एक्सप्लोरर

बर्थडे स्पेशल: आपने सत्यजीत रे की फिल्म नहीं देखी तो बिना सूरज या चांद के ये दुनिया देख रहे हैं!

आज सत्यजीत रे की 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है. इस मौके पर आपको बताते हैं उनके बारे में कुछ ऐसी बातें जो आप सिनेमा प्रेमी हों या नहीं लेकिन आपको जरूर जाननी चाहिए-

सत्यजीत रे की 97वीं बर्थ एनिवर्सरी: 'अगर आपने सत्यजीत रे की फिल्में नहीं देखी तो आप दुनिया में बिना सूरज और चाँद के देखे रह रहे हैं...' ये बात जापान के जाने माने फिल्ममेकर अकीरा कुरोसावा ने कही थी. सत्यजीत रे ऐसे फिल्मकार थे जिन्होंने पूरी दुनिया में भारतीय सिनेमा का परचम लहराया. उनकी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' को भारत ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहना मिली और कई बड़े अवॉर्ड भी मिले. सत्यजीत रे भारतीय सिनेमा के एकमात्र ऐसे नाम हैं जिन्हें वो सारे अवॉर्ड और सम्मान मिले, जिसे पाना, किसी सपने के सच होने जैसा है. 'पद्मश्री', 'पद्म विभूषण' से लेकर दादासाहेब फाल्के और ऑस्कर अवार्ड तक,  हर तरह के पुरस्कार उन्हें मिले. इसके अलावा कुल 32 नेशनल अवॉर्ड उनके नाम हैं. 1992 में उन्हें भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया.

आज हर फिल्ममेकर और एक्टर हॉलीवुड सिनेमा की तरफ अपना कदम बढ़ाना चाहता है लेकिन सत्यजीत रे का नाम उनमें से है जिसने हॉलीवुड ही नहीं दुनिया के बड़े फिल्मेमेकर्स उनसे प्रेरणा लेते हैं. हाल ही में हॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन भारत आए थे. इस दौरान उनसे जब भारतीय सिनेमा के बारे में बात की गई तो उन्होंने सत्यजीत रे का नाम लिया. उनका कहना था कि उन्होंने 'पाथेर पांचाली' देखी है और उसे देखने के बाद उनकी दिलचस्पी भारतीय सिनेमा में बढ़ गई. ईरानी फिल्मकार माजिद मजीदी ने भारत में आकर 'बियॉन्ड द क्लाउड्स' बनाई. सिनेमा के बारे में बातचीत करते हुए उन्होंने बताया, ''मैंने भारत के प्रसिद्ध निर्देशक सत्यजीत रे के जरिए भारतीय सिनेमा को जाना और मेरा सपना था कि मैं भारत में फिल्म बनाऊं.''

आज सत्यजीत रे की 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है. इस मौके पर आपको बताते हैं उनके बारे में कुछ ऐसी बातें जो आप सिनेमा प्रेमी हों या नहीं लेकिन आपको जरूर जाननी चाहिए-

सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 को कोलकाता के बंगाली परिवार में हुआ था. बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया. वो सिर्फ दो साल के थे जब 1923 में उनके पिता सुकुमार राय का निधन हो गया. उनकी मां सुप्रभा राय ने उनका पालन-पोषण अकेले ही किया. उन्होंने कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की लेकिन बचपन से उनकी दिलचस्पी हमेशा फाइन आर्टस में रही. इसके बाद रे शांति निकेतन गए और वहां पांच साल रहे.

बतौर डिजाइनर शुरु किया करियर

1943 में कोलकाता वापस आकर सत्यजीर रे ने बतौर ग्राफिक्स डिजाइनर अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने जिम कॉर्बेट की ‘मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं’ और जवाहर लाल नेहरू की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ जैसे कई पॉपुलर किताबों के कवर डिजाइन किए. यहां पर उन्हें डिजाइन करने में क्रिएटिविटी दिखाने की पूरी छूट थी. उस वक्त किसे पता था कि ये डिजाइनर एक दिन दुनिया में बतौर फिल्मकार भारत का परचम लहराने वाला है. इसी दौरान उन्होंने बिभूतिभूषण बंदोपाध्याय के उपन्यास 'पाथेर पांचाली' के बाल संस्करण पर भी काम किया. इसका नाम था आम आटिर भेंपू (आम की गुठली की सीटी). इससे सत्यजीत रे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी पहली फिल्म इसी पर बनाई.

