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VIP Candidate: एसपी के गढ़ कन्नौज में डिंपल यादव को आसान जीत की उम्मीद, जानें उनका सियासी सफर

कन्नौज लोकसभा सीट को समाजवादी पार्टी का गढ़ कहा जाता है, जब से एसपी पार्टी बनी है तब से इस सीट पर एसपी सिर्फ 1996 में ही हारी है. 984 में दिल्ली की सीएम रहीं शीला दीक्षित यहां से चुनाव जीती थीं.

नई दिल्ली: यूपी जिन लोकसभा सीटों पर सबकी नजर है उनमें से एक सीट कन्नौज भी है, यहां से पूर्व सीएम और सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव चुनाव लड़ रही हैं. डिंपल यादव का मुकाबला बीजेपी उम्मीदवार सुब्रत पाठक से है. कन्नौज सीट की अहमियत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि आज खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां रैली की. डिंपल यादव को राजनीति में दस साल हो गए हैं. कन्नौज सीट भले ही समाजवादी पार्टी का गढ़ रही हो लेकिन इस बार डिंपल यादव की राह आसान नहीं है.

डिंपल यादव का राजनीतिक सफर डिंपल यादव ने राजनीति की शुरुआत 2009 में फिरोजाबाद से उपचुनाव में राजबब्बर के खिलाफ चुनाव लड़ कर की. इस चुनाव में डिंपल यादव को हार का सामना करना पड़ा, बताते हैं कि डिंपल को मुलायम की नाराजगी के बावजूद मैदान में उतारा गया था. दरअसल 2009 में अखिलेश ने कन्नौज और फिरोजाबाद से दो जगहों से चुनाव लड़ा और दोनों ही जगह जीत दर्ज की. अखिलेश ने फिरोजाबाद सीट छोड़ दी थी. दूसरी बार साल 2012 में डिंपल को कन्नौज से लोकसभा उपचुनाव लड़ाया गया, इस बार उन्होंने निर्विरोध जीत दर्ज की. 2012 में ये सीट अखिलेश यादव के सीएम बनने के बाद खाली हुई थी. इसी के साथ डिंपल यादव ने रिकॉर्ड भी बनाया, वे देश भर में 44वीं और उत्तर प्रदेश की चौथी ऐसी सांसद बनी जो निर्विरोध चुनाव जीतीं.

डिंपल यादव का व्यक्तिगत जीवन साल 1978 में पुणे में आर्मी कर्नल एससी रावत के घर पैदा हुईं डिंपल यादव की पढ़ाई पुणे, भटिंडा और अंडमान निकोबार द्वीप में हुई. इंटरमीडियट के बाद उन्होंने अपना ग्रेजुएशन लखनऊ यूनिवर्सिटी से किया, यहीं उनकी मुलाकात अखिलेश यादव से हुई. अखिलेश यादव के जीवन पर 'अखिलेश यादव - बदलाव की लहर' किताब लिखने वाली सुनीता एरन ने अपनी किताब में लिखा कि अखिलेश और डिंपल फ्रेंड से मिलने का बहाना बनाकर एकदूसरे से छुपकर मिलते थे.

साल 1999 में अखिलेश जब अपनी इंजीनियरिंग पूरी करके ऑस्ट्रेलिया से वापस लौटे तब दोनों ने शादी कर ली. डिंपल और अखिलेश की दो बेटियां (अदिति और टीना) और एक बेटा (अर्जुन) भी है. मुलायम सिंह यादव अखिलेश और डिंपल की शादी के लिए तैयार नहीं थे लेकिन अखिलेश यादव ने अपनी दादी की मदद ली और फिर मुलायम सिंह ने भी हां कर दी.

कन्नौज लोकसभा सीट के बारे में जानिए कन्नौज लोकसभा सीट को समाजवादी पार्टी का गढ़ कहा जाता है, जब से एसपी पार्टी बनी है तब से इस सीट पर एसपी सिर्फ 1996 में ही हारी है. 1999 में मुलायम, 2000, 2004 और 2009 में अखिलेश जबकि 2012 और 2014 में डिंपल यादव यहां से जीती हैं. 1984 में दिल्ली की सीएम रहीं शीला दीक्षित यहां से चुनाव जीती थी. कन्नौज में यादव, दलित और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं.

कन्नौज लोकसभा सीट पर एससी समाज के लगभग 22 फीसदी वोटर हैं वहीं मुस्लिम समाज के लगभग 13 फीसदी वोटर हैं. सवर्ण समाज के लगभग 3 लाख वोटर हैं जिनमें ब्राह्मण, बनिया और राजपूत हैं. ओबीसी समाज की बात करें तो इसमें यहां यादवों के अलावा भी 2 लाख वोटर हैं, ओबीसी मतदाताओं में लोधी, कुशवाहा, पटेल बघेल काफी मायने रखते हैं. कन्नौज लोकसभा सीट में विधानसभा की कुल 5 सीटें हैं, 2017 के विधानसभा चुनाव में 4 सीटों पर बीजेपी जबकि 1 सीट कन्नौज विधानसभा सीट में एसपी को जीत मिली थी.

यह भी देखें-  कन्नौज की रैली में डिंपल यादव ने मायावती के पैर छूकर लिया आशीर्वाद

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