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Nagaland Election: नगालैंड में 1963 से अब तक नहीं मिली महिला उम्मीदवार को जीत, क्या इस बार रचेगा इतिहास?

Nagaland election 2023: पूर्वोत्तर के राज्य नगालैंड में 60 विधानसभा सीटें हैं, जिन पर अब तक पुरुष उम्मीदवारों का ही वर्चस्व रहा है. इस बार यहां 59 सीटों पर मतदान हुआ, क्या अब महिलाओं को जीत मिलेगी?

Nagaland Vidhan Sabha Chunav 2023: भारत में पूर्वोत्‍तर के राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में विधानसभा चुनाव का परिणाम आने वाला है. यहां 27 फरवरी को मतदान हुआ था. अकेले नगालैंड में 60 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से इस बार 59 विधानसभा क्षेत्रों में वोट डाले गए. हालांकि, इतनी सीटों के बावजूद यहां अब तक कोई महिला उम्‍मीदवार चुनाव नहीं जीती है. इस बार 4 महिला उम्‍मीदवार खड़ी हुईं, अब उनमें से किसी के जीतने की संभावना जताई जा रही है.

महिला उम्‍मीदवारों की जीत पर निगाहें
बता दें कि नगालैंड को 1963 में राज्य का दर्जा मिला था और अलग राज्‍य की विधानसभा के रूप में यहां भी महिला विधायक होनी चाहिए थीं, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो सका है. ऐसा भी नहीं है कि यहां महिलाओं ने चुनाव नहीं लड़ा हो, चुनाव लड़ा था, लेकिन वे कभी सत्ता में नहीं आईं. इस साल चार महिला उम्मीदवार खड़ी हुई हैं, उनमें एनडीपीपी की हेकानी जाखलू, कांग्रेस की रोजी थॉमसन, एनडीपीपी की सलहौतुओनुओ क्रूस और बीजेपी की काहुली सेमा शामिल हैं. एनडीपीपी की हेकानी जाखलू दीमापुर-तृतीय सीट से उम्‍मीदवार हैं. इसी तरह अन्‍य महिला उम्‍मीदवारों ने भी चुनाव लड़ा है.

यहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहा विवादास्पद मुद्दा 
नगालैंड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व एक विवादास्पद मुद्दा रहा है. 2017 में, शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के विरोध में जनजातीय निकायों द्वारा बुलाए गए बैंड के दौरान हुई झड़पों में दो लोग मारे गए थे. ये संगठन महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण वाले चुनावों का यह कहते हुए विरोध कर रहे थे कि यह संविधान के अनुच्छेद 371 (ए) द्वारा नागालैंड के विशेष अधिकारों का उल्लंघन करता है. अनुच्छेद 371 (ए) के अनुसार, जब तक राज्य विधानसभा इसे अनुमोदित करने वाला प्रस्ताव नहीं बनाती, नागा कानूनों या सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ हस्तक्षेप करने वाला संसद का कोई अधिनियम नगालैंड पर लागू नहीं होगा. हालाँकि, अप्रैल 2022 में, नगालैंड सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया था कि वह नागरिक निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करेगी.  

बीजेपी के सत्‍ता में आने पर राज्‍यसभा पहुंची महिला
हाल के वर्षों में जब से बीजेपी ने पूर्वोत्‍तर में खासा पकड़ बनाने की कोशिश की है, तो महिला उम्‍मीदवारों की संख्‍या बढ़ाने की चर्चा तेज हुईं. 2022 में, एस फांगनोन कोन्याक नगालैंड से बीजेपी की राज्यसभा सदस्य के रूप में चुनी गईं और उच्च सदन में सीट पाने वाली पहली महिला बनीं. 

लोकसभा के लिए 1977 में चुनी गई थी केवल एक महिला
इस राज्य में केवल एक महिला सांसद, रानो एम. शाइजा रही हैं, जो 1977 में लोकसभा के लिए चुनी गई थीं. ये गौर करने वाली बात है कि यहां पुरुष प्रधान आदिवासी समाज में, मुखर महिला अधिकार संगठनों की नगालैंड के प्रारंभिक आधुनिक इतिहास में बहुत कम भूमिका थी. यहां एक जनजाति के प्रभुत्व वाले समाज में, कोई नागा महिला पैतृक भूमि या संपत्ति के उत्तराधिकारी के रूप में हकदार नहीं है. वह घर बना सकती है या कुछ जमीन खरीद सकती है, लेकिन उसकी शादी के बाद, वह सारी संपत्ति उसके माता-पिता या भाइयों की होगी. यदि एक विवाहित जोड़ा अलग होने या तलाक लेने का फैसला करता है, तो बच्चे और संपत्ति पति की होती है. एक महिला का अपने जैविक बच्चों या अपनी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है.

'इस बार लिया गया ऐतिहासिक निर्णय'
क्या यह साल नगालैंड में महिला उम्मीदवारों के लिए बदलाव लाएगा? इस बारे में पिछले दिनों असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एनडीपीपी उम्मीदवार सल्हौतुओनुओ क्रूस के लिए एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था, "इतने साल बीत गए, लेकिन आज तक हमारे पास नगालैंड विधानसभा में एक महिला विधायक नहीं है. हालांकि, इस बार एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है. ये समय आ गया है जहां हम केवल लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के बारे में बात नहीं कर रहे बल्कि आने वाले दिनों में राज्य की नियति का नेतृत्व करने के लिए अपनी महिला विधायकों को जिम्मेदारी देंगे."

नगालैंड के मुख्यमंत्री की अपील
नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने भी राज्य के लोगों को अपनी ये मानसिकता बदलने की जरूरत पर जोर दिया कि नगा महिलाएं निर्णय लेने वाली संस्थाओं में नहीं हो सकतीं. नेफ्यू रियो ने कहा कि जमीनी स्तर की मांग के आधार पर महिलाओं को टिकट दिया गया है. 

अभी महिलाओं की साक्षरता पुरुषों की तुलना में कम
यदि राज्य की साक्षरता दर को देखें, तो जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में नगालैंड में साक्षरता दर में वृद्धि देखी गई है और नवीनतम जनसंख्या जनगणना के अनुसार साक्षरता दर 79.55 प्रतिशत है, जिसमें पुरुष साक्षरता 82.75 प्रतिशत है, जबकि महिला साक्षरता है 76.11 प्रतिशत है. इससे पहले 2001 में, नागालैंड में साक्षरता दर 66.59 प्रतिशत थी, जिसमें पुरुष और महिला क्रमशः 71.16 प्रतिशत और 61.46 प्रतिशत साक्षर थे. 

यह भी पढ़ें: Elections Results 2023: मेघालय-नागालैंड में आदिवासी आरक्षित हैं 95% सीटें, पार्टियों की हार-जीत में इन सीटों की है अहम भूमिका

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