लोकसभा चुनाव: गूगल ने भी कसी कमर, राजनीतिक विज्ञापन पर खर्च को सार्वजनिक करने का वादा
लोकसभा चुनाव को लेकर सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावती दी है. सरकार ने कहा कि अगर गलत तरीके चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने की कोशश हुई तो इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं, नेता अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं. इसके साथ ही डिजिटल मीडिया में जोर शोर सरे प्रचार हो रहा है. इस प्रचार के बीच ट्विटर के बाद दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने अपने प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक विज्ञापनों को लेकर ज्यादा पारदर्शिता बरतने की बात कही है. विज्ञापनदाता के साथ-साथ अब विज्ञापन पर कितने पैसे खर्च किए गए, इसकी जानकारी गूगल सार्वजनिक करेगा.
गूगल के मुताबिक चुनाव आयोग या आयोग की ओर से तय किए गए किसी अधिकारी के सर्टिफिकेट के बाद ही राजनीतिक विज्ञापन दिया जा सकेगा. इसके साथ ही विज्ञापन कौन दे रहा है, गूगल इसके लिए सत्यता की भी पहचान करेगा.
गूगल ने बयान जारी कर बताया है कि पहचान सत्यापन की प्रक्रिया 14 फरवरी से शुरू हो जाएगी. इसके साथ ही पूरी विज्ञापन पारदर्शिता रिपोर्ट और और विज्ञापन लाइब्रेरी मार्च से शुरू हो जाएगी. गूगल के बड़े अधिकारी के मुताबिक 2019 में 85 करोड़ से ज्यादा भारतीय देश की नई सरकार चुनने के लिए अपना वोट डालेंगे. हम चुनावों को लेकर गंभीर विचार कर रहे हैं और भारत समेत पूरी दुनिया में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन करना जारी रखेंगे.
बता दें कि आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावती दी है. सरकार ने कहा कि अगर गलत तरीके चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने की कोशश हुई तो इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
गूगल से पहले ट्विटर और फेसबुक भी इस तरह के कदम उठा चुके हैं. ट्विटर ने राजनीतिक दलों के विज्ञापन पर खर्च को दिखाने के लिये वह डैशबोर्ड देने की बात कही थी. वहीं दूसरी ओर फेसबुक ने कहा था कि राजनीतिक विज्ञापन देने वालों की पहचान और लोकेशन की जानकारी अनिवार्य की जाएगी.


















