Karnataka Elections: बेलगावी को कर्नाटक में सरकार बनाने या तोड़ने वाला जिला क्यों कहा जाता है, क्या रहा है इतिहास? जानिए
Karnataka Election 2023: बेलगावी जिले में बेंगलुरू शहर के बाद सबसे अधिक 18 सीटें हैं. यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है, क्योंकि 2018 में जेडी (एस) शून्य पर सिमट गई थी.

Karnataka Election 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नजदीक आने से सभी पार्टियां राज्य में अपनी-अपनी कमर कसती नजर आने लगी हैं. ऐसे में सभी पार्टियों के मन में सीटों के समीकरण तय करने और मतदाताओं के समर्थन प्राप्त करने की तैयारी चल रही है. इसलिए आगे हम कर्नाटक के एक बेलगावी जिले को जानेंगे, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह सीटों की संख्या के मामले में दूसरा सबसे बड़ा, साथ ही बड़े राजनीतिक परिवारों का घर है और यह सरकार बनाने या तोड़ने वाले जिले के नाम से जाना जाता है.
बेलगावी जिले में बेंगलुरु शहर के बाद सबसे अधिक सीटें हैं और इसलिए जब कर्नाटक में चुनाव की बात की जाती है तो इसे एक प्रमुख जिले के तौर पर देखा जाता है. इस जिले में कुल 18 सीटें हैं, जो कहीं ना कहीं एक साथ किसी की तरफ चली गईं तो काफी अंतर ला सकती हैं. यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है, क्योंकि 2018 में यहां जेडी (एस) शून्य पर सिमट गई थी.
यह जिला प्रमुख राजनीतिक परिवारों का घर है
बेलगावी प्रमुख रूप से कृषि जिले के अंतर्गत आता है. हालांकि यहां के कई निर्वाचित प्रतिनिधियों ने जिले में राजनीतिक उपस्थिति स्थापित करने में मदद की है. यह जिला राज्य के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक का घर भी है - जारकीहोली परिवार से बीजेपी में दो विधायक रमेश और बालचंद्र हैं. वहीं कांग्रेस में एक विधायक सतीश और एक एमएलसी लखन जारकीहोली हैं. यहां एक अन्य प्रमुख परिवार जोलेस हैं, जिनका प्रतिनिधित्व वर्तमान मुजरई मंत्री शशिकला जोले, निप्पनी से विधायक, और उनके पति, चिक्कोडी सांसद अन्ना साहेब जोले कर रहे हैं. ये दोनों बीजेपी के हैं.
जारकीहोली ने 2018 के विधानसभा चुनावों में अथानी से सावदी को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, क्योंकि उन्होंने महेश कुमथल्ली का समर्थन किया था, जो कांग्रेस के टिकट पर जीते थे. वहीं सतीश जारकीहोली को विशेष रूप से साल 2018 के विधानसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा बादामी सीट से बीजेपी के प्रत्याशी बी श्रीरामुलु को नजदीकी अंतर से हराने के पीछे का एक कारण माना जाता है. उन्होंने सिद्धारमैया के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए बादामी में काफी बड़े पैमाने पर काम किया था.
सबसे ज्यादा लिंगायत समाज का है दबदबा
कर्नाटक के इस बेलगावी जिले में 18 सीटों पर पांच निर्वाचन क्षेत्रों में मराठों का वर्चस्व रहा है, जबकि बचे हुए 13 निर्वाचन क्षेत्रों में से ज्यादातर पर लिंगायत समाज का दबदबा है. इस जिले में इन समूहों के लिए दो सीटें आरक्षित हैं. साथ ही ओबीसी और एससी/एसटी की भी यहां अच्छी खासी आबादी है. जिले में साल 2018 के चुनावों में, बीजेपी ने 10 और कांग्रेस ने 8 सीटें जीतीं थी. 2019 में दलबदल के बाद स्थिति बदल गई. कांग्रेस के तीन विधायक- रमेश जारकीहोली (गोकक), महेश कुमाथल्ली (अथानी) और श्रीमंत पाटिल (कागवाड़) इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए थे.
यहां साल 2018 की तरह, 2013 में भी बेलगावी जिले में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था. तब बीजेपी ने 8 और कांग्रेस ने 7 सीटें जीती थीं, और 2008 में दोनों पार्टियों ने 9 और 7 सीटें जीती थीं.
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Source: IOCL















