'स्कूल बंक कर देखता था फिल्में...', सुभाष घई ने पुरानी यादें ताजा कर बताया कैसे बने निर्देशक
सुभाष घई ने बताया कि बचपन में छिपकर फिल्में देखना ही उनके लिए सिनेमा सीखने का पहला कदम बना. आगे कहा कि अपने पसंदीदा डायरेक्टर्स को सम्मान देते हुए एफटीआईआई से लेकर बॉलीवुड सफर को किया याद.

सुभाष घई ने एक बार फिर अपने पुराने दिनों को याद करते हुए फिल्मी दुनिया से जुड़ी अपनी शुरुआत की कहानी शेयर की जिसमें उन्होंने बताया कि बचपन में छिपकर फिल्में देखना उनके लिए सीखने का सबसे बड़ा जरिया बना और साथ में आगे चलकर उन्हें सिनेमा की गहराई समझने में मदद मिली.
मशहूर डायरेक्टर सुभाष घई की फिल्मों का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है. सोमवार को डायरेक्टर ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि उन्हें भारतीय सिनेमा में बेहतरीन और सदाबहार फिल्में बनाने की इंस्पिरेशन कहां से मिली थी.
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डायरेक्टर ने इंस्टाग्राम पर मनपसंद डायरेक्टर्स की तस्वीरें पोस्ट शेयर कीं, जिसके साथ उन्होंने लिखा, 'जब कोई फिल्म सिर्फ पसंद की जाए, तो वो हिट फिल्म होती है और जब लोग चर्चा करें, तो वो अच्छी फिल्म होती है और लंबे समय तक याद रहे, याद रखें तो वो क्लासिक फिल्म बन जाती है.'
स्कूल से छिपकर देखने जाते थे फिल्में
डायरेक्टर ने अपनी जिंदगी के पन्नों को पलटते हुए बताया कि फिल्मों के प्रति उनकी दीवानगी बचपन से ही थी. उन्होंने लिखा, 'मैं स्कूल से छिपकर फिल्में देखने जाया करता था. वही फिल्में मेरे लिए भारतीय सिनेमा सीखने का एक आसान तरीका बनीं.'
एफटीआईआई में सीखी सिनेमा की बारीकियां
सुभाष घई ने अपनी पढ़ाई और करियर के सफर का जिक्र करते हुए लिखा, 'बाद में 22 साल की उम्र में मैं फिल्म और टेलीविजन इंस्टीय्यूट ऑफ इंडिया पहुंचा, जहां मुझे वर्ल्ड सिनेमा को करीब से समझने का मौका मिला. हालांकि, प्रोफेशनल तौर पर मैंने मुंबई में कमर्शियल सिनेमा में काम करना चुना. मेरे पसंदीदा फिल्म मेकर्स को दिल से सम्मान.'
फैंस ने की जमकर तारीफ
सुभाष घई की इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है. उनके फैंस कमेंट सेक्शन पर सराहना करते हुए तरह-तरह के फीडबैक दे रहे हैं. कि आपकी सोच बहुत अच्छी हैं.
सुभाष घई फिल्म इंडस्ट्री के नामी निर्देशकों में आते हैं, जिन्होंने शानदार फिल्में देने के साथ-साथ नए कलाकारों को भी कई मौके दिए हैं. उनकी चर्चित फिल्मों में ‘कालीचरण’, ‘विश्वनाथ’, ‘कर्ज’, विधाता’, ‘हीरो’, मेरी जंग’, ‘कर्मा’, ‘राम लखन’, सौदागर’, ‘खलनायक’ ‘परदेस’, ताल’, ‘यादें’ शामिल हैं.
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नए कलाकारों को दे रहे ट्रेनिंग
सुभाष घई इस समय अपने 'व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल' नाम से एक एक्टिंग इंस्टीट्यूट चला रहे हैं. ये स्कूल दुनिया के टॉप 10 फिल्म स्कूलों में से एक माना जाता है. इस एक्टिंग स्कूल में वे नए कलाकारों को एक्टर और फिल्म मेकर्स की ट्रेनिंग दे रहे हैं.

























