भगवान दादा की डेथ एनिवर्सरी पर जैकी श्रॉफ ने याद किया ‘शोला जो भड़के’, इस तरह दी श्रद्धांजलि
Bhagwaan Dada Death Anniversary: दिग्गज एक्टर भगवान दादा की डेथ एनिवर्सरी पर एक्टर जैकी श्रॉफ ने उन्हें श्रद्धांजली दी है. जैकी ने पोस्ट शेयर कर उनके आइकॉनिक गाने ‘शोला जो भड़के’ को फिर से याद किया.

जैकी श्रॉफ ने दिग्गज डांसर-एक्टर भगवान दादा को उनकी 24वीं डेथ एनिवर्सरी पर याद करते हुए आइकॉनिक गाने ‘शोला जो भड़के’ को फिर से रिविज़िट किया. इस मौके पर उन्होंने भारतीय सिनेमा में भगवान दादा के अहम योगदान को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी.
जैकी श्रॉफ ने भगवान दादा को किया याद
जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम पर दिग्गज एक्टर भगवान दादा को याद करते हुए एक इमोशनल पोस्ट शेयर किया. उन्होंने भगवान दादा की एक ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीर के साथ-साथ 1951 की क्लासिक फिल्म ‘अलबेला’ के एवरग्रीन गाने ‘शोला जो भड़के’ पर परफॉर्म करते हुए उनका एक वीडियो भी पोस्ट किया, जो फैंस के बीच काफी भावुक कर देने वाला रहा. जैकी श्रॉफ ने अपने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, 'उनकी डेथ एनिवर्सरी पर भगवान दादा को याद कर रहा हूं.'

भगवान दादा की करियर
बता दें, भगवान दादा को खास तौर पर उनकी सोशल फिल्म ‘अलबेला’ के लिए जाना जाता है. इसके अलावा उनके एवरग्रीन गाने ‘शोला जो भड़के’ और ‘ओ बेटा जी ओ बाबूजी किस्मत की हवा कभी नरम’ आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार क्लासिक्स माने जाते हैं. भगवान दादा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साइलेंट एरा में फिल्म ‘क्रिमिनल’ से की थी. साल 1938 में उन्होंने चंद्रा राव कदम के साथ मिलकर अपनी पहली फिल्म ‘बहादुर किसान’ को को-डायरेक्ट किया.
1938 से 1949 के बीच उन्होंने कम बजट की कई स्टंट और एक्शन फिल्में निर्देशित कीं, जो खासतौर पर मेहनतकश दर्शकों के बीच काफी पॉपुलर रहीं.1942 में उन्होंने जागृति पिक्चर्स के जरिए प्रोड्यूसर के तौर पर कदम रखा और 1947 में चेंबूर में जागृति स्टूडियोज की स्थापना की. राज कपूर की सलाह पर उन्होंने सोशल फिल्म ‘अलबेला’ बनाई, जिसमें गीता बाली उनके साथ नजर आईं और संगीत उनके करीबी दोस्त सी. रामचंद्र (चितलकर) ने दिया. बाद में भगवान दादा ने 1956 में ‘भागम भाग’ में निर्देशन के साथ अभिनय भी किया.
भगवान दादा का साल 2002 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. अपने करियर के आखिरी दौर में उन्हें आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद हिंदी सिनेमा में उनके योगदान और विरासत को आज भी सम्मान और याद के साथ देखा जाता है.
Source: IOCL



























