कांवड़ यात्रा के बाद हरिद्वार में 7 हजार टन कूड़ा, इसे साफ करने में कितना लगेगा पैसा?
Haridwar Kanwar Yatra Waste: हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान 7000 टन कूड़ा इकट्ठा हो गया है. आइए जानते हैं कि इसे साफ करने में कितना पैसा लगेगा.

- कांवड़ यात्रा उपरांत हरिद्वार में 7000 टन कचरा जमा।
- सरकारी बजट से हजार सफाई कर्मी अभियान में लगे।
- कचरा प्लास्टिक, कपड़ा, गीला-सूखा अपशिष्ट का मिश्रण।
- एकत्रित कचरा ठोस अपशिष्ट संयंत्र में संसाधित होगा।
Haridwar Kanwar Yatra Waste: 30 जुलाई को शुरू हुई और 11 अगस्त 2026 को खत्म हुई कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में काफी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. सावन के महीने में लाखों कांवड़िए गंगा से गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार आए और फिर अपनी जगह पर लौट गए. लेकिन इतनी बड़ी तीर्थ यात्रा खत्म होने के बाद हरिद्वार के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. यह समस्या है हजारों टन कचरे का निपटान. ऐसा अनुमान है कि 4.8 करोड़ से ज्यादा कांवड़ियों ने शहर का दौरा किया. रिपोर्ट के मुताबिक यात्रा के दौरान 7000 मीट्रिक टन से ज्यादा कचरा जमा हुआ है. इसमें से अकेले आखिरी दो दोनों में लगभग 2000 टन कचरा इकट्ठा हुआ. आइए जानते हैं कि इतने बड़े सफाई अभियान में कितना खर्च आएगा और यह कचरा कहां पर जाएगा.
7000 टन कचरे की सफाई में कितना खर्चा आएगा?
कांवड़ यात्रा की सफाई के लिए निवासियों पर कोई भी अलग से एक मुश्त कचरा टैक्स नहीं लगाया जाता. इसके बजाय खर्च का प्रबंधन कई तरह की फंडिंग व्यवस्थाओं के जरिए किया जाता है. इसका काफी बड़ा हिस्सा उत्तराखंड सरकार द्वारा आवंटित कांवड़ मेला बजट से आता है. इस बजट में अस्थायी सफाई कर्मचारी, गाड़ियों की तैनाती, सफाई के उपकरण और यात्रा के दौरान व उसके तुरंत बाद जरूरी दूसरी व्यवस्थाओं का खर्च शामिल होता है.
प्रशासन ने लगभग 1000 अतिरिक्त आउटसोर्स सफाई कर्मचारी भी तैनात किए हैं. उनकी मजदूरी, साथ ही ईंधन और गाड़ियों का किराए का खर्च ऑपरेशनल लागत का एक बड़ा हिस्सा है. जमा हुए कचरे को लगातार ढोने के लिए 89 से ज्यादा बड़े ट्रक, डंपर और हाइड्रोलिक ट्रैक्टर तैनात किए गए हैं. इस वजह से 12 से 18 अगस्त तक चलने वाले 7 दिनों के मेगा सफाई अभियान में हर दिन लाखों रुपये खर्च होने की उम्मीद है. अतिरिक्त मदद स्वच्छ भारत मिशन और घाटों में नागरिक बुनियादी ढांचे के रखरखाव में शामिल कंपनियों के सीएसआर योगदान से मिल सकती है.

किस तरह का कचरा पीछे छूट गया?
7000 टन कचरा किसी एक श्रेणी का नहीं है. इसमें बायोडिग्रेडेबल, रीसाइकिलेबल, कपड़ा, प्लास्टिक और सेनेटरी कचरे का मिश्रण है. इससे कचरे को अलग-अलग करना काफी मुश्किल हो जाता है. गीले और बायोडिग्रेडेबल कचरे में बचा हुआ खाना, लंगर से निकला कचरा, सड़े हुए फल, फूल और पत्तों से बनी पत्तलें शामिल हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह का कचरा गर्म और नमी वाले मौसम में जल्दी सड़ता है इस वजह से इससे बदबू आ सकती है और बैक्टीरिया पनपने के लिए खराब माहौल बन सकता है.
सूखे और कपड़े वाले कचरे में फेंके गए कपड़े, बैग, प्लास्टिक की चटाइयां, चप्पल और छोड़े गए बांस के कांवड़ ढांचे शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक हर की पौड़ी और दूसरे घाटों के आसपास बड़ी मात्रा में कपड़े मिले थे.
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यह बड़ा सफाई अभियान कैसे चलाया जा रहा है?
सफाई का काम बड़े पैमाने पर हाथ से झाड़ू लगाने से शुरू होता है. यह काम रात की शिफ्ट में किया जाता है जब पैदल चलने वालों की आवाजाही कम होती है. लगभग 42 किलोमीटर लंबे कांवड़ कॉरिडोर, घाटों, पार्किंग एरिया और बाजारों में करीब 1000 अतिरिक्त सफाई कर्मचारी तैनात किए जाते हैं.
कर्मचारी सार्वजनिक जगह और घाटों से जमा हुई गंदगी और कचरे को हटाने के लिए फावड़े और तेज दबाव वाले पानी के उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद बड़े वाहन अलग किए गए कचरे को इकट्ठा करते हैं और प्रोसेसिंग के लिए ले जाते हैं.
समस्या वाली जगह की पहचान करने के लिए टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. कचरे के ढेर वाली जगह का पता लगाने के लिए ड्रोन से निगरानी की जा रही है ताकि अतिरिक्त टीम जल्दी से वहां पहुंच सके.

अतिरिक्त कचरा कहां जाता है?
कचरा इकट्ठा करने के बाद उसे 89 से ज्यादा बड़े ट्रैकों और हाइड्रोलिक ट्रैक्टरों से ले जाया जाता है. शहर के अंदर कचरे की पैकेजिंग और उसे संभालने के लिए काम को आसान बनाने के लिए ग्रीन चेक पॉइंट्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
इकट्ठा किए गए कचरे को आखिर में हरिद्वार के सराय में बने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी में ले जाया जाता है. इस फैसिलिटी में मशीन और हाथों से छांटकर प्लास्टिक और कपड़े जैसी दोबारा इस्तेमाल होने लायक चीजों को अलग किया जाता है. इसके बाद दोबारा इस्तेमाल होने लायक प्लास्टिक को रीसाइकलिंग या फिर रिफायनिंग कंपनियों को भेजा जा सकता है. वहां ऑर्गेनिक और गीले कचरे को कंपोस्टिंग के लिए प्रोसेस किया जा सकता है.
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