क्रिसमस से ठीक पहले धरती पर मचेगी तबाही! जानें क्या है पृथ्वी के पास से गुजर रहा ये बड़ा खतरा
नासा का कहना है कि यह एस्टेरॉयड 14, 743 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, जो पृथ्वी से 4,480,000 मील की दूरी पर गुजरेगा. यह धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी का 16 गुना है.

Asteroids in Space: क्रिसमस से ठीक पहले यानी 24 दिसंबर को अंतरिक्ष में अनोखी घटना घटने जा रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार, 120 फीट लंबा एस्टेरॉयड हमारी पृथ्वी के पास से गुजरने वाला है. वैज्ञानिकों ने इस एस्टेरॉयड को 2024 XN1 नाम दिया है. नासा का कहना है कि यह एस्टेरॉयड 14,743 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, जो पृथ्वी से 4,480,000 मील की दूरी पर गुजरेगा, यह धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी का 16 गुना है. नासा के वैज्ञानिकों अनुसार, 120 फीट लंबा एस्टेरॉयड भले ही पृथ्वी के बेहद पास से गुजर रहा हो, लेकिन इससे कोई खतरा नहीं होगा. बावजूद इसके वैज्ञानिक अंतरिक्ष में होने वाली इस अनोखी घटना पर नजर टिकाए हुए हैं.
काफी महत्वपूर्ण है यह एस्टेरॉयड
अंतरिक्ष में किसी एस्टेरॉयड के पृथ्वी के पास से गुजरने की यह घटना नई नहीं है. हालांकि, यह एस्टेरॉयड कई मायनों में खास है. वैज्ञानिकों के अनुसार, 2024 XN1 जैसे ऐस्टेरॉयड्स प्रारंभिक सौरमंडल की उत्पत्ति को समझने के लिए काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं. नासा इस एस्टेरॉयड के मार्ग को समझने के लिए अत्याधुनिक ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग कर रहा है.
अगले पांच एस्टेरॉयड में सबसे बड़ा
वैज्ञानिकों के मुताबिक, एस्टेरॉयड 2024 XN1 पृथ्वी के पास से गुजरने वाले अगले पांच एस्टेरॉयड्स में सबसे बड़ा है. इसके बावजूद वैज्ञानिकों ने आश्वासन दिया है कि इसके पृथ्वी के पास से गुजरने से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं होगा. नासा के एस्टेरॉयड वॉच डैशबोर्ड की मदद से इस एस्टेरॉयड पर नजर रखी जा रही है. NASA का डैशबोर्ड उन सभी क्षु्द्रग्रहों और धूमकेतुओं की जानकारी देता है,जो धरती के करीब से गुजरते हैं या फिर पृथ्वी से टकराने वाले होते हैं. नासा का यह प्लेटफॉर्म पृथ्वी से ऐस्टरॉइड्स की निकटतम दूरी, उसके आकार और स्पीड की जानकारी प्रदान करता है, जिससे वैज्ञानिक पृथ्वी पर अंतरिक्ष की ओर से आ रहे संभावित खतरे को पहले ही भांप लेते हैं.
क्या होते हैं एस्टेरॉयड
क्षुद्रग्रह यानी एस्टेरॉयड खगोलीय पिंड होते हैं, जो हमारे ब्रह्माण्ड में लगातार घूमते रहते हैं. ये एस्टेरॉयड आकार में किसी भी ग्रह से छोटे और उल्का पिंडों से बड़े होते हैं. ये किसी धातु और चट्टान के बने होते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी ग्रह या तारे के टूटने से एस्टेरॉयड का निर्माण होता है. हमारे सौरमंडल में करीब 20 लाख एस्टेरॉयड चक्कर लगा रहे हैं.
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