RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- राम का काम होकर रहेगा, सुन्नी धर्मगुरु ने कहा- ऐसा बयान ठीक नहीं
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राजस्थान के उदयपुर में कहा कि राम के काम को किए जाने की जरूरत है और राम का काम होकर रहेगा. उनके इस बयान पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

जयपुर: लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जबरदस्त जीत के बाद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि राम का काम करना है, राम का काम होकर ही रहेगा. उन्होंने कहा कि राम हमारे हृदय में बसते हैं और हमें सक्रिय होने व अपने लक्ष्य को हकीकत में बदलने के लिए आगे बढ़ने की जरूरत है.
राजस्थान के उदयपुर में मोहन भागवत ने कहा, "सदियों से यह देश राम का नाम लेता आ रहा है. आज यह देश उन परिस्थितियों से गुजर रहा है कि हमें राम के काम के बारे में भी सोचना चाहिए. मैं युवाओं के हाथों में राम नाम लिखा देखकर खुश होता हूं."
उनके संबोधन के बाद भागवत ने कहा, "हमें मोरारी बापू द्वारा दिए गए संदेश को याद रखना चाहिए. राम के काम को किए जाने की जरूरत है और राम का काम होकर रहेगा. राम हमारे हृदय में बसते हैं. हमें सक्रिय होने की जरूरत है और हमारे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ने की जरूरत है."
भागवत शुक्रवार से ही उदयपुर के चार दिवसीय दौरे पर हैं, जहां वह आरएसएस द्वारा संचालित 'संघ शिक्षा सेवा द्वितीय' प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने आए हुए हैं. शुक्रवार को उदयपुर हवाईअड्डे पर उतरने के तुरंत बाद भागवत ने मीडिया से कहा, "आ गई है सरकार वापस."
राम मंदिर पर आरएसएस के बयान पर मुस्लिम मौलानाओं की तीखी प्रतिक्रिया दी है. शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि जब मामला अदालत के अधीन है, दोनों समुदाय के नेताओं को ऐसे बयानों से दूर रहना चाहिए.
ईदगाह के इमाम और सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा, "ऐसा बयान देना सही नहीं है जब मामला सुप्रीम कोर्ट में हो. मध्यस्थता की प्रक्रिया भी अदालत की निगरानी में चल रही है."
उन्होंने कहा, "मुस्लिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं और हिंदुओं को भी धैर्य रखना चाहिए. इस तरह के बयान से केवल विवाद होता है." बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने कहा, "आरएसएस प्रमुख का बयान इस समय सही नहीं है जब मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही है. मुसलमानों ने हमेशा कहा है कि वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को स्वीकार करेंगे. इसलिए इस तरह के बयान की क्या जरूरत है?"
Source: IOCL















