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हिटलर को कोई मार नहीं पाया था, ऐसे हुआ था जर्मनी के तानाशाह का अंत

हिटलर ने पूरी दुनिया में अपने नाम का खौफ फैला दिया था. दूसरे विश्व युद्ध में जब जर्मनी की लगभग हार हो चुकी थी. उसी समय हिटलर की मौत की खबर भी आ गई. आखिर कैसे हुई दुनिया के इतने बड़े तानाशाह की मौत.

भारत में कोई अगर कहीं ज्यादा सख्ती दिखाता है तो उसे हिटलर की उपाधि दे दी जाती है. कुछ ऐसा था जर्मनी के तानाशाह हिटलर का आतंक. हिटलर का पूरा नाम एडोल्फ हिटलर था. हिटलर को मरे हुए करीब 80 साल से ज्यादा का समय हो चुका है. सामान्य सैनिक से जर्मनी के चांसलर बनने के बाद हिटलर ने पूरी दुनिया में अपने नाम का खौफ फैला दिया था. दूसरे विश्व युद्ध में जब जर्मनी की लगभग हार हो चुकी थी. उसी समय हिटलर की मौत की खबर भी आ गई. क्या आपको पता है आखिर कैसे हुई दुनिया के इतने बड़े तानाशाह की मौत. आइए जानते हैं

हिटलर ने की थी खुदकुशी

हिटलर का जन्म ऑस्ट्रिया में हुआ था. पहले विश्व युद्ध में ऑस्ट्रिया और जर्मनी की हार हुई थी. उस दौरान हिटलर ऑस्ट्रिया से जर्मनी का नागरिक बन चुका था. पहले विश्व युद्ध में जर्मनी की हार का बदला लेने के लिए हिटलर ने पूरी दुनिया में दूसरा विश्व युद्ध करवा दिया. लेकिन दूसरे विश्व युद्ध में भी जर्मनी का अंजाम पहले विश्व युद्ध की तरह ही हुआ. 1945 में जर्मन सैना आत्मसमर्पण कर चुकी थी. जब हिटलर को यह एहसास हो गया की अब जर्मनी की हार तय है. उसके बाद वह अपनी पत्नी इवा ब्राउन के साथ बर्लिन के एक खुफिया बंकर में चला गया. यह बंकर जमीन से करीब 50 फीट नीचे था. जब सोवियत सेना ने बर्लिन को पूरी तरफ घेर लिया था. तब 30 अप्रैल 1945 को हिटलर ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी. 

एक दिन पहले ही की थी शादी

जर्मनी का तानाशाह एडोल्फ हिटलर इवा ब्राउन के साथ रिश्ते में थे. अपनी जिंदगी को खत्म होते देख हिटलर ने इस बात का फैसला लिया कि वह अपने इस रिश्ते को शादी का रूप देंगे. इसीलिए आत्महत्या करने से एक दिन पहले ही एडोल्फ हिटलर ने इवा ब्राउन से शादी की थी. शादी के अगले दिन ही दोनों ने आत्महत्या कर ली थी. 

ईसाई होने का बावजूद शव जलाया गया 

हिटलर की आत्महत्या को लेकर कहा जाता है कि इसके पीछे बहुत बड़ा कारण था. दरअलस हिटलर नहीं चाहता था कि वह दुश्मन सेना के कब्जे में आए. आत्महत्या से पहले ही अपने साथियों से कहा था कि मेरे मरने के बाद मेरा शरीर जल देना. हिटलर ईसाई धर्म से था और ईसाई धर्म में मृत्यु के बाद शरीर को दफनाया जाता है. लेकिन इतिहास कारों का कहना है कि हिटलर इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के शव के साथ हुई बर्बरता के बाद से डर गया था. उसे यह डर था कि कहीं उसके साथ भी यही ना किया जाए. इसीलिए उसने आत्महत्या करने के पहले ही अपने डेड बॉडी को जलाने के लिए कह दिया था.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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