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किन राज्यों में अब भी नहीं चलता आयुष्मान कार्ड, इलाज के लिए वहां सरकार से कितनी मिलती है मदद?

भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद दिल्ली में आयुष्मान योजना को लागू कर दिया गया है. हालांकि, अभी भी कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां इस योजना का लाभ नागरिकों को नहीं मिलता है.

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना लागू कर दी गई है. 10 अप्रैल से दिल्ली वासियों को इस योजना के तहत आयुष्मान कार्ड का वितरण भी शुरू कर दिया गया है. दिल्ली में यह योजना लागू होने से 6.54 लाख परिवारों को इसका लाभ मिलेगा. दिल्ली में इस योजना के तहत राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये का अतिरिक्त टॉपअप दिल्ली वासियों को दिया जा रहा है, यानी आयुष्मान योजना के तहत लोग 10 लाख रुपये तक का फ्री इलाज करा सकेंगे. 

इससे पहले राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आयुष्मान योजना को दिल्ली में लागू नहीं किया था. आम आदमी पार्टी सरकार का कहना था कि तत्कालीन दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत पहले से लोगों का इलाज बिना खर्च के हो रहा है, लिहाजा इस योजना की आवश्यकता नहीं है. ऐसे में क्या आप जानते हैं कि भारत के किन राज्यों में अब भी आयुष्मान योजना लागू नहीं है? किन राज्यों में लोग आयुष्मान कार्ड के जरिए मुफ्त इलाज नहीं करा सकते और इन राज्यों में इलाज के लिए लोगों को सरकार की तरफ से कितनी मदद दी जाती है? आइए जानते हैं... 

पश्चिम बंगाल में नहीं चलता आयुष्मान कार्ड

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की तरह पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने भी राज्य में आयुष्मान योजना लागू नहीं की थी. हालांकि, राज्य सरकार लोगों के इलाज के लिए एक अन्य योजना चलाती है. पश्चिम बंगाल में आयुष्मान योजना की जगह 'स्वास्थ्य साथी' नाम की एक योजना चलाई जा रही है. इस योजना के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है. आयुष्मान योजना की तहत पश्चिम बंगाल की सरकार भी लाभार्थियों को स्मार्ट कार्ड जारी करती है, जिसके जरिए मुफ्त इलाज कराया जा सकता है. 

दिल्ली में चलती थी यह योजना

दिल्ली में आयुष्मान योजना लागू होने से पहले केजरीवाल सरकार आरोग्य कोष योजना चलाती थी. सरकार ने इस योजना के तहत किसी तरह की कोई लिमिट तय नहीं की थी, यानी इलाज का जितना भी खर्च आता था, उसका खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता था. दिल्ली के ऐसे नागरिक, जिनके पास दिल्ली का वोटर कार्ड है, वह इस योजना का लाभ उठा सकते थे. इस योजना के तहत नागरिकों को 136 तरह के फ्री मेडिकल टेस्ट की भी सुविधा मिलती थी. 

यह भी पढ़ें: भारत के साथ युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने किन देशों से मांगी थी मदद? जानें किसने दिया था साथ

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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