोट बैंक में महिलाएं आगे हैं, लेकिन सत्ता में अब भी पीछे ही हैं.
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Source: IOCL






















