Aghanistan Crisis: तालिबान के कब्जे के बाद बोली एक्ट्रेस Warina Hussain, "महिलाओं की जिन्दगी तो खत्म ही हो गईं"
बॉलीवुड में फिल्म 'लवयात्री' से डेब्यू करने वाली एक्ट्रेस वरीना हुसैन अफगानिस्तान से हैं. हाल ही उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि वहां के हालात डराने वाले हैं उन्हें अपने दोस्तों की चिंता हो रही है.

तालिबान के कब्जे में आने के बाद अफगानिस्तान में हालात संभाले नहीं संभल रहे हैं. काबुल एयरपोर्ट पर हुए आत्मघाती हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया है. लोग डरे सहमे अपने घरों में बैठे हैं, महिलाओं का तो और भी बुरा हाल है. बॉलीवुड में फिल्म लवयात्री से डेब्यू करने वाली एक्ट्रेस वरीना हुसैन इन हालातों से बुरी तरह घबराई हुई हैं. नेटवर्क 18 टीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वहां के हालात डराने वाले हैं. उन्होंने अपने दोस्तों को लेकर भी चिंता जाहिर की.
वरीना हुसैन अफगानिस्तान से हीं हैं. उन्होंने बताया कि, "अफगानिस्तान की हालत देखकर मेरा दिल पूरी तरह टूट गया है, मेरे बहुत सारे दोस्त वहां रहते हैं. उनके लिए मुझे बहुत डर लग रहा है. समझ नहीं आ रहा क्या करना चाहिए."
जब उनसे पूछा गया कि तालिबान तो लगातार कह रहा है कि वो महिलाओं का काम की इजाजत देगा क्या उन पर भरोसा किया जा सकता है तो इस पर एक्ट्रेस ने कहा कि, "उन पर कतई भरोसा नहीं किया जा सकता, कुछ दिन पहले ही मेरी दोस्त का फोन आया और उसने बताया कि उसे धमकाया गया जबकि उन्होंने ब्लू चादरी पहनी थी. वो पूरी तरह हिजाब से कवर थी. तालिबान जो बोल रहे हैं उसका उल्टा कर रहे हैं..उसके अंदर सांस लेना भी कितना मुश्किल होता है. आप उन्हें दबाने की कोशिश कर रहे हैं. उस हालात में कोई कैसे काम कर सकता है. मानवीय अधिकार कहां है? किसी की पोशाक ..किसी का हिजाब उसकी अपनी च्वाइस है."
वरीना ने बताय कि काबुल में हुए धमाके के बाद लोग सहमे हुए हैं उन्होंने कहा कि मेरे दोस्त वहां के हालात को लेकर काफी डरे हुए हैं. सभी लोग अपने घरों में छुपे बैठे हैं, पता नहीं आगे क्या होगा. महिलाओं की हालत तो और भी ज्यादा खराब हो गई हैं.
वरीना से जब सवाल किया गया कि जो महिलाएं घर से बाहर जाती है वो तालिबान को कैसे देखती हैं इस पर उन्होंने जवाब दिया कि "उनकी जिन्दगी तो खत्म ही हो गई. वो लड़कियां पढ़ी लिखी है, वो आत्मनिर्भर थी. वो पहले भी अपने हिजाब में ही रहती थी. कुछ नया नहीं. वो चैरिटी करती थी. अपने अधिकारों को लेकर महिलाओं ने 20 साल तक आत्मनिर्भरता के लिए जो लड़ाई लड़ी थी वो तो खत्म हो गई. वो अब दूसरे दर्जे की नागरिक बनकर रह गईं हैं."
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Source: IOCL






















