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Bihar Assembly Elections: चुनाव की घोषणा होते ही कितनी कम हो जाती है मुख्यमंत्री की पावर, जानें क्या है कानून

Bihar Assembly Elections: बिहार में चुनाव की तैयारी पूरी हो चुकी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चुनाव की घोषणा होते ही मुख्यमंत्री की पावर कितनी कम हो जाती है? आइए जानते हैं.

Bihar Assembly Elections: बिहार में चुनाव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और राजनीतिक माहौल काफी ज्यादा गरमा रहा है. हर जगह बस एक ही सवाल गूंज रहा है कि चुनाव आयोग आखिर चुनाव की तारीखों का ऐलान कब करेगा. इसी बीच यह सवाल उठता है कि चुनाव की घोषणा होते ही मुख्यमंत्री की पावर कितनी कम हो जाती है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब और क्या कहता है कानून. 

चुनाव घोषणा के बाद मुख्यमंत्री की शक्तियां 

चुनाव की आधिकारिक घोषणा के बाद मुख्यमंत्री की पावर में कटौती हो जाती है लेकिन वह पूरी तरह खत्म नहीं होती. सरकार काम करती रहती है लेकिन चुनाव आयोग द्वारा हर कदम पर कड़ी नजर रखी जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य सभी पार्टियों के लिए समान अवसर को सुनिश्चित करना और साथ ही वोटरों को प्रभावित करने के लिए सत्ता के गलत इस्तेमाल को रोकना है.

नीतिगत और वित्तीय फैसलों पर पाबंदी 

इसका सबसे बड़ा असर नीति निर्माण पर पड़ता है. मुख्यमंत्री अब नई योजनाओं को घोषित नहीं कर सकते. साथ ही कोई नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया जा सकता या फिर वोटरों को लुभाने के लिए कोई जनहित संबंधी वादे नहीं किए जा सकते. इसी के साथ कोई भी बड़ा वित्तीय फैसला जैसे कि बड़े पैमाने पर खर्च या फिर नया बजट आवंटन पूरी तरह से बैन है. 

ट्रांसफर और अपॉइंटमेंट पर सीमाएं 

इतना ही नहीं बल्कि चुनाव आयोग प्रशासनिक फेरबदल पर भी कड़ा प्रतिबंध लगाता है. सरकारी अधिकारियों का स्थानांतरण, नई नियुक्ति या फिर पदोन्नति बिना कोई पूर्व अनुमति के नही की जा सकती. इसी के साथ कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया जा सकता. हालांकि चल रहे विकास कार्य जारी रह सकते हैं, बशर्ते उनका इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए ना किया जाए.

प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नहीं 

इसी के साथ मुख्यमंत्री और मंत्रियों को प्रचार के लिए सरकारी वाहन, सरकारी आवास और बाकी सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल करने से रोक दिया जाता है. उन्हें मॉडल आचार संहिता के नियमों का सख्ती से पालन करना होता है और साथ ही सरकारी कामकाज को राजनीतिक गतिविधियों से बिल्कुल अलग रखना होता है. 

मुख्यमंत्री की अंतरिम भूमिका 

इन सभी प्रतिबंधों के बावजूद भी मुख्यमंत्री राज्य प्रशासन के प्रमुख बने रहते हैं. कानून व्यवस्था, आपात स्थिति से निपटने के लिए और साथ ही मंत्री परिषद की अध्यक्षता जैसे जरूरी मामलों पर उनकी पावर बनी रहती है. उनका काम सिर्फ अंतरिम सरकार तक ही सीमित रह जाता है और वे नई सरकार बनने तक सिर्फ सामान्य कामकाज पर ही ध्यान देते हैं.

यह भी पढ़ें: बिहार चुनाव में किन राज्यों के IAS की नहीं लगेगी ड्यूटी? जानें नियमों का हिसाब-किताब

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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