सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या भारत को टैरिफ रिटर्न देंगे ट्रंप, जान लें नियम
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के बड़े टैरिफ को रद्द कर खेल बदल दिया है. अब 175 अरब डॉलर की वसूली पर रिफंड का सवाल खड़ा है. भारत समेत दुनिया की नजर इस बात पर है कि आगे अमेरिका क्या कदम उठाएगा.

अमेरिका से आई एक बड़ी खबर ने वैश्विक व्यापार की दिशा बदल दी है. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन टैरिफ को असंवैधानिक ठहराकर रद्द कर दिया है, जिनके कारण दुनिया भर के कारोबारी महीनों से असमंजस में थे. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो अरबों डॉलर वसूले गए, उनका क्या होगा? और क्या भारत समेत दूसरे देशों को कोई राहत मिलेगी? चलिए समझें.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कई बड़े और विवादित टैरिफ को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है. ये टैरिफ ट्रंप प्रशासन की अमेरिका फर्स्ट नीति का अहम हिस्सा थे, जिनके तहत कई देशों से आयात पर भारी शुल्क लगाया गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन टैरिफ के जरिए करीब 175 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम वसूली गई. यह रकम अमेरिकी सीमा शुल्क विभाग के जरिए कंपनियों से ली गई थी. अब अदालत के फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या यह पैसा कंपनियों को लौटाया जाएगा?
175 अरब डॉलर का सवाल
रिपोर्ट्स बताती हैं कि रिफंड की प्रक्रिया आसान नहीं होगी. कई कंपनियां पहले ही अपने दावों की तैयारी में जुट गई हैं. हालांकि, कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है. कानूनी जानकारों के अनुसार, रिफंड से जुड़े मामलों की सुनवाई United States Court of International Trade में होगी. इसका मतलब है कि कंपनियों को औपचारिक दावे दाखिल करने होंगे और अदालत से मंजूरी लेनी होगी. हर मामले की अलग-अलग जांच होगी, इसलिए सभी को तुरंत पैसा मिल जाएगा, ऐसा मान लेना जल्दबाजी होगी.
कुछ अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि सरकार को बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है. अगर पूरी राशि लौटानी पड़ी तो इसका असर अमेरिकी बजट पर भी पड़ सकता है.
भारत को वापस मिलेगा पैसा?
अब बात भारत की करें तो, भारत भी उन देशों में शामिल रहा है, जिन पर ट्रंप प्रशासन ने अलग-अलग समय पर टैरिफ लगाए थे. ऐसे में भारतीय निर्यातकों की नजर इस फैसले पर टिकी हुई है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि पैसा सीधे भारत सरकार को नहीं मिलेगा. अगर रिफंड होता है तो वह उन कंपनियों को मिलेगा जिन्होंने टैरिफ चुकाया था. इनमें अमेरिकी आयातक और कुछ विदेशी निर्यातक कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं.
भारत सरकार ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अमेरिकी प्रशासन के नए कदमों का अध्ययन कर रही है. फिलहाल अमेरिका ने पांच महीनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात अधिभार लगाने की घोषणा की है. 150 दिनों के बाद क्या नीति रहेगी, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है.
व्यापार समझौतों पर असर
टैरिफ की दरों में लगातार बदलाव कभी 10 प्रतिशत, कभी 25 प्रतिशत या उससे ज्यादा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को अनिश्चित बना दिया है. भारतीय निर्यातकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में लंबी अवधि के अनुबंध तय करना मुश्किल हो जाता है. अगले दिनों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का अमेरिका दौरा और अमेरिकी अधिकारियों की भारत यात्रा तय है. दोनों देशों के बीच स्थिर व्यापार माहौल बहाल करना एक बड़ी चुनौती होगी. अगर टैरिफ नीति में स्पष्टता आती है, तो इसका फायदा दोनों अर्थव्यवस्थाओं को हो सकता है.
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Source: IOCL
























