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Astronauts Baby Feet: स्पेस से लौटकर बच्चों की तरह क्यों चलने लगते हैं एस्ट्रोनॉट्स? जानकर हैरान रह जाएंगे आप

Astronauts Baby Feet: अंतरिक्ष से लौटकर वापस आने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों में बेबी फीट डेवलप हो जाते हैं. वो कई हफ्तों तक ठीक से चल नहीं पाते हैं. इसी वजह उनके पैर की ऊपरी चमड़ी का खत्म हो जाना है.

Astronauts Baby Feet: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बताया है कि पिछले नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसी सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर आद शाम को धरती पर वापस लौट आएंगे. दोनों ही यात्रियों कों वापस लेने के लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने शनिवार की सुबह क्रू-10 मिशन लॉन्च किया था. दोनों अंतरिक्ष यात्रियों के धरती पर लौटने की खुशी तो रहेगी, लेकिन यहां वापस आने के बाद उनको तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. इसमें एक बड़ी दिक्कत है बेबी फीट. यानि कि अंतरिक्ष से वापस आने के बाद अंतरिक्ष यात्री बच्चों की तरह चलने लग जाते हैं. लेकिन ऐसा क्यों होता है, बताते हैं. 

क्यों डेवलप हो जाते हैं बेबी फीट

NASA के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री ने एक न्यूज चैनल के साथ बातचीत में बताया था कि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण यात्रियों को कुछ वक्त तक धरती पर चलने में बहुत मुश्किल होती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो धरती पर लौटने के बाद अपना संतुलन नहीं बना पाते हैं. जो अंतरिक्ष यात्री लंबे वक्त तक वहां रहते हैं, उनमें तो बेबी फीट डेवलप हो जाते हैं और उनका चलना मुश्किल हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो पैरों के तलवों पर चलने के लिए जुड़ी रहने वाली कॉलस खो देते हैं. यानि कि पैरों ती त्वचा का मोटा हिस्सा खो जाता है और जब आप वापस आते हैं तो आपके पास फिर से बेबी फीट हो जाते हैं. हालांकि से चिंता का विषय नहीं है, क्योंकि कुछ वक्त के बाद आप फिर से नॉर्मली चलने लगते हैं. 

मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं

लंबे वक्त तक अंतरिक्ष में रहने के बाद यात्रियों की हड्डियां और मांसपेशिया कमजोर हो जाती हैं. ऐसे में उनके शरीर में काफी बदलाव देखने को मिलता है. अंतरिक्ष में हवा और गुरुत्वाकर्षण न होने की वजह से अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में कोई वजन का आभास नहीं होता है. उनके पैर की ऊपर की चमड़ी खत्म हो जाती है और उनके पैर बच्चों की तरह कोमल हो जाते हैं, इसलिए उनको चलने-फिरने में दिक्कत होती है. बेबी फीट के अलावा उनको बोन डेंसिटी लॉस की समस्या का भी सामना करना पड़ता है. गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण उनकी बोन डेंसिटी लॉस हो जाती है और हड्डियां कमजोर पड़ जाती हैं. इससे हड्डयों के टूटने का खतरा होता है. 

इन एक्सरसाइज से नॉर्मल हो पाते हैं एस्ट्रेनॉट्स

इसके अलावा पैरों और पीठ की मांसपेशियां भी शारीरिक गतिविधियां न होने की वजह से कमजोर हो जाती हैं. इसे रोकने के लिए अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष स्टेशन में ही नियमित रूप से 2.5 घंटे एक्सरसाइज करते हैं. वो नियमित रूप से स्वॉक्ट्स, बेंच प्रेसिंग, डेडलिफ्ट्स आदि का इस्तेमाल करते हैं, जिसके लिए स्पेस स्टेशन में एक खास जगह बनाई गई है. इसके अलावा एक्सरसाइज बाइक का इस्तेमाल और नियमित रूप से ट्रेडमिल पर भी दौड़ते हैं. हड्डियां मजबूत रहें, इसके लिए वो सप्लीमेंट्स भी लेते हैं. अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष से वापस आने के बाद नॉर्मल होने के लिए कई हफ्तों का समय लग जाता है.

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