तीन महीने में देखी 99 फिल्में और फिर लिया मूवी बनाने का फैसला

इसके बाद 1949 में उनकी मुलाकात फ्रांसीसी निर्देशक जां रेनोआ से हुई. ये डायरेक्टर उन दिनों कोलकाता में अपनी फिल्म 'द रिवर' की शूटिंग की लोकेशन तलाश रहे थे. सत्यजीत ने रे उनकी ये तलाश पूरी की. यही वो दौरा था जब सत्यजीत रे के दिमाग में फिल्म बनाने का आइडिया आया.  रेनोआ से उन्होंने पाथेर पांचाली पर फिल्म बनाने को लेकर भी बातचीत की. उनकी एजेंसी ने उन्हें कुछ काम से लंदन भेजा. आपको जानकर हैरानी होगी कि सत्यजीत रे ने तीन महीनों में लंदन में कुल 99 फिल्में देखीं. फ़िल्म Ladri di biciclette (बाइसकिल थीव्स) को देखकर वो काफी प्रभावित हुए. एक बार उन्होंने बताया था कि सिनेमाघर से बाहर निकलते ही उन्होंने फिल्म बनाने की ठान ली थी.

पैसों की किल्लत झेली लेकिन नहीं किया स्टोरी में बदलाव 

बर्थडे स्पेशल: आपने सत्यजीत रे की फिल्म नहीं देखी तो बिना सूरज या चांद के ये दुनिया देख रहे हैं!

लंदन से वापसी के दौरान रास्ते में ही सत्यजीर रे ने फिल्म कैसी बनेगी इसकी प्लानिंग कर ली. उन्होंने इस फिल्म में करीब सभी नए लोगों को लिया. उनके पास जो थोड़े बहुत पैसे थे उससे ही उन्होंने इस पर काम शुरू किया. हालात ऐसे भी थे कि पैसों के अभाव में फिल्म कई बार रूकी. ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने इस फिल्म को बनाने के लिए अपनी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेच दी थी. इतना ही नहीं पत्नी के गहने बेचकर भी उन्होंने इस फिल्म में पैसे लगाए. फिर भी काम पूरा नहीं हुआ. उन्होंने ऐसे लोगों से पैसा लेने से इंकार कर दिया था जो इस फिल्म में अपने हिसाब से बदलाव चाहते थे. 1952 में इस फिल्म पर काम शुरू हुआ और 1955 में बंगाल सरकार ने उन्हें पैसे दिए उसके बाद काम पूरा हुआ.

हिट हुई पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' 

1955 में ही पाथेर पांचाली रिलीज हुई और इसे लोगों ने काफी पसंद किया. इस फिल्म को समीक्षकों से भी काफी तारीफें मिली. 'पाथेर पांचाली' ने कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीते. ये पुरस्कार उन्हें 1956 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिए गए थे.

जब इस फिल्म की Cannes में स्क्रीनिंग हो रही थी तो फ्रांसिसि फिल्ममेकर Francois Truffaut वहां से उठकर चल गए. उनका कहना था कि “गंवारों को हाथ से खाना खाते हुए दिखाने वाली फ़िल्म मुझे नहीं देखनी...'' इसके बाद जब वो 1970 में मुंबई आए तो उन्होंने इस पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि ''इन खबरों के उलट जैसे ही ये फिल्म खत्म हुई मैं पाथेर पांचाली को दोबारा देखना चाहता था.''

बर्थडे स्पेशल: आपने सत्यजीत रे की फिल्म नहीं देखी तो बिना सूरज या चांद के ये दुनिया देख रहे हैं!

इसके बाद उन्होंने फिल्म 'अपराजितो' (1956) और 'अपूर संसार' (1959) बनाई. इन फिल्मों को भी कई पुरस्कार मिले.

