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NEET UG 2026 Exam Pattern: नीट में क्यों नहीं है Pre और Mains वाला पैटर्न? जानिए क्यों सरकार एक ही परीक्षा से भरती है सीटें

नीट यूजी पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा रद्द कर दी. परीक्षा रद्द करने के इस फैसले के बाद पेपर लीक को लेकर सवाल खड़े हो गए. परीक्षा रद्द करने के बाद एनटीए ने दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया है.

NEET UG 2026 Exam Pattern: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल नीट यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद रद्द कर दी गई है. परीक्षा रद्द करने के इस फैसले के बाद पेपर लीक को लेकर कई सवाल खड़े होने लग गए हैं. वहीं परीक्षा रद्द करने के साथ ही एनटीए ने दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया है. लेकिन नीट परीक्षा को लेकर सवालों में यह विवाद भी सामने आ रहा है कि आखिर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई की तरह मेडिकल एंट्रेंस में प्री और मेन्स वाला सिस्टम क्यों नहीं है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं की नीट में प्री और मेन्स वाला पैटर्न क्यों नहीं है और सरकार एक ही परीक्षा से सीटें क्यों भरती है. 

पूरे देश के लिए एक ही मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट 

नीट यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट फिलहाल देश में मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एडमिशन का एकमात्र राष्ट्रीय परीक्षा सिस्टम है. 2019 में लागू हुए नेशनल मेडिकल कमिशन एक्ट के बाद इसे कानूनी रूप से देश भर के मेडिकल कॉलेज के लिए अनिवार्य कर दिया गया. इससे पहले मेडिकल एडमिशन के लिए अलग-अलग परीक्षाएं होती थी. राज्य की अपनी सीईटी परीक्षा थी, जबकि एम्स और JIPMER जैसे संस्थान अलग एंट्रेंस टेस्ट कराते थे. बाद में इन सभी को खत्म कर एक कॉमन परीक्षा लागू की गई, ताकि सभी छात्रों का मूल्यांकन एक समान तरीके से हो सके. 

नीट में Pre और Mains सिस्टम क्यों नहीं अपनाया गया? 

एक्सपर्ट के अनुसार मेडिकल प्रवेश परीक्षा को सरल और एकरूप बनाने के लिए सरकार ने सिंगल स्टेज एग्जाम मॉडल को चुना. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर जेईई की तरह दो चरणों वाली परीक्षा होगी तो छात्रों पर एक्स्ट्रा दबाव बढ़ेगा और उन्हें कई स्तर की तैयारी करनी पड़ेगी. सरकार और परीक्षा एजेंसी का तर्क रहा है कि एक ही परीक्षा से देश भर के छात्रों की मेरिट तैयार करना ज्यादा आसान और पारदर्शी माना जाता है. इसी वजह से नीट और को एक राष्ट्रीय मेरिट आधारित परीक्षा के रूप में रखा गया है. 

सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है समर्थन 

सुप्रीम कोर्ट भी कई बार नीट को जरूरी बता चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने और निजी कॉलेजों में मनमानी रोकने के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट जरूरी है. कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि मेडिकल कॉलेज में एडमिशन सिर्फ नीट स्कोर के आधार पर ही होंगे. निजी और अल्पसंख्यक संस्थानों को भी अलग प्रवेश परीक्षा कराने की अनुमति नहीं दी गई है. 

ये भी पढ़ें-NEET UG 2026 Exam: देश में पहली बार कब हुई थी NEET परीक्षा? जानिए कैसे बदला मेडिकल एडमिशन का पूरा सिस्टम

क्यों शुरू हुई नीट की व्यवस्था? 

सरकार का कहना है कि पहले अलग-अलग परीक्षाओं की वजह से छात्रों को कई राज्य और संस्थाओं के लिए अलग-अलग तैयारी करनी पड़ती थी. इससे समय, पैसा और मानसिक दबाव बढ़ता था. एक ही परीक्षा लागू होने के बाद छात्रों को सिर्फ एक एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी करनी पड़ती है. इसके अलावा मेडिकल एडमिशन में डोनेशन, सीट खरीदने और धांधली जैसे मामलों पर रोक लगाने के लिए भी नीट को लागू किया गया था. एक राष्ट्रीय मेरिट लिस्ट बनाने से एडमिशन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई. हालांकि नीट लागू होने के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुए. साल 2024 में पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स को लेकर बड़ा विवाद हुआ था, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. वहीं अब 2026 में भी पेपर लीक की खबरों के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी है.

ये भी पढ़ें-NEET UG 2026 Exam Cancelled: क्या दोबारा परीक्षा के लिए फिर से देनी होगी फीस, एक क्लिक में समझ लें पूरा प्रोसेस?

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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