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क्या धर्मपरिवर्तन के बाद भी ले सकते हैं एसटी दर्जे के लाभ? जानें नियम

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ किया कि धर्म बदलने से आदिवासी पहचान खत्म नहीं होती. ईसाई या अन्य धर्म अपनाने के बाद भी मिलता रहेगा ST आरक्षण का पूरा सरकारी लाभ.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देश में धर्म परिवर्तन और आरक्षण के नियमों को लेकर एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए साफ कर दिया है कि अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदल लेता है, तो भी उसकी आदिवासी पहचान और उससे जुड़े अधिकार खत्म नहीं होते हैं. हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद देश के कानूनी गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है. 

अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम रहता था कि हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई या कोई अन्य मजहब अपनाने के बाद क्या अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले सरकारी लाभ जारी रहते हैं या नहीं? इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने इस फैसले से इस पूरे कानूनी पेंच को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है, जिसके बारे में हर नागरिक को जानना बेहद जरूरी है. 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या की अहम टिप्पणी?

मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा किसी व्यक्ति के धार्मिक विश्वास पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह उसकी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा होता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति एसटी समुदाय में पैदा हुआ है, तो केवल ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपना लेने मात्र से उसकी आदिवासी पहचान खत्म नहीं हो जाती. कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि धर्म बदलने के आधार पर किसी भी एसटी नागरिक को उसके संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण के लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है.

क्या कहता है भारत का संविधान और कानून?

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला भारतीय संविधान के मौजूदा नियमों के बिल्कुल अनुकूल है। हमारे कानून के मुताबिक, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के नियमों में एक बड़ा फर्क है. SC दर्जे के लिए नियम है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा कोई अन्य धर्म अपनाता है, तो उसका एससी दर्जा खत्म हो जाता है. 

लेकिन अनुसूचित जनजाति के मामले में ऐसा कोई धार्मिक बंधन नहीं है. ST का दर्जा पूरी तरह से इस बात पर तय होता है कि वह व्यक्ति किस कबीले या आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखता है. यही कारण है कि देश के कई राज्यों में ईसाई धर्म अपनाने के बाद भी आदिवासी समाज के लोगों को एसटी का लाभ मिलता रहता है.

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इस फैसले का समाज पर क्या होगा असर?

अदालत के इस रुख के बाद अब उन लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो ST समुदाय से आते हैं और किसी कारणवश उन्होंने अपना धर्म बदल लिया था. इस फैसले से यह साफ हो गया है कि सरकारी नौकरियों, दाखिलों और अन्य योजनाओं में मिलने वाला ST आरक्षण पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. कोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि धर्म परिवर्तन के आधार पर जाति प्रमाणपत्र जारी करने से मना न किया जाए. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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