सत्यजीर रे ने अपने करियर में पाथेर पांचाली,  'अपराजितो' (1956) और 'अपूर संसार' (1959), 'देवी', 'महापुरुष', 'चारुलता', 'तीन कन्या', 'अभियान', 'कापुरुष' (कायर) और 'जलसाघर' जैसी करीब  37 फिल्मों को डायरेक्ट किया. इसमें फीचर फिल्मों के अलावा, डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्में भी शामिल हैं. साल 1991 में रिलीज हुई आगंतुक उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई.

स्क्रिप्ट से लेकर कैमरा और एडिटिंग तक, सब खुद करते थे सत्यजीत रे

सत्यजित रे सिर्फ फिल्मकार ही नहीं थे. उन्हें लिखने का भी शौक था. उनका मानना था कि अगर फिल्म को डायरेक्ट करना है तो कहानी लिखनी आनी चाहिए. उन्होंने बहुत-सी शॉर्ट स्टोरी और उपन्यास तथा बच्चों पर आधारित किताबें भी लिखी हैं. 'फेलुदा', 'द सल्यूथ' और 'प्रोफेसर शोंकू' उनकी कहानियों के कुछ प्रसिद्ध किरदार हैं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डिग्री देकर सम्मानित किया था.

सत्यजित रे अपनी फिल्मों की स्क्रिप्ट खुद लिखते थे. आज के दौरा में फिल्म बनाने के लिए एक बड़ी टीम की जरुरत पड़ती है लेकिन सत्यजीत रे अपनी फिल्मों का कैमरा वर्क, एडिंटिंग, कास्टिंग, स्कोरिंग और डिजाइनिंग भी वो खुद ही करते थे.

हॉस्पिटल में मिला ऑस्कर अवॉर्ड, बेड से दी थी Live स्पीच

बर्थडे स्पेशल: आपने सत्यजीत रे की फिल्म नहीं देखी तो बिना सूरज या चांद के ये दुनिया देख रहे हैं!

ऑस्कर जीतना हर फिल्मकार का सपना होता है लेकिन सत्यजीत रे इसके पीछे कभी नहीं भागे. उन्होंने अपनी फिल्मों की एंट्री कभी ऑस्कर के लिए नहीं भेजी. लेकिन उनके काम को देखते हुए 1992 में उन्हें ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. उन्हें ये अवॉर्ड लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड की कैटेगरी में दिया गया था. इस साल सत्यजीत रे काफी बीमार थे और अस्पताल में एडमिट थे. उन्हें ये अवॉर्ड वहीं पर दिया गया था. उन्होंने इस अवॉर्ड को लेने के बाद हॉस्पिटल से ही लाइव स्पीच भी दी थी.

भारत रत्न से हुए सम्मानित

सत्यजीत रे को 1958 में 'पद्मश्री, 1965 में 'पद्मभूषण' और 1976 में 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया. 1967 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला. उन्होंने कुल 32 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी अपने नाम किए. 1992 में ही सत्यजीत रे को भारत रत्न से नवाजा गया. इसी साल उन्हें ऑस्कर अवॉर्ड मिला. इसे संयोग ही कहा जाएगा कि ऑस्कर अवॉर्ड मिलने के 24 दिन बाद ही सत्यजीत रे का निधन हो गया. उन्होंने इस अवॉर्ड को अपने करियर का सबसे बेस्ट अचीवमेंट बताया.

23 अप्रैल को ली अंतिम सास

71 साल की उम्र में सत्यजीत रे ने 23 अप्रैल, 1992 को अंतिम सांस ली और संसार को हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गए. उन्होंने कहा था, ''किसी फिल्मकार के लिए उसकी पहली फिल्म एक अबूझ पहेली की तरह होती है. बनने या न बनने के दरम्यान अमूर्त आशंकाओं से घिरी हुई. फिल्म पूरी होती है तो फिल्मकार जन्म लेता है.'' पहली फिल्म बनाते समय उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि वो सिनेमाई दुनिया को इस तरह प्रभावित करेंगे और ऐसा काम कर जाएंगे कि दुनिया उनसे प्रेरणा लेगी और उनके कदमों पर चलेगी.

