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इन रेलवे स्टेशनों पर लगेगा AI बेस्ड सिस्टम, जानिए इससे कैसे होगी महिलाओं का यौन शोषण करने वालों की पहचान?

AI Facial Recognition System For Women Safety: महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार कड़े कदम उठा रही है. इसी क्रम में एआई के जरिए अपराधियों की पहचान की जाएगी. चलिए जानें कैसे.

महिलाओं की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए सरकार कड़े कदम उठा रही है और हरसंभव प्रयास कर रही है. हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि वह महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए मुंबई CST और नई दिल्ली सहित सात प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित फेशियल रिकग्निशन सिस्टम लगाने की योजना बना रही है. केंद्र सरकार ने अदालत को बताया है कि यौन अपराधियों पर राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीएसओ) में दर्ज यौन अपराधियों की संख्या 20 लाख का आंकड़ा पार कर गई है. ऐसे में उन पर नकेल कसने की जरूरत है. 

किन शहरों में लागू होगा यह सिस्टम

इसमें पहले फेज में सात रेलवे स्टेशन शामिल किए जाएंगे, जिसमें मुंबई छत्रपति शिवाजी टर्मिनल, नई दिल्ली शामिल हैं. जल्द ही बाकी स्टेशनों के नाम भी सामने आ सकते हैं. इससे पहले ही आठ शहरों में सेफ्टी सिटी प्रोजेक्ट के तहत सिक्योरिटी मेजर्स शुरू किए जा चुके हैं. 

किस तरह काम करेगा AI सिस्टम

गृह मंत्रालय की मानें तो ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें फेशियल रिकॉग्निशन कैमरा, ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR), स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग, ड्रोन्स के जरिए निगरानी और सीसीटीवी सर्विलांस शामिल हैं. मंत्रालय ने कहा, इंटीग्रेटेड इमरजेंसी रेस्पॉन्स मैनेजमेंट सिस्टम (IERMS) को 983 प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से 499 पर चालू कर दिया गया है, जिससे महिला यात्रियों के लिए 24X7 सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है. अगले फेज में एआई आधारित फेस रिकॉग्निशन सिस्टम भई लग जाएगा.

 क्राइम रिपोर्ट क्या कहती है?

गृह मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस (NDSO) में रेप, छेड़छाड़, गैंगरेप, पीछा करना और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार में शामिल लोगों के नाम पते, फोटो और फिंगरप्रिंट की जानकारी शामिल है. इसमें अब तक 20.28 लाख जानकारियां शामिल हैं, जिनको देश के सभी पुलिस थानों और कानून लागू करने वाली एजेंसियां इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के जरिए इस्तेमाल कर सकती है. 

नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों की मानें तो महिलाओं के खिलाफ अपराध 2018 में प्रति लाख 58.8 से बढ़कर 2022 में प्रति लाख 66.4 हो चुका है. वहीं 2022 में 23.66 लाख मामले कोर्ट में पेंडिंग थे, लेकिन सिर्फ 38,136 मामलों में ही सजा हुई है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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