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बिहार चुनाव: यादवों की नाराजगी पड़ी भारी, मुस्लिमों ने छोड़ा साथ, जानें RJD की हार के 5 बड़े कारण

Bihar Results 2025: आरजेडी का परंपरागत वोट बैंक मुस्लिम और यादव समुदाय रहा है. पार्टी ने इस चुनाव में 50 यादव उम्मीदवार और 18 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. इसके बावजूद परिणाम बेहद निराशाजनक रहे.

Bihar Election Results 2025: बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को इस विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा है. महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में सामने आए तेजस्वी यादव की पार्टी के कमजोर प्रदर्शन ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है. यह सवाल उठ रहा है कि जब तेजस्वी ने जनता से कई बड़े वादे किए थे, तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि पार्टी का मुख्य वोट बैंक—मुस्लिम और यादव—उससे दूर होता दिखा. आइए विस्तार से समझते हैं कि आरजेडी की हार के प्रमुख कारण क्या रहे.

आरजेडी की हार के बड़े 5 कारण

नतीजों और रुझानों के अनुसार महागठबंधन की मुख्य सहयोगी आरजेडी इस बार महज 27 सीटों पर सिमटती दिख रही है, जबकि कांग्रेस 5 सीटें पाती दिख रही है. आरजेडी का परंपरागत वोट बैंक मुस्लिम और यादव समुदाय रहा है. पार्टी ने इस चुनाव में 50 यादव उम्मीदवार और 18 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. इसके बावजूद परिणाम बेहद निराशाजनक रहे.

एक बड़ा आंकड़ा यह भी है कि इस बार काफी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं ने आरजेडी के बजाय ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को समर्थन दिया. कई मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM ने आरजेडी के वोट को सीधे प्रभावित किया, जिससे महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा.

दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह रहा कि मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव कई सीटों पर जेडीयू की ओर गया. जहाँ जेडीयू और आरजेडी के मुस्लिम उम्मीदवार आमने-सामने थे, वहाँ जेडीयू को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दी. यह रुझान आरजेडी के पारंपरिक समीकरणों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ.

आरजेडी को यादव वोटों की नाराज़गी का भी सामना करना पड़ा. जिन सीटों पर यादव मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते थे, वहाँ इस बार वोटों का बिखराव देखा गया. इसके साथ ही जनसुराज पार्टी का पहली बार मैदान में उतरना भी महागठबंधन के लिए सिरदर्द बना, क्योंकि उसने कई जगहों पर विपक्षी वोट काटे.

इसके अलावा, राज्य और केंद्र की सत्ताधारी सरकार ने अपनी योजनाओं के माध्यम से जातीय राजनीति की परंपरागत धारणाओं को काफी हद तक प्रभावित किया. नीतीश कुमार की योजनाओं से लाभान्वित होने वाले यादव सहित अन्य समुदायों और जातीय समूहों का झुकाव एनडीए की ओर बढ़ा. इसका सीधा असर आरजेडी और महागठबंधन के वोट शेयर पर पड़ा.

ये भी पढ़ें: अपनी कमजोरी को ऐसे बनाया हथियार, जानें बिहार में NDA की जीत के 5 बड़े कारण

राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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