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Batwara 1947 Vs Awarapan 2: सनी की 'बंटवारा 1947' या इमरान हाशमी की 'आवारापन 2', पहले दिन कौन सी फिल्म मारेगी बाजी?
सनी की 'बंटवारा 1947' या इमरान हाशमी की 'आवारापन 2', पहले दिन कौन मारेगी बाजी?
Spider Man Box Office: 'स्पाइडर मैन' ने 9वें दिन तोड़ा सनी की 'बॉर्डर 2' का रिकॉर्ड, क्या 'धुरंधर 2' को दे पाएगी मात?
'स्पाइडर मैन' ने 9वें दिन तोड़ा सनी की 'बॉर्डर 2' का रिकॉर्ड, क्या 'धुरंधर 2' को दे पाएगी मात?
9 साल छोटे क्रिकेटर यशस्वी जयसवाल को डेट करने के रूमर्स पर मृणाल ठाकुर ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 'ब्रो रिलैक्स...'
24 साल के क्रिकेटर यशस्वी को डेट करने के रूमर्स पर मृणाल ठाकुर ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 'ब्रो रिलैक्स...'
अविका गोर के बाद अब स्वरा भास्कर को भी हुआ डेंगू, अस्पताल में भर्ती हैं एक्ट्रेस, तस्वीर शेयर कर दिया हेल्थ अपडेट
अविका गोर के बाद अब स्वरा भास्कर को भी हुआ डेंगू, अस्पताल में भर्ती हैं एक्ट्रेस

वीडियोज

Ramayana का Global Release! Devendra Fadnavis बोले- Oscar नहीं मिला तो होगी निराशा
Bigg Boss 20 का बड़ा Twist! Salman Khan के ‘Karan Arjun’ Hint से खुला Two Lives का राज
Vasudha: Vasudha-Chandrika को मिलेगा 'Business Women Award', परखने घर पहुंची स्पेशल कमेटी
R. Madhavan बोले- अब उन्हें CM Thalapathy Vijay कहना चाहिए, Politics पर दिया बड़ा जवाब
Kajal Raghwani ने Pawan Singh पर लगाए गंभीर आरोप, Khesari Lal Yadav को भी दिया जवाब

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
भारत का एक और दुश्मन ढेर, लश्कर कमांडर कारी सईद की इस्लामाबाद में मौत
भारत का एक और दुश्मन ढेर, लश्कर कमांडर कारी सईद की इस्लामाबाद में मौत
महिला आरक्षण बिल पर अकाली दल का बड़ा दांव, बैठक में क्या तय हुआ?
महिला आरक्षण बिल पर अकाली दल का बड़ा दांव, बैठक में क्या तय हुआ?
अब टीम इंडिया में कौन लेगा साई सुदर्शन की जगह? रिप्लेसमेंट के 3 सबसे बड़े दावेदार
अब टीम इंडिया में कौन लेगा साई सुदर्शन की जगह? रिप्लेसमेंट के 3 सबसे बड़े दावेदार
DC OTT Release: लोकेश कनगराज- वामिका गब्बी की DC ओटीटी पर कब और कहां होगी रिलीज, जानें-डिटेल्स
लोकेश कनगराज- वामिका गब्बी की DC ओटीटी पर कब और कहां होगी रिलीज, जानें-डिटेल्स
'देश को अमेरिका के हाथों...', ट्रंप के टैरिफ बिल पर बोले केजरीवाल
'देश को अमेरिका के हाथों...', ट्रंप के टैरिफ बिल पर बोले केजरीवाल
असम में बाढ़ से 98 की मौत, हिमाचल से बंगाल तक IMD का अलर्ट, UP-बिहार में कैसा मौसम?
असम में बाढ़ से 98 की मौत, हिमाचल से बंगाल तक IMD का अलर्ट, UP-बिहार में कैसा मौसम?
IIT Delhi Convocation में PM ने किया PMRF का जिक्र, जानिए क्या है ये फेलोशिप 
IIT Delhi Convocation में PM ने किया PMRF का जिक्र, जानिए क्या है ये फेलोशिप 
BP Medicine Cancer Risk: बीपी की दवा से कैंसर का खतरा! WHO की रिपोर्ट ने चौंकाया
बीपी की दवा से कैंसर का खतरा! WHO की रिपोर्ट ने चौंकाया
Embed widget