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India-Bhutan Border: पाकिस्तान बॉर्डर पर तो तैनात रहती है बड़ी फोर्स, मगर इंडिया-भूटान बॉर्डर पर कौन सी फोर्स?

भारत के पास कुल 15,106.7 किलोमीटर लंबी जमीना सीमा है. जिसके लिए सेना के साथ अलग-अलग पैरामिलिट्री फोर्सेस तैनात है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत-भूटान सीमा पर कौन सी फोर्स तैनात है?

भारतीय सेना के जवान भारतीय सीमाओं की सुरक्षा करते हैं. भारत के पास कुल 15,106.7 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा है. इन सीमाओं की सुरक्षा के लिए सेना के साथ पैरामिलिट्री फोर्सेस तैनात है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान,चीनी सीमा समेत भूटान बॉर्डर पर कौन-कौन सी यूनिट सीमा की सुरक्षा करती है. आज हम आपको बताएंगे कि किस बॉर्डर पर कौन सी यूनिट तैनात है. 

भारत-पाकिस्तान बॉर्डर

भारत-पाकिस्तान 1962 युद्ध के बाद देश में एक यूनिफाइड सेंट्रल आर्म्ड फोर्स बनाने की जरूरत पड़ी थी. जिससे पाकिस्तान की 3,323 किमी लंबी सीमा की निगरानी की जा सके. इसके बाद ही तब 1 दिंसबर 1965 के दिन बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स का गठन हुआ था. जानकारी के मुताबिक शुरुआत में 25 बटालियन बने थे. लेकिन आज इसके पास 193 नियमित बटालियन, 4 एनडीआरएफ बटालियन, 7 तोपखाने की इकाइयां, 8 वाटर विंग और 1 एयर विंग शामिल है. बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के गठन के बाद ही इस फोर्स के जवानों को पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात किया गया था. वहीं 1971 के युद्ध के बाद बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने बने देश बांग्लादेश की सीमा की निगरानी भी की थी. 

भारत-भूटान बॉर्डर 

अब सवाल ये है कि आखिर भारत-भूटान बॉर्डर की सुरक्षा कौन करता है. बता दें कि साल 1962 में चीनी हमले के बाद मई 1963 में सशस्त्र सीमा बल को स्पेशल सर्विस ब्यूरो के रूप में बनाया गया था. वहीं सशस्त्र सीमा बल को जून 2001 के समय भारत-नेपाल सीमा के लीड इंटेलिजेंस एजेंसी बना दिया गया था. इस फोर्स को ही 1751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा की निगरानी भी सौंप दिया गया था. वहीं मार्च 2004 में एसएसबी को 699 किलोमीटर लंबी भारत-भूटान सीमा की निगरानी का जिम्मा भी सौंप दिया गया था. यह बल रॉ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के फॉरेन इंटेलिजेंस डिविजन की मदद भी करता है. वहीं नेपाल-भूटान सीमा से सटे राज्यों में इनके सेंटर्स मौजूद हैं. जिसमें यूपी, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल है.  

असम राइफल्स

बता दें कि असम राइफल्स देश की सबसे पुरानी पैरामिलिट्री संस्था है. यह काउंटर इंसरजेंसी के लिए एक्सपर्ट मानी जाती है. वहीं उत्तर-पूर्व भारत में किसी भी तरह की घुसपैठ को ये रोकती है. वहीं असम राइफल्स भारतीय सेना का ही हिस्सा है. यह भारत-चीन और भारत-म्यांमार सीमा पर अपनी सख्त पहरेदारी के लिए जानी जाती है. ये देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए लगातार तैनात रहते हैं. बता दें यह इकलौती ऐसी सीमा सुरक्षा बल है जो केंद्रीय पैरामिलिट्री फोर्स नहीं है. ये आर्मी की पैरामिलिट्री फोर्स है. 

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गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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