प्लेन क्रैश के कई मामलों के बाद भी सबसे सेफ क्यूं माना जाता है हवाई सफर, ये है इसका कारण
Air India Plane Crash: जब 12.6 लाख विमान उड़ान भरते हैं तब एक हादसे की संभावना होती है. 2017 से 2023 के बीच का औसत देखा जाए तो 8.80 लाख फ्लाइट पर एक हादसा दर्ज किया गया था.

Air India Plane Crash: गुजरात के अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का विमान हादसे का शिकार हो गया. 12 जून, गुरुवार की दोपहर टेकऑफ के तुंरत विमान क्रैश हो गया. इस दौरान विमान में 242 यात्री सवार थे, जिसमें से सभी की मौत की आशंका जताई जा रही है. इतना ही नहीं, आवासीय क्षेत्र में विमान गिरने से कई स्थानीय लोगों की भी मौत की बात सामने आ रही है.
एयर इंडिया प्लेन क्रैश जैसे हादसे से पहले भी कई बार हो चुके हैं, जिसमें हजारों लोग अपनी जान गंवाई है. विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 विमान हादसे हुए हैं, जिसमें 1473 लोगों की मौत हुई है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि प्लेन क्रैश के इतने सारे मामलों के बाद भी हवाई सफर को सबसे ज्यादा सेफ क्यों माना जाता है? लोग इसे सड़क या रेल मार्ग से ज्यादा तवज्जो क्यों देते हैं?
सड़क या ट्रेन से सफर करने से ज्यादा है सेफ
भले ही विमान हादसों में किसी के बचने की संभावना न के बराबर रहती हो, इसके बावजूद हवाई सफर को काफी सेफ माना जाता है. दरअसल, रेल या सड़क मार्ग से सफर के दौरान हादसे के कई कारण हो सकते हैं. इसमें सीधी टक्कर, रॉन्ग रूट, हाई स्पीड जैसे कारक है. हालांकि, विमान के दौरान इन चीजों की संभावना ही नहीं होती. विमान हादसे का कारण तभी होते हैं, जब विमान में कोई तकनीकी समस्या आई हो या फिर पायलट ने एसओपी का पालन न किया हो.
क्या कहते हैं आंकड़े
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की सेफ्टी रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में दुनियाभर में 3.7 करोड़ से ज्यादा विमानों ने उड़ान भरी थी और यह संख्या 2022 की तुलना में 17 फीसदी ज्यादा थी. इसके बावजूद 2023 में सिर्फ एक ही हादसा हुआ. इस रिपोर्ट के अनुसार, जब 12.6 लाख विमान उड़ान भरते हैं तब एक हादसे की संभावना होती है. जबकि, 2022 में तो 13 लाख से ज्यादा विमानों के उड़ान भरने पर एक हादसा हुआ था. पांच साल का औसत देखा जाए तो 8.80 लाख फ्लाइट पर एक हादसा दर्ज किया गया था. ऐसी ही रिपोर्ट मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट की ओर से जारी की गई थी, इसमें कहा गया था कि 2018 से 2022 में अगर करीब 1.34 करोड़ यात्री हवाई सफर करते हैं तो उसमें से एक को ही मौत का खतरा है.
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