थप्पड़ ने बर्बाद कर दी रामायण की 'मथंरा' की जिन्दगी, धोखे से बहन ने तोड़ा ललिता पवार का घर और बन गई सौतन
अपने जमाने की मशहूर एक्ट्रेस ललिता पवार को उनके नेगेटिव रोल के लिए हमेशा याद किया जाएगा. पर क्या आप जानते हैं कि हीरोइन का सपना देखने वाली ललिता की जिन्दगी एक थप्पड़ ने बदल दी थी

मां, बुरी सास और नेगेटिव रोल से बॉलीवुड में नाम कमाने वाली ललिता पवार किसी पहचान की मोहताज नहीं है. महज 9 साल की उम्र में इंडस्ट्री में कदम रखने वाली ललित ने करीब 700 से ज्यादा अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम कर रिकॉर्ड बनाया. लेकिन ललिता की जिन्दगी मुश्किलों भरी रही. एक थप्पड़ ने उनके हीरोइन बनने का सपना तोड़ दिया और फिर सगी बहन ने धोखे से पति छीना और सौतन बन बैठी.

थप्पड़ ने बदली जिन्दगी
1942 में फिल्म जंग-ए-आजादी की शूटिंग के दौरान उनके सह कलाकार भगवान दादा ने उनको थप्पड़ मारा, लेकिन ये इतना जबर्दस्त था कि उनके कान का पर्दा फट गया. इलाज के दौरान डॉक्टर ने गलत दवाई दे दी जिससे उनके शरीर के आधे हिस्से में लकवा मार गया और उनकी आंख सिकुड़ गई. लेकिन ललिता ने हार नहीं मानी और नेगेटिव रोल करने लगीं. 90 के दशक में पौराणिक कथा पर आधारित रामायण में तो उन्होंने मंथरा का किरदार निभाकर उसे अमर कर दिया.

धोखे से सगी बहन बनी सौतन
ललिता पवार की शादी गणपत राव से हुई थी. लेकिन शादी में भी उन्हें धोखा दिया और धोखा खुद उनकी बहन से मिला, और उनकी सौतन बन बैठी. ललिता को जब ये पता चला तो उन्होंने गणपतराव को छोड़ दिया. इसके बाद ललिता ने दूसरी शादी फिल्म प्रोड्यूसर राजकुमार गुप्ता से की. इस शादी से उनका एक बेटा है जिसका नाम जय पवार है.

अकेले में गुजरे आखिरी दिन
ललिता के अंतिम दिन भी बहुत कष्ट में गुजरे. उन्हें मुंह का कैंसर हो गया था. जब उनकी मौत हुई उस वक्त पति अस्पताल में भर्ती थे और बेटा दिल्ली में. उनकी मौत का पता बाद में लगा, जब बेटे के फोन करने पर उन्होंने फोन नहीं उठाया. घर का दरवाजा खोला तो पता चला कि उनकी मौत 3 दिन पहले हो चुकी हैं
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